नाबालिग सौतेली बेटियों से दुष्कर्म, दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखी दोषी की 15 साल की सजा, मां के आचरण पर भी सख्त टिप्पणी

Summary :

Delhi HC Judgment Sexual Assault of Stepdaughters: दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग सौतेली बेटियों से दुष्कर्म के मामले में आरोपी की दोषसिद्धि और 15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि पीड़िताओं के बयानों में मामूली विरोधाभास अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं करते। जस्टिस विमल कुमार यादव ने सुनवाई के दौरान पीड़िताओं की मां के आचरण पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मां ने बच्चियों के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी होने के बावजूद आवश्यक कदम नहीं उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह अत्यंत कठिन परिस्थिति…

Delhi HC Judgment Sexual Assault of Stepdaughters: दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग सौतेली बेटियों से दुष्कर्म के मामले में आरोपी की दोषसिद्धि और 15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा बरकरार रखी। कोर्ट ने कहा कि पीड़िताओं के बयानों में मामूली विरोधाभास अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं करते। जस्टिस विमल कुमार यादव ने सुनवाई के दौरान पीड़िताओं की मां के आचरण पर भी गंभीर टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि मां ने बच्चियों के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी होने के बावजूद आवश्यक कदम नहीं उठाए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वह अत्यंत कठिन परिस्थिति में थी। उसने अपने पहले पति और बच्चियों के जैविक पिता को छोड़कर आरोपी के साथ रहना शुरू किया तथा उससे एक बच्ची भी हुई। संभवतः यही कारण था कि आरोपी के साथ उस पर भी आरोपपत्र दायर हुआ हालांकि बाद में ट्रायल कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

बयानों में मामूली विसंगतियां स्वाभाविक

आरोपी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की दुष्कर्म संबंधी धाराओं और पॉक्सो कानून के तहत दोषी ठहराया गया। हाईकोर्ट ने आरोपी का यह तर्क अस्वीकार कर दिया कि पीड़िताओं के बयानों में असंगतियां हैं और मेडिकल चोटों के अभाव में मामला अविश्वसनीय है। कोर्ट ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में मामूली विसंगतियां स्वाभाविक होती हैं और उनसे विश्वसनीय गवाही पर असर नहीं पड़ता। कोर्ट ने दोहराया कि यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद हो तो केवल उसी के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है।

गवाही और साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर मुहर

हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िताओं की गवाही विश्वसनीय है और स्वतंत्र गवाहों, मकान मालिक के हस्तक्षेप तथा फोरेंसिक साक्ष्यों से उसका समर्थन भी होता है। कोर्ट ने कहा कि बच्चियां लगभग डेढ़ वर्ष से यौन उत्पीड़न झेल रही थीं।ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि न पाते हुए हाइकोर्ट ने अपील खारिज की और दोषी को समर्पण करने का निर्देश दिया।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।