नीट पेपर लीक 2026 और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन हुआ। दिल्ली के जंतर मंतर पर ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में इसके खिलाफ जमकर छात्रों ने बवाल काटा। इसी बीच 20 जुलाई 2026 को हुए संसद मार्च में छात्रों के ऊपर बर्बता को लेकर 22 जुलाई को बिहार के कई जिलों में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। इस दौरान प्रोटेस्ट ने हिंसक रूप ले लिया और कई छात्र और पुलिस घायल हुए। इस प्रोटेस्ट को भड़काने और उग्र बनाने का पूरा आरोप लालू यादव के बड़े बेटे और JJP चीफ तेज प्रताप पर लगा और बिहार पुलिस इस मामले में उन्हें गिरफ्तार कर ली। इसके बाद, उन्हें 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आइए अब उन धाराओं पर नजर डालें जिनके तहत तेज प्रताप के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और ऐसे में उन्हें क्या सजा हो सकती है।
इन धाराओं में केस दर्ज
बता दें कि तेज प्रताप अभी जेल में बंद है। उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। नए कानून के तहत तेज प्रताप के खिलाफ धारा 109 लगाई गई है। यह धारा हत्या के प्रयास से संबंधित मानी जाती है। यह कानूनी प्रावधान तब लागू होता है जब कोई युवक ऐसा कदम उठाता है, जिससे किसी की जान को सीधा खतरा बनता है। ऐसे में अगर तेज प्रताप पर लगे आरोप अगर सही साबित होता है तो तेज प्रताप को कम से कम 10 साल की सजा और भारी जुर्माना लग सकता है। वहीं अगर किसी पीड़ित पर गंभीर चोट पहुंचाना साबित होता है तो उन्हें उम्रकैद मिल सकती है।
तेजस्वी ने बोला हमला
बीएनएस की धारा 109 , 132, 297 , 197(2), 190, 251 और 191(3) 61(2) , 49 , 293, 299, और 196, 223 , धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज हुआ है। अब ऐसे में ये धारा के अनुसार उनपर कार्रवाई हो सकती है अगर ये लगे आरोप सच साबित होता है तो। बता दें कि बिहार सरकार में पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप को शनिवार रात गिरफ़्तार कर लिया गया। उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर जेल में रखा गया है। इस मामले को लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है, “हमारे बड़े भाई तेज प्रताप यादव को गिरफ़्तार किया गया है और उन पर धाराएँ लगाई गई हैं’.


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