अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 1% से ज्यादा टूटकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि WTI क्रूड भी 0.83% गिरकर 70.16 डॉलर पर पहुंच गया। बता दें, ईरान युद्ध के बाद से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगी थीं जिसमें सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज पर पड़ने वाला असर था जहां से पूरी दुनिया का लगभग 20 फीसदी क्रूड आयल गुजरता है।
हालांकि दोहा में ईरान-अमेरिका शांति वार्ता आगे बढ़ने से Strait of Hormuz में सप्लाई का संकट टल गया है, जिससे वैश्विक बाजार शांत हुआ। इसके बावजूद ग्लोबल मार्केट में क्रूड सस्ता हुआ लेकिन देश के आम उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में पेट्रोल अब भी 100 रुपये प्रति लीटर के पार बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमतें 95 से 99 रुपये के बीच टिकी हुई हैं।
कंपनियों का सुधर रहा है मार्जिन

पिछले महीने मई में जब Iran War का तनाव चरम पर था, तब क्रूड 100-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। उस दौरान सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। आंकड़ों के मुताबिक, तब कंपनियों को पेट्रोल पर 12 रुपये और डीजल पर 21 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा था।
अब हालात बदले हैं। कच्चा तेल 72 डॉलर के पास आने से कंपनियों का फ्यूल मार्केटिंग मार्जिन मजबूत हुआ है और उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर 5 से 7 रुपये का मुनाफा हो रहा है। ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन का भी मानना है कि गिरती कीमतों से कंपनियों के मुनाफे में सुधार होगा, हालांकि कर्ज के दबाव और टैक्स अनिश्चितता के कारण लॉन्ग टर्म कमाई सीमित रह सकती है। हालांकि बावजूद इसके आम जनता को इसका कोई फायदा मिल नहीं रहा।
दाम कम न होने की वजह

आम जनता के मन में सवाल है कि जब क्रूड सस्ता हो रहा है, तो पंप पर पेट्रोल-डीजल के रेट क्यों नहीं घट रहे? इसका सीधा गणित यह है कि कंपनियां पहले हुए भारी नुकसान और कर्ज को कम करने में इस मुनाफे का इस्तेमाल कर रही हैं।
इसके अलावा इन्वेंट्री एक बड़ा कारण है। पेट्रोल पंपों पर आज जो तेल बिक रहा है, वह पुरानी और महंगी खरीद का हिस्सा है। जब तक सस्ते क्रूड का नया स्टॉक रिफाइन होकर बाजार में नहीं आएगा, रिटेल कीमतों में बदलाव होना मुश्किल है।
हालांकि इस बात की संभावना जताई जा रही है कि अगर शान्ति वार्ता बनी रहती है और कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 70 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बना रहता है, तो हो सकता है कि आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल पर 2-3 रुपये प्रति लीटर कम किए जा सकते हैं।
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