होटल, बैंक्वेट हॉल और इंडस्ट्री को बड़ा फायदा! दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, DJB चार्ज हुआ सस्ता

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Delhi News: दिल्ली सरकार ने होटल, बैंक्वेट हॉल, फैक्ट्री और अन्य व्यावसायिक भवन बनाने वालों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (Infrastructure Charges) में भारी कमी करने का फैसला लिया है। नई दरों के लागू होने के बाद कई श्रेणियों में शुल्क 84 प्रतिशत तक कम हो गया है। इससे नए कमर्शियल और औद्योगिक प्रोजेक्ट शुरू करने की लागत पहले की तुलना में काफी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। क्या होता है DJB इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज? दिल्ली जल…

Delhi News: दिल्ली सरकार ने होटल, बैंक्वेट हॉल, फैक्ट्री और अन्य व्यावसायिक भवन बनाने वालों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (Infrastructure Charges) में भारी कमी करने का फैसला लिया है। नई दरों के लागू होने के बाद कई श्रेणियों में शुल्क 84 प्रतिशत तक कम हो गया है। इससे नए कमर्शियल और औद्योगिक प्रोजेक्ट शुरू करने की लागत पहले की तुलना में काफी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

क्या होता है DJB इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज?

दिल्ली जल बोर्ड नए निर्माण कार्यों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज लेता है। यह शुल्क मुख्य रूप से उन भवनों पर लागू होता है जहां नया निर्माण किया जा रहा हो या पहले से बने भवन में अतिरिक्त निर्माण किया जा रहा हो। निर्माण शुरू करने से पहले इस शुल्क का भुगतान करना जरूरी होता है। यह चार्ज प्लॉट के आकार, भवन के प्रकार और क्षेत्र की श्रेणी के आधार पर तय किया जाता है।

बैंक्वेट हॉल और कमर्शियल भवनों को मिली राहत

  • नई अधिसूचना के अनुसार बैंक्वेट हॉल और कमर्शियल असेंबली भवनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में अच्छी-खासी कटौती की गई है।
  • A और B श्रेणी के क्षेत्रों में पहले जहां करीब 57.68 लाख रुपये शुल्क देना पड़ता था, अब इसे घटाकर 19.80 लाख रुपये कर दिया गया है। यानी लगभग 65.7 प्रतिशत की राहत मिलेगी।
  • C श्रेणी में पहले 41.20 लाख रुपये का शुल्क था, जिसे कम करके 19.80 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं D श्रेणी में पहले 24.72 लाख रुपये देना पड़ता था, जो अब घटकर 19.80 लाख रुपये रह गया है।
  • इसके अलावा E और F श्रेणी के क्षेत्रों में शुल्क 16.48 लाख रुपये से घटाकर 9.90 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं G और H श्रेणी में यह चार्ज 16.48 लाख रुपये से घटकर केवल 5.94 लाख रुपये रह गया है।

होटलों के लिए भी कम हुआ शुल्क

दिल्ली सरकार ने होटल उद्योग को भी राहत दी है। नई दरों के अनुसार A और B श्रेणी के होटलों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज 57.68 लाख रुपये से घटाकर 24.06 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे होटल बनाने की शुरुआती लागत में काफी कमी आएगी।

इसी तरह C श्रेणी के होटलों के लिए भी शुल्क घटाकर 24.06 लाख रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से होटल सेक्टर में नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी फायदा होगा।

फैक्ट्री और इंडस्ट्रियल यूनिट्स को सबसे ज्यादा फायदा

  • नई दरों का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक भवनों और फैक्ट्रियों को मिलने वाला है। A और B श्रेणी के चार मंजिला औद्योगिक भवनों के लिए पहले 57.68 लाख रुपये का शुल्क देना पड़ता था, जिसे अब घटाकर केवल 8.91 लाख रुपये कर दिया गया है। यह लगभग 84.6 प्रतिशत की कटौती है।
  • C श्रेणी में शुल्क 41.20 लाख रुपये से घटकर 8.91 लाख रुपये हो गया है। D श्रेणी में भी 24.72 लाख रुपये की जगह अब 8.91 लाख रुपये ही देने होंगे।
  • इसी तरह E और F श्रेणी के क्षेत्रों में चार्ज 16.48 लाख रुपये से घटकर 4.46 लाख रुपये कर दिया गया है। जबकि G और H श्रेणी के लिए यह शुल्क केवल 2.67 लाख रुपये रह गया है।

अन्य श्रेणियों में भी नई दरें लागू

सरकार ने कुछ अन्य व्यावसायिक श्रेणियों के शुल्क में भी बदलाव किया है। A और B श्रेणी में 54.93 लाख रुपये का शुल्क अब घटकर 37.58 लाख रुपये हो गया है। C और D श्रेणी में भी शुल्क कम करके 37.58 लाख रुपये कर दिया गया है।

वहीं E और F क्षेत्रों में शुल्क 27.47 लाख रुपये से घटाकर 18.79 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे इन क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट शुरू करना पहले की तुलना में अधिक किफायती होगा।

नई नीति से क्या होगा फायदा?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में कमी का सीधा फायदा उद्योगों, होटल कारोबार और अन्य कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को मिलेगा। शुरुआती निवेश कम होने से अधिक लोग नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए आगे आएंगे।

सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को आसान बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और निवेशकों के साथ-साथ संस्थानों को आर्थिक राहत देना है। उम्मीद है कि इससे दिल्ली में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

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Amit Kumar

अमित कुमार पिछले 3 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उन्हें विदेश, बिजनेस, ऑटो, टेक और गैजेट्स से जुड़ी खबरें लिखने का अच्छा अनुभव है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन, आईआईएमसी से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने वेबसाइट पर लिखने से की। इसके बाद इंडिया डेली न्यूज़ चैनल और न्यूज़ इंडिया 24x7 में हिंदी सब-एडिटर के तौर पर काम किया। वर्तमान में वह पंजाब केसरी, दिल्ली में हिंदी सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।