NDA Sweep Bihar Rajya Sabha Election : सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए मतदान हुआ, लेकिन सबसे ज्यादा सियासी हलचल बिहार में देखने को मिली। यहां महागठबंधन के 4 विधायकों के मतदान से दूरी बनाने के कारण सत्तारूढ़ एनडीए को अप्रत्याशित रूप से पांचवीं सीट भी मिल गई।
बताया जा रहा है कि अगर ये चारों विधायक वोट डालते, या विधानसभा में अपनी पार्टी के कैंडिडेट को वोट करते तो मुकाबला बदल सकता था और एक सीट महागठबंधन के खाते में जा सकती थी।
वोटिंग से दूर रहने वालों में तीन विधायक कांग्रेस पार्टी के थे, जबकि एक विधायक राष्ट्रीय जनता दल से था। अनुपस्थित रहने वाले विधायकों में मनोहर प्रसाद सिंह, सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज विश्वास और फैजल रहमान शामिल हैं।
NDA Sweep Bihar Rajya Sabha Election: ‘उम्मीदवार हमारे सिद्धांत के खिलाफ था’

कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह ने अपनी गैरमौजूदगी पर सफाई देते हुए कहा कि वे अपने सिद्धांतों के आधार पर फैसला लेते हैं। और उन्होंने कहा कि उनका सिद्धांत कहता है कि जो निचला तबके का है उसे मौका दिया जाए। उनके मुताबिक, राज्यसभा के लिए चुना गया उम्मीदवार उनके सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण के अनुरूप नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवार को वे महागठबंधन का नहीं, बल्कि RJD का प्रत्याशी मानते हैं।
‘कांग्रेस की अनदेखी हुई
वहीं, फारबिसगंज से विधायक मनोज विश्वास ने भी मतदान से दूरी बनाए रखने के पीछे पार्टी की उपेक्षा को कारण बताया। उनका कहना है कि इस चुनाव में कांग्रेस को महत्व नहीं दिया गया और प्रदेश नेतृत्व को भी नजरअंदाज किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने पहले ही पार्टी अध्यक्ष को अपने फैसले की जानकारी दे दी थी।
वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उम्मीदवार उनके पारंपरिक वोटबैंक का प्रतिनिधित्व नहीं करता था, इसलिए उन्होंने मतदान नहीं किया।
Bihar Rajya Sabha Election: कांटे की थी पांचवीं सीट की लड़ाई

इस चुनाव में पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा था। NDA को जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत थी, जबकि महागठबंधन को भी संख्या जुटानी थी। महागठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव ने रणनीति बनाकर एआईएमआईएम के विधायकों और बहुजन समाज पार्टी के समर्थन का दावा किया था। हालांकि यह नोबत बनने ही नहीं दी, क्योंकि महागठबंधन के 4 विधायकों की गैर मौजूदगी के चलते उनका उम्मीदवार जीतने में असफल रहा, और पांचों सीटों पर एनडीए के उम्मीदवार जीत गए।
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