Nitish Kumar News : बिहार चुनाव में एनडीए गठबंधन ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और नीतीश कुमार ने दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली. इस जीत का श्रेय नीतीश कुमार को गया क्योंकि उन्होंने 75 साल की उम्र में जिस तत्परता से चुनाव में अपनी सक्रियता दिखाई वह हैरान करने वाली थी।
विपक्ष लगातार नीतीश के स्वास्थ्य का मुद्दा बनाता रहा मगर नीतीश कुमार ने चुनाव दर चुनाव रैली कर यह बता दिया कि वे इस राजनीति के सबसे पके खिलाड़ी हैं।
हालांकि बीते लगभग दो दशकों से बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए नीतीश कुमार को शपथ लिए हुए 105 दिन ही गुज़रे थे कि उन्होंने राज्यसभा जाने का फैसला कर लिया, जिसने राज्य में बन रहे नए समीकरणों को लेकर कई सवाल छोड़ दिए।
Bihar Politics : पार्टी में रोष
उनके इस फ़ैसले ने कइयों को चौंकाया है, ख़ासकर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को.
उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं में रोष है, नाराज़गी है और इस बात को लेकर गहरा असमंजस भी कि आख़िर इतना बड़ा फ़ैसला इतनी अचानक कैसे और क्यों लिया गया.
Who Will be Next CM : सोशल मीडिया से दिया संदेश
नीतीश कुमार के सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक़, वह अपनी स्वेच्छा से संसद के ऊपरी सदन का सदस्य बनना चाहते हैं लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए यह स्वीकार कर पाना मुश्किल हो रहा है.
बाढ़ से आए एक कार्यकर्ता ने कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की ख़बर सामने आने के बाद से उनकी होली की खुशी गायब हो गई है. नीतीश के मुख्यमंत्री पद से हटने को लेकर पार्टी में रोष है। कई जगहों से इसे लेकर विरोध की खबरें मिल रही हैं।
सैकड़ों की तादाद में जेडीयू कार्यकर्ताओं की भीड़ 5 मार्च की सुबह से ही पार्टी दफ़्तर और एक अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास के बाहर जुटनी शुरू हो गई थी.
सीएम आवास के बाहर तो हालात ऐसे बन गए कि पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती करानी पड़ी, यहां तक कि कार्यकर्ताओं के वहां खड़े रहने पर भी पाबंदी लगा दी गई.
रही बात जेडीयू दफ़्तर की तो नाराज़गी में डूबे कार्यकर्ताओं ने यहां तोड़फोड़ तक कर दी.
उत्तराधिकारी कौन होगा?
इस बीच लोकसभा में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने निशांत कुमार को जेडीयू की कमान संभालने का सुझाव दिया है।
नीतीश कुमार के इस फैसले ने सभी को चौंकाया खासकर खुद उनके कार्यकर्ताओं के लिए यह परेशान करने वाला फैसला रहा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नीतीश कुमार के इस फ़ैसले के पीछे की मुख्य वजहें क्या रही होंगी, क्या उन पर वाकई किसी का दबाव था, बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, किस पार्टी से होगा?
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीति में प्रवेश करने के दावों में कितनी सच्चाई है और साथ ही सवाल ये भी कि अब जेडीयू का भविष्य क्या होगा.
बताया जा रहा है कि नीतीश के यह फैसला लेने के पीछे उनका बिगड़ता स्वास्थ्य है जिस पर काफी समय से चर्चाएं भी चल रही हैं। साथ में राज्य सभा में नामांकन कर 2 साल में होता है, यदि अभी वे नामांकन नहीं कराते तो 2 साल बाद उन्हे यह मौका मिल पाता।
एक वजह यह भी बताया जा रहा है कि उनके उत्तराधिकारी की रेस में पार्टी के नेशनल सेक्रेटरी और पूर्व ब्यूरोक्रैट मनीष वर्मा का नाम सामने आने लगा था, जिससे नीतीश कुमार के लिए थोड़ी अटपटी स्थिति पैदा हो गई थी. इसके बाद उनके बेटे निशांत कुमार को राज्यसभा भेजने की चर्चा होने लगी. पर निशांत दिल्ली जाने के लिए तैयार नहीं हुए. नतीजतन ललन सिंह, संजय झा, विजय चौधरी जैसे लोगों ने नीतीश कुमार को मनाया और यह भरोसा दिलाया कि उनके लिए राज्यसभा जाने का यही सही समय है.
जेडीयू को बचाने के लिए निशांत जरूरी

बता दें, नीतीश के राज्यसभा जाने के बाद जेडीयू के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगने लगे हैं, ऐसे में अगर निशांत के राजनीति में आने को जरूरी माना जा रहा है। ताकि जेडीयू को उत्तराधिकार मिल सके। कुछ नेताओं का मानना भी है कि नीतीश के बाद पार्टी की कमान निशांत के कंधों पर रहेगी तो ज्यादा सेंट्रलाइज पावर रहेगी। ऐसे में जेडीयू नेता में गुट बनने के आसार कम होंगे।
बता दें, 50 साल के निशांत कुमार, नीतीश कुमार के इकलौते बेटे हैं. वे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन से लगभग दूर ही रहे हैं. उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है.
वे सक्रिय राजनीति में नहीं हैं और न ही किसी पार्टी पद पर हैं. मगर समय-समय पर उनके राजनीति में आने की अटकलें लगती रही हैं, पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान और उसके बाद भी वह कई मौकों पर नीतीश कुमार के साथ नज़र आए और मीडिया से रूबरू भी हुए.
लेकिन अब तक उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई राजनीतिक भूमिका नहीं निभाई है. नीतीश कुमार के राज्य सभा में जाने के फैसले के बाद संभव है कि निशांत कुमार को पार्टी कमान की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यह जेडीयू की तरह से बड़ा दाव होगा, हालांकि इससे खुद नीतीश – निशांत पर भी वंश वाद को बढ़ावा देने की बात उछलेगी, जिसका वे व भाजपा अक्सर मुद्दा बनाती रही है।
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