Delhi-NCR में पटाखों पर प्रतिबंध जारी, Supreme Court का फैसला

Summary :

ग्रीन पटाखों पर भी प्रतिबंध, सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्पष्ट आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध को सही ठहराते हुए कहा कि जब तक यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं हो जाता कि ग्रीन पटाखों से जीरो प्रदूषण होता है, तब तक प्रतिबंध के पुराने आदेश में बदलाव करने का कोई औचित्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण में जीना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। वायु प्रदूषण के बढ़ते खतरों को देखते हुए पटाखों पर प्रतिबंध लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हर व्यक्ति एयर प्यूरीफायर नहीं खरीद सकता और सड़कों-गलियों में काम करने वाले लोगों पर प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।

Delhi-NCR में वायु गुणवत्ता फिर बिगड़ी, GRAP-1 के प्रतिबंध लागू

पटाखा निर्माताओं द्वारा ग्रीन पटाखों को लेकर छूट की मांग पर कोर्ट ने कहा कि इन कंपनियों की भी यह जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रदूषण-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करें और ग्रीन पटाखों की गुणवत्ता में और सुधार करें। कोर्ट ने दिल्ली और हरियाणा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ऑनलाइन बिक्री पर प्रतिबंध को लागू किया है। वहीं, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी निर्देश दिया गया कि वे ऑनलाइन पटाखा बिक्री पर रोक लगाएं और दो हफ्ते के भीतर इस आदेश के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट दें।

सुनवाई के दौरान मुकेश जैन नामक व्यक्ति ने पटाखों पर प्रतिबंध को अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया और पर्यावरणविद् एमसी मेहता पर गंभीर आरोप लगाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि एमसी मेहता लंबे समय से पर्यावरण संबंधी मामलों को लेकर कोर्ट में याचिकाएं दायर कर रहे हैं। कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह के निराधार आरोप स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हालांकि, मुकेश जैन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहेगा और राज्य सरकारों को ऑनलाइन बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, पटाखा निर्माताओं से जिम्मेदारी निभाने और प्रदूषण-मुक्त पटाखे विकसित करने का आह्वान किया।

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