AIIMS में नियमों की अनदेखी: RPI OPD तक पहुंच रहे MR, मरीजों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार

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AIIMS Delhi Rule Violation MR Entry OPD Patient Delay: केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखने पर सख्त प्रतिबंध होने के बावजूद देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार एम्स दिल्ली के आरपीआई सेंटर में नियमों की अनदेखी सामने आई है। यहां ओपीडी के दौरान मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) की मौजूदगी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की शह पर एमआर सीधे ओपीडी कक्षों तक पहुंच रहे हैं, जिससे न केवल अस्पताल के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि मरीजों को भी लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।…

AIIMS Delhi Rule Violation MR Entry OPD Patient Delay: केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखने पर सख्त प्रतिबंध होने के बावजूद देश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शुमार एम्स दिल्ली के आरपीआई सेंटर में नियमों की अनदेखी सामने आई है। यहां ओपीडी के दौरान मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) की मौजूदगी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों की शह पर एमआर सीधे ओपीडी कक्षों तक पहुंच रहे हैं, जिससे न केवल अस्पताल के नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि मरीजों को भी लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।

OPD में MR की एंट्री, मरीजों को किया किनारे

खास बात यह है कि एमआर की पहुंच सेंटर की प्रमुख डॉ. राधिका टंडन के ओपीडी तक देखी जा रही है, जो स्थिति को और गंभीर बनाती है। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे की घटना इसका उदाहरण है, जब डॉक्टर मरीजों को देख रही थीं और उसी दौरान एक दवा कंपनी के दो एमआर सेंटर की हेड और डॉ. साहिल के ओपीडी में पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने मरीजों को किनारे कर अपनी कंपनी की दवाओं का प्रचार-प्रसार किया। टैबलेट के जरिए दवाओं की विशेषताएं विस्तार से बताई गईं, जबकि बाहर बैठे मरीज अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

MR दबाव में डॉक्टर? मरीजों पर बढ़ा दवाओं का खर्च

सूत्रों के अनुसार, एमआर का मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों को प्रभावित कर अपनी कंपनी की दवाएं लिखवाना होता है, ताकि मरीजों को अस्पताल की मुफ्त दवाओं के बजाय बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ें। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की मंशा पर भी सवाल उठते हैं।

अस्पताल परिसरों में एमआर की एंट्री पर है स्पष्ट प्रतिबंध

गौरतलब है कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज द्वारा 12 मई 2023 और 28 मई 2025 को जारी आदेशों में अस्पताल परिसरों में एमआर की एंट्री पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। इन आदेशों का उद्देश्य दवा कंपनियों के प्रभाव को कम करना और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करना है। हालांकि, इस प्रतिबंध को लेकर कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डॉक्टरों तक नई दवाओं और तकनीकों की जानकारी पहुंचने में बाधा आ सकती है। इस पर सरकार का कहना है कि चिकित्सकों को अपडेट जानकारी ईमेल, डिजिटल प्लेटफॉर्म, कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) और मेडिकल कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती रहेगी।

सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी पर फिर सवाल

इधर, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में एमआर की बढ़ती दखलअंदाजी नीति और जमीनी हकीकत के बीच संतुलन बनाने की जरूरत को और अधिक उजागर करती है।

OPD में MR एंट्री पर होगी कार्रवाई: डॉ. राधिका टंडन (आरपीआई सेंटर की हेड)

अस्पताल में मेडिकल रिप्रजेंटेटीव (एमआर) की एंट्री पर प्रतिबंध है। फिर भी कुछ एमआर ओपीडी के समय में आ जाते हैं। इससे मरीजों को परेशानी होती है। इस दिशा में हम उचित कार्रवाई करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई एमआर ओपीडी में प्रवेश ना कर पाए।

रिपोर्ट: मनोज कुमार मनु

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Shivangi Shandilya

शिवांगी शांडिल्य पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। राजनीति, विदेश, क्राइम के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद हैं। गलगोटिया विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की है। IGNOU से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई जारी है। इस दौर में वेबसाइट पर लिखने का कार्य जारी है। पत्रकारिता की शुरुआत इंडिया न्यूज़ (इनखबर) से हुई, जहां बत्तौर हिन्दी सब-एडिटर के रूप में वेबसाइट पर काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्म लेने वाली शिवांगी की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है। शिवांगी को राजनीतिक घटनाक्रम पर आलेख लिखना बेहद पसंद है।