Delhi MCD Mayor Election 2026: राजधानी में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के महापौर चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, 20 अप्रैल को नामांकन की अंतिम तारीख तय की जा सकती है, जबकि 28 अप्रैल को महापौर चुनाव होने की संभावना है। आधिकारिक घोषणा भले बाकी हो, लेकिन सियासी दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आगामी बुधवार तक महापौर और उप महापौर पद के उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लग सकती है।
हाल ही में मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक अहम बैठक में चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों के चयन और पार्षदों के समर्थन को लेकर गहन चर्चा हुई। इस बैठक को चुनावी तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बार चुनाव कई मायनों में खास है। राजधानी में केंद्र, राज्य और निगम तीनों स्तरों पर एक ही दल की सरकार होने के चलते चुने जाने वाले महापौर के सामने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर दावेदारों की सक्रियता तेज हो गई है।
पार्टी रणनीति के तहत पूर्व में रहे तीनों निगम उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिल्ली से संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जा रही है। इसी आधार पर संभावित उम्मीदवारों के नामों को शॉर्टलिस्ट किया जा रहा है।
यह पांचवें वर्ष का महापौर चुनाव होगा
एमसीडी के मौजूदा कार्यकाल में यह पांचवें वर्ष का महापौर चुनाव होगा, जिसे काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार चुना गया महापौर शेष कार्यकाल तक पद पर बना रह सकता है, इसलिए पार्षदों में भी इस चुनाव को लेकर खास उत्साह है। संख्या बल के लिहाज से भाजपा फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, जिससे महापौर पद उसके खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस बार विपक्ष भी मुकाबले में उतर सकता है, जिससे चुनाव दिलचस्प होने के आसार हैं। पिछले साल विपक्ष के चुनाव से दूरी बनाने के कारण मुकाबला एकतरफा रहा था और राजा इक़बाल सिंह निर्विरोध महापौर चुने गए थे।
भाजपा में खेमेबाजी बढ़ी, उम्मीदवार नहीं गुट की जीत दांव पर
सूत्रों के अनुसार, इस बार भाजपा के अंदर कई खेमा सक्रिय हैं और हर गुट अपने-अपने उम्मीदवार को आगे बढ़ाने में लगा है। ऐसे में मुकाबला केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर भी देखने को मिल सकता है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार महापौर चुनाव किसी एक चेहरे की जीत से ज्यादा, किसी खास गुट की ताकत का प्रदर्शन बन सकता है।
यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व के लिए अंतिम नाम तय करना आसान नहीं माना जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि यदि सभी गुटों में संतुलन नहीं बैठा, तो असंतोष या क्रॉस वोटिंग जैसी स्थितियां भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में भाजपा के लिए यह चुनाव अंदरूनी एकजुटता की परीक्षा भी साबित हो सकता है।
इन नामों पर हो रहा मंथन
सूत्रों के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली से स्थायी समिति की प्रमुख सत्या शर्मा और पूर्व चेयरमैन सत्यपाल सिंह के नाम चर्चा में हैं। वहीं उत्तर दिल्ली से मौजूदा उप महापौर जय भगवान यादव, नेता सदन प्रवेश वाही और शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा भी दावेदारी में माने जा रहे हैं। दक्षिणी दिल्ली से भी कई वरिष्ठ पार्षद संगठन के संपर्क में हैं और अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में जय भगवान यादव का नाम खासा चर्चित है, जिनका लंबा प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव उनके पक्ष में जाता है। इसके अलावा भाजपा पार्षद व वरिष्ठ नेता राजपाल सिंह व स्टैंडिंग कमेटी के डिप्टी चेयरमैन सूंदर सिंह तंवर के नामों पर चर्चा चल रही है।
रिपोर्ट- प्रगनेश सिंह
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