तार-तार हुई हाउस की गरिमा

Summary :

साउथ एमसीडी हाउस की मीटिंग में सदन की गरिमा तार-तार हो गई। विपक्षी आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने हाउस में नियमों का उल्लंघन किया।

नई दिल्ली : साउथ एमसीडी हाउस की मीटिंग में सदन की गरिमा तार-तार हो गई। विपक्षी आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने हाउस में नियमों का उल्लंघन किया और मेयर के पास वेल में अधिकारियों की टेबल पर खड़े होकर एमसीडी संविधान की धज्जियां उड़ा दीं। रही सही कसर पूर्व नेता विपक्ष ने टेबल पर जूता पहनकर खड़े होकर कर दी। पूरी घटना पर मेयर ने आप पार्टी के 9 चयनित, 6 मनोनीत और एक मेंबर एमएलए को अगली मीटिंग तक के लिए सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, हाउस की बैठक शुरू होते ही स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में पार्किंग फीस के एक मामले का जिक्र करते हुए जवाब मांगा।

जिस पर कहा गया कि निगम की फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है जिसके तहत मॉल्स और अस्पतालों में पार्किंग फीस वसूला जाए। जवाब से असंतुष्ट आप पार्टी के पार्षद हाउस में हंगामा करते हुए मेयर के समक्ष वेल में जा पहुंचे। हालांकि मेयर ने हाउस की चर्चा को जारी रखा। इसी बीच कांग्रेस की पार्षद दर्शना को अपना पक्ष रखने के लिए कहा।

इस पर आप पार्टी के दिनेश कुमार ने महिला पार्षद से माइक छीन लिया। मेयर ने एमसीडी एक्ट का हवाला देते हुए आप पार्षदों को चेतावनी दी। दो बार चेतावनी देने के बाद भी नहीं मानने पर मेयर ने सस्पेंड कर दिया। इस संबंध में दिल्ली के एलजी अनिल बैजल से भी शिकायत की जाएगी। साउथ एमसीडी के आला नेता मुलाकात कर एलजी के समक्ष विस्तृत जानकारी देंगे।

कमिश्नर को दिखाएंगे काले झंडे… कांग्रेस पार्षद प्रिया चंदेला ने हाउस में कहा कि उनके वार्ड में अधिकारी कब दौरा करके चले जाते, इसका पता नहीं चलता। इस संबंध में स्थानीय पार्षद होते हुए भी उन्हें सूचना नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा ही जारी रहा तो अगली बार वह अधिकारियों के दौरे के समय काले झंडे दिखाकर अपना विरोध जताएंगी। वहीं, श्वेता सैनी ने तिलक नगर में बन रहे अस्पताल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि अस्पताल निर्माण के लिए इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को अब तक फंड नहीं दिया गया है। उन्हें जल्द से जल्द फंड दें।

समय की पाबंद नहीं है एमसीडी… नई दिल्ली, (राजेश रंजन सिंह): क्या नेता क्या अधिकारी, सभी एमसीडी का बंटाधार करने में लगे हुए हैं। जिस निगम में क्षेत्र की जनता के लिए विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने से लेकर कई तरह के महत्वपूर्ण बिल पास किए जाते हैं, उसी निगम के नेता और अधिकारियों को समय से सदन की बैठक चलाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। हालात यह हंै कि निगम की बैठकों का इंतजार करना ही पड़ता है।

हैरान कर देने वाली बात यह है कि सदन बैठक की यह देरी की समस्या किसी एक एमसीडी में नहीं बल्कि साउथ, नॉर्थ व ईस्ट तीनों ही एमसीडी की है। हाउस में कभी मेयर, स्टैंडिंग कमेटी में चेयरमैन/चेयरपर्सन समय से नहीं पहुंचे। यही हाल आला अधिकारियों का भी है। निगम के जानकारों का कहना है कि निगम पार्षद बनने के बाद इन्हें पार्टिंयों की ओर ट्रेनिंग तो दी जाती है लेकिन वो शायद नाकाफी होती है। मंगलवार को भी साउथ एमसीडी हाउस तय समय के मुकाबले देरी से शुरू हुआ। नॉर्थ एमसीडी भी इन मामलों में पीछे नहीं है। हाल ही में हुई स्टैंडिंग कमेटी में यह मुद्दा भी गरमाया था कि आखिर देरी क्यों होती है। इस पर कांग्रेस पार्षद मुकेश गोयल ने स्टैंडिंग कमेटी और हाउस की बैठक में हमेशा हो रही देरी पर सवाल खड़ा किया था।

उन्होंने कहा था कि बिना म्यूनिसिपल सेक्रेटरी को जानकारी दिए चेयरमैन अपनी मर्जी से बैठक के समय में परिवर्तन कर देते हैं। इससे सदन की गरिमा का उल्लंघन हो रहा है। ईस्ट एमसीडी तो इस मामले में अव्वल है। यहां पर तो हाउस और स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग को महज पांच मिनटों में ही निपटा दिया जाता है। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि बड़ी राशि खर्च कर आखिर क्यों हाउस और स्टैंडिंग कमेटी की बैठक बुलाई जाती है।

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