स्टार प्लस के फेमस सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ के हालिया एपिसोड में दर्शकों को एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जिसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। जेल की सलाखों के पीछे बेकसूर सजा काट रही तुलसी अब कमजोर नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। जेल के अंदर की गुंडागर्दी और अत्याचार के खिलाफ तुलसी ने जो कदम उठाया है, उसने पूरी जेल को हिलाकर रख दिया है।
अरुंधति का टॉर्चर और तुलसी का ठाकुर जी से ‘मुक्ति’ का गुहार

एपिसोड की शुरुआत में दिखाया गया कि तुलसी जेल में बर्तन साफ कर रही होती हैं, तभी जेल की खूंखार कैदी अरुंधति अपनी गैंग के साथ वहां आ जाती है। अरुंधति और उसके साथी तुलसी को चिढ़ाने के लिए जानबूझकर साफ बर्तनों को फिर से गंदा कर देते हैं। अरुंधति सबको तुलसी के पुराने अपराधों की याद दिलाकर उसे भड़काने की कोशिश करती है और अपनी गैंग में शामिल होने को कहती है, लेकिन तुलसी किसी से कोई रिश्ता नहीं रखना चाहतीं।
इसके बाद तुलसी बिल्कुल अकेली बैठकर ठाकुर जी की मूर्ति के सामने रो पड़ती हैं। वह कहती हैं कि उन्होंने हमेशा भगवान के दिखाए रास्ते पर चलना चाहा, फिर भी उन्हें इतनी तकलीफें क्यों मिल रही हैं? उन्होंने अपने बलात्कारी बेटे को मार डाला, अपने पोते की साजिशें झेलीं और अब वह इस दर्द से ‘मुक्ति’ चाहती हैं।
जेल में साक्षात प्रकट हुए ठाकुर जी, तुलसी को दिया जीने का नया मकसद

तुलसी जब हार मानकर भगवान से अपनी जान और इस जिंदगी से छुटकारा मांग रही होती हैं, तभी जेल की कोठरी में एक चमत्कारिक रोशनी चमकती है। साक्षात ठाकुर जी तुलसी के सामने प्रकट होते हैं। तुलसी उनसे कहती हैं कि अब उनमें और सहने की हिम्मत नहीं है, लेकिन भगवान उन्हें समझाते हैं कि उनकी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
ठाकुर जी तुलसी को याद दिलाते हैं कि उनके खुद के माता-पिता (देवकी-वासुदेव) ने भी जेल में कितने कष्ट काटे थे। भगवान तुलसी से कहते हैं, “तुम्हें इस जेल में ही अपने जीने का असली मकसद मिलेगा। तुम यहां खुद के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के आंसुओं को पोंछने और उनके दर्द की दवा बनने के लिए आई हो।” भगवान का यह दिव्य संदेश मिलते ही तुलसी के भीतर एक नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार हो जाता है।
लड्डू के लिए छिड़ी जंग, तुलसी ने खोल दी खूंखार कैदी की पोल

भगवान से हिम्मत पाकर तुलसी जैसे ही आगे बढ़ती हैं, वह देखती हैं कि अरुंधति एक बेबस महिला कैदी पर अत्याचार कर रही है और उससे प्रोटेक्शन मनी (हफ्ता) मांग रही है। हद तो तब हो जाती है जब एक कैदी की मां उसके लिए प्यार से ‘लड्डू‘ भेजती है और अरुंधति उसे जबरदस्ती छीन लेती है। इस बार तुलसी चुप नहीं बैठतीं। वह सीधे जाकर अरुंधति के सामने सीना तानकर खड़ी हो जाती हैं और कहती हैं कि जब तक वह यहां हैं, किसी मासूम पर हाथ नहीं उठने देंगी।
तुलसी सिर्फ लड़ती नहीं हैं, बल्कि वह अरुंधति का वो राज सबके सामने खोल देती हैं जिसे सुनकर सब दंग रह जाते हैं। तुलसी बताती हैं कि अरुंधति का पति उसे और उसके 10 साल के बच्चे को रोज शराब पीकर बेरहमी से पीटता था। एक दिन उसने बच्चे को इतना मारा कि उसकी जान चली गई।
अरुंधति ने अपने बच्चों को बचाने के लिए यह सब किया था। तुलसी की यह बातें सुनकर और उसकी हिम्मत देखकर जेल के बाकी सारे कैदी भी अरुंधति के खिलाफ तुलसी के साथ खड़े हो जाते हैं। जो अरुंधति पूरी जेल पर राज करती थी, वह आज बिल्कुल अकेली पड़ गई है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या वीरानी परिवार एक बार फिर तुलसी की इस सच्चाई को स्वीकार करेगा?


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