दिल्ली नगर निगम स्कूल स्टेडियम को आधुनिक बनाने के लिए पीपीपी के तहत पंचवर्षीय नीति लाएगा

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Delhi Municipal Corporation : दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अपने सभी स्कूल स्टेडियम में खेल अवसंरचना को आधुनिक बनाने और उनके संचालन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत एक पंचवर्षीय नीति लाने जा रहा है। इस योजना के तहत निजी कंपनियों को स्टेडियम का विकास करने और व्यावसायिक रूप से उन्हें संचालित करने की अनुमति होगी, लेकिन इसके बदले में उन्हें नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क कोचिंग देना होगा। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, शिक्षा विभाग के पास फिलहाल 14 ऐसे स्टेडियम हैं जहां फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और एथलेटिक्स जैसी खेल अवसंरचना बेहद…

Delhi Municipal Corporation : दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अपने सभी स्कूल स्टेडियम में खेल अवसंरचना को आधुनिक बनाने और उनके संचालन के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत एक पंचवर्षीय नीति लाने जा रहा है। इस योजना के तहत निजी कंपनियों को स्टेडियम का विकास करने और व्यावसायिक रूप से उन्हें संचालित करने की अनुमति होगी, लेकिन इसके बदले में उन्हें नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क कोचिंग देना होगा।

नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, शिक्षा विभाग के पास फिलहाल 14 ऐसे स्टेडियम हैं जहां फुटबॉल, क्रिकेट, वॉलीबॉल, बैडमिंटन और एथलेटिक्स जैसी खेल अवसंरचना बेहद प्राथमिक स्तर पर हैं। इन सभी स्टेडियम को इस योजना के तहत आधुनिक बनाया जाएगा।

बिना खर्च के होगा स्टेडियमों का कायाकल्प

इस नीति की सबसे खास बात यह है कि नगर निगम को इन स्टेडियम के कायाकल्प के लिए अपनी तरफ से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। निविदा प्रक्रिया के जरिए चुने गए निजी संचालक निर्माण, मरम्मत और रखरखाव का पूरा खर्च खुद उठाएंगे। इसके बदले में उन्हें स्कूल के समय के बाद आम लोगों को शुल्क के भुगतान पर खेलों का प्रशिक्षण देने की अनुमति होगी। अधिकारियों ने बताया कि निजी संचालक उच्च अधिकारियों की मंजूरी के बाद स्टेडियम में फुटबॉल मैदान, क्रिकेट अभ्यास की सुविधाएं, टेनिस, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और बैडमिंटन कोर्ट के साथ-साथ वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालय, कैंटीन और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित कर सकेंगे।

मुफ्त कोचिंग के साथ सुरक्षा और गुणवत्ता पर रहेगा फोकस

योजना के तहत प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य जांच की जाएगी, ताकि उनके प्रदर्शन पर नजर रखी जा सके। बच्चों का पूरा ब्योरा और डेटा डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। इसमें लड़कियों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाएगा। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, संचालक (ऑपरेटर) चुनने की प्रक्रिया में केवल उन्हीं कंपनियों या संस्थानों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें खेल क्षेत्र का अच्छा अनुभव हो। इसके अलावा, कंपनी के संस्थापकों में से कम से कम एक सदस्य का राष्ट्रीय या विश्वविद्यालय स्तर का खिलाड़ी होना अनिवार्य होगा।

निजी संचालकों के लिए बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी नियम-कानून (जैसे पॉक्सो अधिनियम) का सख्ती से पालन करना अनिवार्य होगा। यह समझौता शुरुआती तौर पर पांच वर्षों के लिए होगा, जिसे बेहतर प्रदर्शन के आधार पर आगे पांच साल के लिए विस्तारित किया जा सकेगा।

Sumant Chaudhary