सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के बाद मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को सोमवार को नोटिस जारी किया। महाराष्ट्र सरकार ने गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमाड को रद्द करने और नजरबंदी से रिहाई के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। कोर्ट ने गौतम नवलखा को इसी महीने नजरबंदी से मुक्त कर दिया था।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें अदालत ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने के लिए पुणे पुलिस और समय देने से इन्कार कर दिया था। खंडपीठ में दो अन्य न्यायाधीश में न्यायाधीश संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ शामिल हैं।
इससे पहले अक्टूबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए पांच कार्यकर्ताओं में शामिल गौतम नवलखा को नजरबंदी से मुक्त करने की सोमवार को इजाजत दे दी। हाई कोर्ट ने नवलखा को राहत देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें आगे के उपायों के लिए चार हफ्तों के अंदर उपयुक्त अदालत का रूख करने की छूट दी थी, जिसका उन्होंने उपयोग किया है।


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