मुंबई, 28 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के डिफेंस टेक इकोसिस्टम की फंडिंग 2025 में 247 मिलियन डॉलर पर पहुंच गई है। यह इस सेक्टर में वार्षिक फंडिंग का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह जानकारी बुधवार को जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।
डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ट्रैक्सन की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र के लिए अब तक की कुल इक्विटी फंडिंग 232 राउंड में 711 मिलियन डॉलर रही है और वार्षिक फंडिंग 2016 में 5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 247 मिलियन डॉलर के शिखर पर पहुंच गई है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस वर्ष फंडिंग में उछाल मुख्य रूप से 100 मिलियन डॉलर के मेगा फंडिंग राउंड के कारण आया। 2025 में फंडिंग राउंड की संख्या घटकर 30 रह जाने के बावजूद, 100 मिलियन डॉलर के मेगा फंडिंग राउंड के कारण कुल फंडिंग में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई।
रिपोर्ट में बताया गया कि प्रत्येक चरण में फंडिंग का बड़ा हिस्सा शुरुआती चरण में ही मिलता है। सीड-स्टेज कंपनियों ने 174 राउंड में लगभग 118 मिलियन डॉलर जुटाए, अर्ली-स्टेज फर्मों ने 56 राउंड में 527 मिलियन डॉलर प्राप्त किए और लेट-स्टेज फंडिंग पांच राउंड में कुल 66 मिलियन डॉलर रही।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा प्रौद्योगिकी मूल्य श्रृंखला में पूंजी वितरण बुनियादी ढांचे से संबंधित क्षेत्रों की ओर मजबूत झुकाव दर्शाता है। गैर-लड़ाकू प्रणालियों को 551 मिलियन डॉलर, लड़ाकू हथियार प्रणालियों को 106 मिलियन डॉलर, रक्षा सहायता और सक्षमीकरण प्रणालियों को 27 मिलियन डॉलर और प्रशिक्षण और सिमुलेशन समाधानों को 27 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए।
रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु 61 चरणों में 216 मिलियन डॉलर प्राप्त कर सबसे अधिक फंडिंग पाने वाला शहर बनकर उभरा, इसके बाद नोएडा 19 चरणों में 168 मिलियन डॉलर और चेन्नई 26 चरणों में 88 मिलियन डॉलर के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ने बताया कि भारत का डिफेंस टेक इकोसिस्टम खंडित नवाचार से निष्पादन-संचालित क्षमता अवसंरचना की ओर अग्रसर हुआ है। भारत में डिफेंस टेक एकल प्लेटफार्मों से आगे बढ़कर एकीकृत प्रणालियों द्वारा परिभाषित की जाती है, जिनमें एआई, ऑटोनॉमी, आईएसआर, सुरक्षित संचार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता शामिल है।
–आईएएनएस
एबीएस/
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