मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने फंसे कर्ज के निपटान की मौजूदा प्रणाली में व्यापक संशोधन किया है। इन नियमों को दिवाला एवं रिण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के अनुरूप बनाया गया है। इससे बैंकिंग प्रणाली में फंसे कर्ज की समस्या के त्वरित समाधान में मदद मिलेगी। अधिकारियों का ऐसा मानना है। रिजर्व बैंक ने संशोधित रुपरेखा में दबाव वाली परिसंपत्तियों की ‘जल्द पहचान’ करने, निपटान योजना के समयबद्ध अनुपालन और उस अवधि में बैंकों के विफल रहने पर उन पर जुर्माना लगाने के लिए विशेष नियम बनाए हैं।
रिजर्व बैंक की नवीनतम अधिसूचना के अनुसार संशोधित रुपरेखा के साथ ही उसने फंसे कर्ज से निपटने की मौजूदा व्यवस्था को वापस ले लिया है। इनमें कंपनियों की ऋण पुनर्गठन योजना, रणनीतिक ऋण पुनर्गठन योजना और दबाव वाली संपत्ति को टिकाऊ स्वरूप देने की योजनायें शामिल हैं जिन्हें वापस ले लिया गया है। दबाव वाली परिसंपत्तियों के निपटान के लिए बैंकों के संयुक्त मंच (जॉइंट लेंडर्स फोरम-जेएलएफ) की सांस्थानिक व्यवस्था को भी खत्म कर दिया गया है।
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