कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल, होटल और ढाबा संचालकों के सामने संकट, अब स्ट्रीट फूड का स्वाद होगा महंगा

Summary :

Commercial LPG Price Hike 2026: कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने राजधानी में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईरान युद्ध के हालातों से पैदा हुए गैस संकट का असर अब सीधे उनके व्यवसाय पर देखने को मिलेगा। क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियों की ओर से एक मई से कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में सिलेंडर का दाम बढ़कर करीब 3071.50 रुपये हो गया है। कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पहले ही महंगाई, बिजली बिल, कर्मचारियों की सैलरी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों…

Commercial LPG Price Hike 2026: कमर्शियल गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने राजधानी में होटल और रेस्टोरेंट संचालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईरान युद्ध के हालातों से पैदा हुए गैस संकट का असर अब सीधे उनके व्यवसाय पर देखने को मिलेगा। क्योंकि सरकारी तेल विपणन कंपनियों की ओर से एक मई से कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। ऐसे में सिलेंडर का दाम बढ़कर करीब 3071.50 रुपये हो गया है। कई होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि पहले ही महंगाई, बिजली बिल, कर्मचारियों की सैलरी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे थे, अब गैस सिलेंडर की कीमतों में इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

कई छोटे ढाबा और रेस्टोरेंट मालिकों ने कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो उन्हें कारोबार बंद करने तक की नौबत आ सकती है। इसके अलावा, बढ़ी हुई लागत का असर ग्राहकों पर भी पड़ना तय है। खाने-पीने की चीजों के दामों में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम आदमी की जेब पर भी बोझ बढ़ेगा। कुछ रेस्टोरेंट संचालक मेन्यू में कटौती या मात्रा कम करने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इतना ही नहीं, बिना गैस कनेक्शन वाले लोगों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किए गए पांच किलो वाले छोटू सिलेंडर के दामों में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों की रसोई पर पड़ेगा, जिससे उनका मासिक खर्च और बढ़ जाएगा।

होम डिलीवरी संचालन पर भी पड़ेगा असर

सिलेंडर की बढ़ती कीमतों का असर अब होम डिलीवरी सेवाओं पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। रसोई गैस महंगी होने से रेस्तरां और क्लाउड किचन का संचालन खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा असर खाने की कीमतों और डिलीवरी चार्ज पर पड़ेगा। ऐसे में ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना आम लोगों के लिए पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है। बढ़ती लागत के कारण ग्राहकों की मांग में कमी आने की आशंका है, जिससे कंपनियों के ऑर्डर व कारोबार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

10 से 15 फीसदी बढ़ सकते हैं खाने-पीने के दाम

उद्योग संगठनों के अनुसार, हालिया बढ़ोतरी के चलते खाने-पीने की वस्तुओं के दाम 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं, हालांकि इससे भी पूरी लागत की भरपाई संभव नहीं है। लगातार तीन बार में हुई कुल 1,332.50 रुपये की वृद्धि ने संचालन खर्च को अस्थिर बना दिया है। कई प्रतिष्ठान पहले ही सीमित समय, सीमित मेन्यू और वैकल्पिक ईंधन व्यवस्था के साथ काम कर रहे हैं। जिनमें से कई प्रतिष्ठान पहले ही अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं और कीमतों में यह नई बढ़ोतरी प्रतिष्ठानों की बंदी और रोजगार में कटौती को और तेज कर सकती है।

रिपोर्ट: प्रशांत चौहान

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।