Ajeet Bharti Case : दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से यूट्यूबर अजीत भारती को बड़ा झटका मिला है। कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि भारती ने अपने वीडियो में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, वह स्पष्ट रूप से जाति व्यवस्था और जातिगत श्रेष्ठता की सोच को दर्शाती है।
अदालत ने माना कि वीडियो के कंटेंट में शादी-विवाह और सामाजिक मामलों में ऊंची जातियों को नीची जातियों से बेहतर बताने की कोशिश की गई है। एडीशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने कहा कि प्राइमा फेसी यह मामला एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट के तहत अपराध बनता है।
अदालत की सख्त टिप्पणी और रुख
मामले की सुनवाई करते हुए जज सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने स्पष्ट किया कि अगर मामला एससी/एसटी एक्ट से जुड़ा न होता, तो अदालत अग्रिम जमानत देने पर विचार कर सकती थी। हालांकि, जज ने यह भी साफ किया कि आदेश में दी गई टिप्पणियां सिर्फ जमानत याचिका के निपटारे तक ही सीमित हैं। इससे अजीत भारती के दोषी या निर्दोष होने अथवा आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
बता दें, न्यायाधीश लालर ने कहा कि भारती का यह दावा कि आजाद को खुद को किसी उच्च जाति की लड़की से शादी करने के योग्य बनाना चाहिए, जाति का एक विशिष्ट संदर्भ है और अपमानजनक है।
अदालत ने टिप्पणी की, “यह दावा कि उक्त सांसद को खुद को किसी उच्च जाति की लड़की से शादी करने के योग्य बनाना चाहिए, जाति का एक विशिष्ट संदर्भ है और अपमानजनक है कि एससी/एसटी समुदाय में किसी से भी शादी करने के योग्य व्यक्ति को उच्च जाति की लड़की से शादी करने के लिए कुछ अतिरिक्त/कुछ अधिक/योग्य क्यों होना पड़ता है।”
सोशल मीडिया कमेंट से शुरू हुआ था पूरा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत अजीत भारती के एक वीडियो पोस्ट पर आए कमेंट से हुई थी। कमेंट में किसी यूजर ने लिखा था कि अगर भारती अपनी बहन की शादी नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद से करा दें, तो जातिगत आरक्षण खत्म हो जाएगा।
इसके जवाब में भारती ने विवादास्पद टिप्पणी करते हुए कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि शादी के लिए सिर्फ सांसद होना काफी नहीं है, बल्कि आजाद को पहले सवर्ण महिला से शादी के लायक खुद को साबित करना होगा।
एफआईआर दर्ज और बचाव पक्ष की दलीलें
मामले में 23 अगस्त को एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें एससी/एसटी एक्ट, आईटी एक्ट की धारा 67 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(सी) व 351(3) लगाई गई हैं। एफआईआर में बाबा साहेब आंबेडकर, सांसद चंद्रशेखर आजाद और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप है।
दूसरी ओर, भारती के वकील जय अनंत देहादराय ने कोर्ट में तर्क दिया कि यह सिर्फ एक काल्पनिक उदाहरण था, न कि किसी व्यक्ति का सीधा अपमान। उन्होंने कहा कि पूरी रॉ रिकॉर्डिंग देखे बिना निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
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