Delhi : दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने स्वास्थ्य विभाग में दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और सर्जिकल सामान की खरीद में कथित घोटाले मामले में बड़ी कार्रवाई की। एसीबी ने स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व महानिदेशक (DGSS) डॉ. वत्सला अग्रवाल और केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा को गिरफ्तार कर लिया है।
एसीबी के अनुसार, इन पर सरकारी खरीद प्रक्रिया में हेरफेर कर चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप है। यह मामला दिल्ली सरकार के विजिलेंस निदेशालय से मिली शिकायत के बाद दर्ज किया गया था।
जांच में सामने आया कि स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय के तहत संचालित केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) में दवाइयों, सर्जिकल उपभोग्य सामग्रियों, मेडिकल उपकरणों और अन्य जरूरी सामान की खरीद के दौरान नियमों की अनदेखी की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ सरकारी अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर खरीद प्रक्रिया, निविदा शर्तों और तकनीकी मानकों में हेरफेर कर चुनिंदा आपूर्तिकर्ताओं को अनुचित लाभ पहुंचाया।
इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ और निजी कंपनियों को आर्थिक फायदा मिला। जांच के दायरे में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल उपकरण, एनेस्थीसिया वर्क स्टेशन, बेडशीट, लिनेन, ओआरएस, दवाइयों और अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद शामिल है। ACB का आरोप है कि इन सामानों की खरीद बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर की गई और प्रतिस्पर्धा खत्म कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
पूछताछ और जांच में सामने आई अफसरों की भूमिका
इस मामले में एसीबी ने 2 जून 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी। जांच के दौरान सबसे पहले केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) के तत्कालीन हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा को 18 जून को गिरफ्तार किया गया, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
एसीबी के अनुसार, डॉ. रंगा से पूछताछ, रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच के दौरान पूर्व डीजीएचएस डॉ. वत्सला अग्रवाल और तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा की भूमिका सामने आई। इसके बाद दोनों के खिलाफ आवश्यक अनुमति लेकर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
जांच में पता चला है कि खरीद प्रस्तावों की मंजूरी, टेंडर की शर्तें तय करने, खरीद समितियों के गठन और खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई अहम फैसले उच्च स्तर पर लिए गए थे। वहीं, करोड़ों रुपये के खरीद प्रस्ताव सीपीए की अकाउंट्स शाखा से संसाधित किए गए और बिलों की जांच व भुगतान की प्रक्रिया डीसीए कार्यालय के माध्यम से पूरी की गई।
एसीबी ने दोनों आरोपियों को 27 जून को गिरफ्तार कर राऊज एवेन्यू स्थित विशेष भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अदालत में पेश किया। जांच एजेंसी ने पुलिस रिमांड की मांग करते हुए कहा कि मामले में अभी कई अहम दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और खरीद रिकॉर्ड जुटाए जाने बाकी हैं। साथ ही धन के लेनदेन, अन्य लाभार्थियों और संभावित सह-साजिशकर्ताओं की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
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