मुंबई : नीति निर्माताओं की ओर से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को फिर से तेज करने के प्रयासों के बावजूद देश की जीडीपी वृद्धि जून तिमाही में 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा की हालिया रपट में यह कहा गया है। नोमुरा की रपट के मुताबिक भारत में ‘लघु अवधि में मायूसी और मध्यम अवधि में आशा’ का अनुमान है। रपट में कहा गया है कि उपभोग एवं सेवाओं में सुस्ती के कारण नरमी रहेगी। इसके लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में जारी संकट को कारक बताया गया है। ये कंपनियां सितंबर, 2018 में नकदी के संकट में फंस गयीं।
इससे पहले लोगों को टिकाऊ उपभोग के सामानों की खरीदन के लिए कर्ज में उनका बड़ा योगदान था। इसके अलावा कमजोर वैश्विक वृद्धि और नकदी में कमी को भी नरमी के कारकों के रूप में गिनाया गया है। हालांकि, ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक उद्योग एवं निवेश संकेतक अपेक्षाकृत स्थिर हैं। रपट में कहा गया है कि हमारा मानना है कि जीडीपी को अभी और नीचे आना है। हमारा अनुमान है कि मार्च के 5.8 प्रतिशत से घटकर यह जून तिमाही में 5.7 प्रतिशत पर रह जाएगा।’
नोमुरा का अनुमान है कि सितंबर में देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो जाएगी। उसके बाद की तिमाही में जीडीपी वृद्धि की रफ्तार 6.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि मार्च तिमाही में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार घटकर 5.8 प्रतिशत एवं वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी की रफ्तार सुस्त होकर कई वर्ष के निम्न स्तर 6.8 प्रतिशत पर आ गयी। भारत की जीडीपी रफ्तार में यह गिरावट ऐसे समय में दर्ज की गयी है जब सरकार ने 2025 तक देश को पांच हजार अरब की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है और इस लक्ष्य को हासिल करने को कम-से-कम आठ प्रतिशत की सालाना वृद्धि आवश्यक है।


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