रायपुर: अबूझमाड़ के वन उत्पादों को मिलेगा नया बाजार, महुआ प्रसंस्करण से आदिवासियों की आय बढ़ाने की बड़ी पहल

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Chhattisgarh tribal livelihood boost: अबूझमाड़ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल करते हुए महुआ प्रसंस्करण आधारित सहकारी मॉडल विकसित करने की कार्ययोजना पर मंथन किया। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी लघु वनोपज संघ की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आदिवासी नेतृत्व में वन आधारित रोजगार और आय संवर्धन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। Chhattisgarh News: महुआ उत्पादों के मूल्यवर्धन और बाजार विस्तार पर जोर बैठक में समर्थन मूल्य पर तेंदूपत्ता संग्रहण को और प्रभावी बनाने, वन…

Chhattisgarh tribal livelihood boost: अबूझमाड़ क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी पहल करते हुए महुआ प्रसंस्करण आधारित सहकारी मॉडल विकसित करने की कार्ययोजना पर मंथन किया। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी लघु वनोपज संघ की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आदिवासी नेतृत्व में वन आधारित रोजगार और आय संवर्धन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

Chhattisgarh News: महुआ उत्पादों के मूल्यवर्धन और बाजार विस्तार पर जोर

बैठक में समर्थन मूल्य पर तेंदूपत्ता संग्रहण को और प्रभावी बनाने, वन धन योजना के विस्तार तथा ट्राइफेड के सहयोग से महुआ प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने बताया कि वन धन सहकारी समितियों के माध्यम से महुआ के फूलों से कई मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें महुआ लड्डू, कुकीज, स्क्वैश (शरबत) और महुआ का अचार प्रमुख हैं। इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने तथा स्थानीय स्तर पर प्रोडक्शन यूनिट स्थापित करने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि महुआ प्रसंस्करण को केवल पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखकर इसे स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मजबूत माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे अबूझमाड़ सहित वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों को स्थायी रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे।

तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित संरक्षण और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था पर जोर

तेंदूपत्ता संग्रहण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान संग्राहकों के हितों के संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ द्वारा संग्राहकों को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी व्यवस्था के तहत भुगतान किया जा रहा है। आधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में जमा की जा रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल रहा है।

ये दिग्गज रहे मौजूद

बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, गृह विभाग की सचिव नेहा चंपावत, पीसीसीएफ श्रीनिवास राव सहित वन विभाग एवं लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक अनिल कुमार साहू और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: आशीष शर्मा, पंजाब केसरी

Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।