एम्स में इलाज की जद्दोजहद, सात महीने के बच्चे की सर्जरी का इंतजार, पिता की गुहार

Summary :

AIIMS Delhi Medical Delay: देश के प्रमुख सरकारी अस्पताल एम्स दिल्ली में इलाज पाना आम लोगों के लिए कितना कठिन है, इसका उदाहरण अस्पताल परिसर के बाहर फुटपाथों और बस शेल्टरों पर ठहरे मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ से साफ देखा जा सकता है। यहां दूर-दराज़ से आए लोग किसी न किसी मेडिकल प्रक्रिया के लिए लंबी प्रतीक्षा में दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। इन्हीं लोगों के बीच उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से आए निशित जायसवाल भी शामिल हैं, जो अपने सात महीने के बेटे के दिल में छेद (जन्मजात हृदय रोग) के इलाज के लिए पिछले डेढ़ महीने…

AIIMS Delhi Medical Delay: देश के प्रमुख सरकारी अस्पताल एम्स दिल्ली में इलाज पाना आम लोगों के लिए कितना कठिन है, इसका उदाहरण अस्पताल परिसर के बाहर फुटपाथों और बस शेल्टरों पर ठहरे मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ से साफ देखा जा सकता है। यहां दूर-दराज़ से आए लोग किसी न किसी मेडिकल प्रक्रिया के लिए लंबी प्रतीक्षा में दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं। इन्हीं लोगों के बीच उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से आए निशित जायसवाल भी शामिल हैं, जो अपने सात महीने के बेटे के दिल में छेद (जन्मजात हृदय रोग) के इलाज के लिए पिछले डेढ़ महीने से संघर्ष कर रहे हैं। निशित के मुताबिक, डॉक्टर उन्हें रोज सुबह बुलाते थे और शाम को यह कहकर वापस भेज देते थे कि अगले दिन आएं। इस बीच बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और समय पर सर्जरी न होने से परिवार की चिंता बढ़ती गई।

हताश होकर निशित ने 16 अप्रैल को सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने लिखा कि उनका बच्चा गंभीर रूप से बीमार है, उसे तेज बुखार है, दूध पीने के बाद उल्टी हो रही है और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है। उन्होंने लोगों से मदद की गुहार लगाई और कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे निजी अस्पताल में इलाज करा सकें।

सोशल मीडिया पर दर्द किया बयां

सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद एम्स प्रशासन हरकत में आया और उसी दिन दोपहर तक बच्चे को अस्पताल के कार्डियो-न्यूरो सेंटर में भर्ती कर लिया गया। वर्तमान में बच्चे का इलाज पीडियाट्रिक कार्डियोसर्जन डॉ. ए.के. बिसोई की देखरेख में चल रहा है। हालांकि, भर्ती के दो दिन बाद भी सर्जरी की तारीख तय नहीं हो सकी है। डॉक्टरों का कहना है कि केस का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद ही ऑपरेशन की तिथि निर्धारित की जाएगी।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एम्स में इलाज चुनौतीपूर्ण

इस बीच परिवार की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। बच्चे की मां अस्पताल के भीतर उसके साथ रह रही हैं, जबकि पिता निशित अस्पताल परिसर के बाहर सड़क पर पॉलिथीन बिछाकर रात गुजारने को मजबूर हैं। यह मामला न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए समय पर इलाज और बेहतर प्रबंधन कितना जरूरी है। एम्स जैसे बड़े संस्थान में अत्याधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद मरीजों की भारी संख्या के कारण कई परिवारों को ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट: मनोज कुमार मनु

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।