New Labour Code Effect on PF : भारत सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर 4 नए लेबर कोड (श्रम संहिताएं) बनाए, जो 21 नवंबर 2025 से आधिकारिक तौर पर लागू हो चुके हैं। नए लेबर कोड्स (New Labour Codes) को लेकर कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) के नियम बदल जाएंगे. इस मुद्दे पर सरकार ने संसद में साफ जवाब दे दिया है.
राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा है कि फिलहाल EPFO स्कीम में कोई खास बदलाव करने की योजना नहीं है. सरकार के अनुसार नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी मौजूदा EPF सिस्टम कुछ समय तक पहले की तरह ही जारी रहेगी.
Central Goverment on EPFO: संसद में सरकार ने क्या कहा?

केरल राज्य से राज्यसभा के सदस्य और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद पी संदोष कुमार ने सरकार से पूछा था कि क्या नए लेबर कोड के तहत EPFO स्कीम में बदलाव किए जाएंगे और क्या EPF जमा पर मिलने वाले ब्याज दर को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
इस सवाल के लिखित जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सरकार की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि फिलहाल EPFO स्कीम में किसी खास बदलाव की योजना नहीं है.
EPF Interest Rates: EPF पर मिलने वाला ब्याज कैसे तय होता है

इस पर श्रम मंत्रालय ने बताया कि EPF जमा पर ब्याज दर Employees’ Provident Funds Scheme, 1952 के नियमों के अनुसार तय की जाती है. EPF स्कीम के पैरा 60(1) के अनुसार EPFO अपने सदस्यों के खातों में ब्याज उसी दर से जमा करता है जिसे केंद्र सरकार सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी (CBT) से सलाह लेकर तय करती है.
इसका मतलब यह है कि ब्याज दर तय करते समय EPFO की निवेश से होने वाली कमाई और उसकी वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखा जाता है. जैसा अमूमत अन्य जगहों पर होता है।
New Labour Code Effect on PF: एक और सवाल
राज्यसभा में यह भी पूछा गया था कि क्या नए लेबर कोड के तहत EPFO स्कीम में बदलाव किए जाएंगे. इस पर श्रम मंत्रालय ने बताया कि सोशल सिक्योरिटी कोड (Code on Social Security, 2020) लागू होने के बाद भी मौजूदा EPFO स्कीम एक साल तक जारी रहेंगी.
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 की Section 164(2)(b) के अनुसार नए कानून लागू होने के बाद भी मौजूदा EPFO स्कीम एक साल तक प्रभावी रह सकती हैं, बशर्ते वे नए कानून के प्रावधानों के विपरीत न हों. इसका मतलब है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद भी EPF सिस्टम तुरंत नहीं बदलेगा और बदलाव धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे.
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