BPCL Environmental Penalty 1 Crore: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को बड़ा झटका देते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। यह अपील केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा लगाए गए 1 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय मुआवजे के खिलाफ दायर की गई थी। एनजीटी की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष), डॉ. ए. सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद शामिल थे, ने पाया कि बीपीसीएल ने निर्धारित समयसीमा मार्च 2024 तक वैपर रिकवरी सिस्टम (वीआरएस) स्थापित नहीं किया। साथ ही, कंपनी ने समय रहते अवधि बढ़ाने के लिए कोई आवेदन भी नहीं किया। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि 11 नवंबर 2024 का मूल आदेश अंतिम हो चुका है, जबकि 23 जुलाई 2025 का आदेश केवल अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारित किया गया था। पीठ ने यह भी माना कि सीपीसीबी ने कार्रवाई करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरा पालन किया।
बीपीसीएल की दलीलों को स्वीकार नहीं किया
एनजीटी ने अपने फैसले में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के चलते सीपीसीबी के पास समय सीमा बढ़ाने का अधिकार नहीं था। इस कारण बीपीसीएल की दलीलों को स्वीकार नहीं किया गया। हालांकि, कंपनी के अनुरोध पर अधिकरण ने राहत देते हुए 1 करोड़ रुपये की राशि जमा करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय प्रदान किया है। इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि पर्यावरणीय नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए वीआरएस की स्थापना अनिवार्य है।
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