JNU में हुई ABVP और लेफ्ट छात्रों के बीच झड़प, कई दर्जन छात्र हुए घायल, आइशी घोष ने ट्वीट कर कही ये बात

Summary :

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर सुर्खियों में है, इस बार विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच आंतरिक झड़प के कारण विवाद हो गया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर सुर्खियों में है, इस बार विश्वविद्यालय में छात्रों के बीच आंतरिक झड़प के कारण विवाद हो गया। दरअसल, जेएनयू में बीती देर रात विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के छात्रों के बीच झड़प हो गई, जिसमें कई दर्जन छात्र घायल हो गए। 
विश्वविद्यालय से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, आइसा और एसएफआई जैसे कई वामपंथी गठबंधनों के छात्रों की अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों के साथ झड़प हुई थी। आरोप लगाया गया कि उनके कई सदस्यों पर वामपंथी छात्रों ने हमला किया और उन्हें पीटा।
ABVP के मुताबिक वामपंथी छात्रों ने की थी विवाद की शुरुआत 
एबीवीपी के अनुसार, उसके कुछ सदस्य जेएनयू में छात्र गतिविधि कक्ष के अंदर एक बैठक कर रहे थे, और कई वामपंथी छात्र उनकी बैठक को बाधित करने के लिए वहां पहुंचे। जैसे ही छात्रों ने उनकी बैठक का विरोध किया, दोनों के बीच विवाद हो गया, और कई घायल हो गए। एबीवीपी ने एक बयान में कहा कि वामपंथी छात्रों द्वारा उनके सदस्यों पर हमले के बाद उनके दर्जनों सदस्य बुरी तरह घायल हो गए, जिसमें महिला सदस्य भी शामिल हैं। 
वामपंथी छात्रों ने महिलाओं और शारीरिक रूप से अक्षम सदस्यों पर भी किया हमला : ABVP
छात्र संगठन ने कहा कि जिन सदस्यों को गंभीर चोटें आई हैं, उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। एबीवीपी ने आगे कहा कि 14 नवंबर को देर रात हुई हिंसा में वामपंथी छात्रों ने समूह की महिलाओं और शारीरिक रूप से अक्षम सदस्यों पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि एबीवीपी की एक महिला सदस्य श्रीदेवी को गर्दन में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक शारीरिक रूप से अक्षम सदस्य अंकित को भी वामपंथी छात्रों ने पीटा था।
आइशी घोष ने ट्वीट कर कही ये बात 
इस बीच, आइशी घोष जो जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष हैं और विश्वविद्यालय की एसएफआई इकाई की सदस्य हैं, उन्होंने ट्वीट किया कि यह एबीवीपी के “गुंडे” थे जिन्होंने वामपंथी छात्रों पर हमले की शुरुआत की थी, उन्हें गंभीर रूप से घायल किया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, ‘आज जेएनयू में एबीवीपी के गुंडों ने हिंसा की। बार-बार इन अपराधियों ने छात्रों पर हिंसा की है और कैंपस लोकतंत्र को बाधित किया है। क्या अब भी चुप रहेगा जेएनयू प्रशासन? क्या गुंडों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी?”

Desk Team