AIIMS : एम्स नई दिल्ली में ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गनाइजेशन (ओआरबीओ) की ओर से डोनर फेलिसिटेशन प्रोग्राम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंगदान करने वाले डोनर्स को श्रद्धांजलि दी गई और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर अंगदान को मानवता की सेवा का सर्वोच्च उदाहरण बताते हुए डोनर परिवारों के त्याग को याद किया गया। एम्स के निदेशक प्रो. निखिल टंडन ने कहा कि अंगदान की प्रक्रिया पिछले कई वर्षों में व्यक्तिगत प्रयासों से संस्थागत प्रयासों और अब एक व्यवस्थित हेल्थ सिस्टम का हिस्सा बनने तक विकसित हुई है।
उन्होंने कहा कि पहले मुख्य रूप से जीवित डोनर्स के माध्यम से किडनी ट्रांसप्लांट किए जाते थे, लेकिन अब ब्रेन-डेड डोनर्स के अंग भी जरूरतमंद मरीजों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मृत्यु के बाद भी कई अंग और ऊतक दूसरों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकते हैं। उदाहरण के तौर पर कॉर्निया का दान मृत्यु के बाद किया जा सकता है, क्योंकि इसके लिए शरीर में रक्त संचार की आवश्यकता नहीं होती। उन्होंने कहा कि अंगदान के क्षेत्र में जागरूकता बढ़ने के साथ अधिक लोगों को प्रत्यारोपण के जरिए नया जीवन देने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
भावनात्मक रूप से टूटे व्यक्ति के लिए अपने किसी प्रिय के लिए अंगदान का निर्णय कठीन
प्रो. टंडन ने डोनर परिवारों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि निजी दुख के सबसे कठिन क्षणों में भी इन परिवारों ने समाज की मदद करने और दूसरों की जान बचाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि जिस मानसिक और भावनात्मक दौर से ये परिवार गुजरते हैं, उसकी कल्पना करना भी आसान नहीं है। ऐसे में उनका निर्णय बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सम्मान करना नहीं, बल्कि डोनर परिवारों को दिल से धन्यवाद देना भी है। उनके त्याग ने कई मरीजों और उनके परिवारों को जीवन की नई उम्मीद दी है।



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