इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहुंचे का‌स्टिंग डायरेक्टर मुकेश छावड़ा, बताया एक्टिंग के मूल भाव व एआई के बीच का अंतर

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Delhi Film Festival : जाने माने कास्टिंग डायरेक्टर व एक्टर मुकेश छावड़ा इन दिनों फिल्म धुरंधर को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। फिल्म को देखने के बाद हर कोई उनकी सलेक्शन स्किल का मुरीद बन गया है। हर ओर उनकी चर्चा हो रही है। ऐसा ही नजारा गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में देखने को मिला जब मुकेश छावड़ा के आसपास लोगों का जमावड़ा लगा रहा। सिखाए कास्टिंग के गुर इस दौरान प्रशिक्षु एक्टरों व फिल्मों से जुड़ने की इच्छा रखने वालों ने उनसे बात की। मुकेश छावड़ा ने उन्हें अपनी स्किल…

Delhi Film Festival : जाने माने कास्टिंग डायरेक्टर व एक्टर मुकेश छावड़ा इन दिनों फिल्म धुरंधर को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। फिल्म को देखने के बाद हर कोई उनकी सलेक्शन स्किल का मुरीद बन गया है। हर ओर उनकी चर्चा हो रही है। ऐसा ही नजारा गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में देखने को मिला जब मुकेश छावड़ा के आसपास लोगों का जमावड़ा लगा रहा।

सिखाए कास्टिंग के गुर

इस दौरान प्रशिक्षु एक्टरों व फिल्मों से जुड़ने की इच्छा रखने वालों ने उनसे बात की। मुकेश छावड़ा ने उन्हें अपनी स्किल कास्टिंग के गुर सिखाए और मूल एक्टिंग व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बीच का अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि आज के युग में रिसर्च,मेडीकल,इंजिनियरिंग स‌हित हर क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल हो रहा है लेकिन एआई कभी भी मूल ‌ए‌क्टिंग के भाव की बराबरी नहीं कर पाएगी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एआई से अच्छी बि‌ल्डिंग, गाड़ियों व तोड़फोड को तो ‌बेहतरीन तरीके से दिखाया जा सकता है लेकिन एक अभिनेता ए‌क्टिंग करते समय जिन मूल भावों को दर्शाता है, वो असल भाव एआई द्वारा क्रिएट किये सीन में नहीं आएगा। यही एक्टर का असली गुर और मूल पूंजी होती है। ए‌‌क्टिंग के यही मूल भाव फिल्म की भी जान होते हैं।

युवाओं ने अपनी बात बताई

इस दौरान कुछ युवाओं ने स्वयं की पूंजी लगाकर फिल्म बनाने की बात भी उनके सामने रखी। इस पर मुकेश छावड़ा ने कहा कि किसी भी काम को शुरु करने से पहले उसका कुछ अनुभव सीखना चाहिए। इसके लिए आपको थिएटर आदि में जाकर शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी काम मुश्किल नहीं होता और कोई भी काम आसान नहीं ‌होता। मुश्किल इस सेंस में नहीं होता कि लगन से सीखोगे तो सब आ जाएगा। आसान इस सेंस में न‌हीं होता कि बिना ए‌क्टिंग सीखे आप पहली बार अपने पैसों से फिल्म बनाकर सुपर स्टार नहीं बन सकते। इस दौरान मुकेश छावड़ा ने फिल्म निर्माण से लेकर कई अन्य विधाओं की जानकारी प्र‌शिक्षु कलाकारों के साथ साझा की।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।