Azhar Hussain: फ़िल्मी दुनिया में अपनी काबिलियत, सादगी और मेहनत से पहचान बनाने वाले अज़हर हुसैन आज एक ऐसा नाम बन चुके हैं, जिन्होंने मुश्किल हालात से लड़कर अपने दम पर कामयाबी हासिल की है। डायरेक्टर होने के साथ-साथ वे प्रोड्यूसर, स्टोरी राइटर और एक्टर के तौर पर भी बराबर काम कर रहे हैं।
Azhar Hussain: संघर्ष की आग में तपकर अपने दम पर लिखी सफलता की नई कहानी

अज़हर हुसैन ने टी-सीरीज़, बी-फोर-यू म्यूज़िक, शेमारू म्यूज़िक, ज़ी म्यूज़िक और अल्ट्रा म्यूज़िक जैसे बड़े म्यूज़िक प्लेटफॉर्म्स के लिए कई वीडियो डायरेक्ट और प्रोड्यूस किए हैं। इनके काम को दर्शकों ने खूब पसंद किया है। इसके अलावा उन्होंने एमएक्स प्लेयर, वीआई, एयरटेल, हंगामा और यूट्यूब जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए भी कई शॉर्ट फ़िल्में बनाई हैं।
अदाकारी के मैदान में भी अज़हर हुसैन ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। मशहूर धारावाहिक “तारक मेहता का उल्टा चश्मा” में उन्होंने काम किया है। वहीं आने वाली वेब सीरीज़ “बॉम्बे बॉन्ड्स” में वे एक्टर अज़ाज़ खान की रहनुमाई में एक पुलिस अफसर का किरदार निभाते नज़र आएंगे। हिंदी फ़िल्म “सुल्तान मिर्ज़ा” में भी वे एक एक्टर के तौर पर सामने आ चुके हैं और कई शॉर्ट फ़िल्मों में भी काम कर रहे हैं।
खबर है कि अज़हर हुसैन जल्द ही अपनी नई हिंदी फ़िल्म की शूटिंग शुरू करने वाले हैं, जिसका इंतज़ार फ़िल्मी हलकों में किया जा रहा है।
फ़िल्मी दुनिया में उनकी पहचान सिर्फ उनके काम से ही नहीं, बल्कि उनके अच्छे अख़लाक और रिश्तों से भी है। इंडस्ट्री के कई बड़े नाम—जैसे राहुल रॉय, शक्ति कपूर, गोविंदा, मिमोह चक्रवर्ती, सुनील पाल, अज़ाज़ खान, रज़ा मुराद, शाहबाज़ खान, मुश्ताक खान और कई दूसरे लोग—उन्हें करीब से जानते हैं।
अज़हर हुसैन कई बार अख़बारों और मीडिया में जगह पा चुके हैं, कई इंटरव्यू दे चुके हैं और अपने डायरेक्शन के लिए कई अवार्ड्स से नवाज़े जा चुके हैं। इंटरनेट पर भी उन्होंने अपने काम के ज़रिए एक मजबूत पहचान बना ली है।
“जहां सादगी होती है”

उनका अपना प्रोडक्शन हाउस “रेडएसिड फ़िल्म्स” है, जिसके ज़रिए वे नए टैलेंट को मौका देते हैं और उन्हें अपने मकसद पर टिके रहने की सलाह देते हैं। वे नौजवानों को समझाते हैं कि गलत रास्तों से दूर रहकर मेहनत और लगन से ही असली कामयाबी मिलती है। अज़हर हुसैन को यह यक़ीन है कि अच्छा बर्ताव और सच्ची मेहनत इंसान को हर दिल अज़ीज़ बना देती है।
कम लोग जानते हैं कि वे खेल के मैदान में भी पीछे नहीं रहे। वे दिल्ली स्टेट के दो बार ताइक्वांडो के गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं और एक बार नेशनल चैंपियनशिप भी जीत चुके हैं। उनकी पढ़ाई भी दिल्ली से ही मुकम्मल हुई है। एक ऐसे ख़ानदान से ताल्लुक रखते हैं जिसकी पांच पुश्तों ने मुल्क की आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान की। उनके बुजुर्ग शहीद दादा साहब अमीरुद्दीन ने 30 दिसंबर 1919 को बिहार के जहानाबाद में रॉलेट एक्ट के खिलाफ लड़ते हुए शहादत हासिल की थी। फ़िल्मी हलकों में उनके बारे में अक्सर कहा जाता है—“जहां सादगी होती है, वहीं अज़हर हुसैन का नाम होता है।”
अपने हौसले, मेहनत, सादगी और हुनर के दम पर अज़हर हुसैन आज फ़िल्मी दुनिया में एक मजबूत मुकाम की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी ज़िंदगी यह पैग़ाम देती है कि अगर इंसान सच्चाई और लगन के साथ आगे बढ़े, तो कामयाबी उसके क़दम ज़रूर चूमती है।


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