अब नहीं होगा घोटाला! दिल्ली सरकार उपलब्ध कराएगी Smart Card, मजदूरों तक सीधे पहुंचेगी हर योजना

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Delhi News: दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा राजधानी में निर्माण श्रमिकों के हित में एक नई पहल शुरू की जा रही है। इसका उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि श्रमिकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से पहुंच सके। दिल्ली सरकार निर्माण श्रमिकों के लिए चिप-आधारित स्मार्ट कार्ड जारी करने की तैयारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्ड में श्रमिकों की जरूरी जानकारी सुरक्षित रूप से दर्ज होगी। यह कार्ड उनकी पहचान का मुख्य माध्यम होगा और हर साल इसका नवीनीकरण किया जाएगा। इससे श्रमिकों को बार-बार पंजीकरण कराने की परेशानी नहीं होगी।

Delhi News: डिजिटल प्लेटफॉर्म से होगा प्रबंधन

इस योजना के तहत एक एकीकृत डिजिटल सिस्टम तैयार किया जाएगा, जिसमें सेस मैनेजमेंट पोर्टल, श्रमिक सेवा केंद्र और लेबर चौक का नेटवर्क शामिल होगा। इन सभी माध्यमों को जोड़कर श्रमिकों के डेटा और सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे काम करने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।

प्रवासी मजदूरों को मिलेगा बड़ा फायदा

यह योजना खास तौर पर उन मजदूरों के लिए फायदेमंद होगी, जो काम के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं। स्मार्ट कार्ड की मदद से वे कहीं भी रहकर सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्हें हर बार नए सिरे से रजिस्ट्रेशन नहीं कराना पड़ेगा। स्मार्ट कार्ड को श्रमिकों के पंजीकरण नंबर और मिलने वाली सुविधाओं से जोड़ा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे और किसी तरह की गड़बड़ी या दोहराव (डुप्लीकेशन) न हो। इससे सिस्टम अधिक विश्वसनीय बनेगा।

सेस मैनेजमेंट पोर्टल से बढ़ेगी पारदर्शिता

निर्माण कार्य करने वाली कंपनियों और बिल्डरों से वसूले जाने वाले सेस को लेकर भी नई व्यवस्था बनाई जा रही है। नियमों के अनुसार, बिल्डरों को कुल लागत का एक प्रतिशत सेस के रूप में देना होता है। नया पोर्टल इस पूरी प्रक्रिया, मूल्यांकन से लेकर भुगतान तक को डिजिटल बना देगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फंड का बेहतर उपयोग हो सकेगा। जब बोर्ड की आय में बढ़ोतरी होगी, तो श्रमिकों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं का दायरा भी बढ़ेगा। इसमें स्वास्थ्य सहायता, पेंशन, बच्चों की शिक्षा और बीमा जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इससे श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद है।

नई प्रणाली में श्रमिकों के डेटा को अन्य सरकारी डेटाबेस जैसे ई-श्रम पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल सही और पात्र लोगों को ही लाभ मिले। अभी दिल्ली में लगभग 2.62 लाख निर्माण श्रमिक सक्रिय रूप से पंजीकृत हैं, जबकि लाखों लोगों ने आवेदन किया हुआ है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर करीब 30 लाख तक पहुंचाना है, ताकि अधिक से अधिक मजदूर इस योजना का फायदा उठा सकें।

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