भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 में डिजिटल भुगतान में 30.19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी जिससे देश में बढ़ते नकदहीन लेनदेन का पता चलता है। नवगठित डिजिटल भुगतान सूचकांक (आरबीआई-डीपीआई) के अनुसार, मार्च 2021 के अंत में सूचकांक बढ़कर 270.59 हो गया, जो एक साल पहले 207.84 था।
रिजर्व बैंक ने कहा, आरबीआई-डीपीआई सूचकांक ने हाल के वर्षों में देश भर में डिजिटल भुगतान में हुई बढ़ोतरी का प्रतिनिधित्व करने वाले सूचकांक में महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रदर्शन किया है। रिजर्व बैंक ने इससे पहले देश भर में डिजिटल भुगतानों की सीमा का पता लगाने के लिए एक समग्र भारतीय रिजर्व बैंक – डिजिटल भुगतान सूचकांक (आरबीआई-डीपीआई) के निर्माण की घोषणा की थी।
इसके लिए मार्च 2018 को आधार बनाया गया था। आरबीआई-डीपीआई में पांच व्यापक मानदंड शामिल हैं जो अलग-अलग समय अवधि में देश में डिजिटल भुगतान की गहराई और पैठ को मापने में सक्षम बनाते हैं।
ये मानदंड हैं – आनलाइन भुगतान को सक्षम बनाने वाली व्यवस्था (भार 25 प्रतिशत); भुगतान अवसंरचना – मांग-पक्ष कारक (10 प्रतिशत); भुगतान अवसंरचना – आपूर्ति पक्ष कारक (15 प्रतिशत); भुगतान का कार्य-प्रदर्शन (45 प्रतिशत); और उपभोक्ता केन्द्रीयता (5 प्रतिशत)।


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