नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र संघ अपनी मांगों को लेकर प्रशासन से आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बनाया हुआ है। इसी क्रम में छात्रों की भूख हड़ताल शनिवार को छठा दिन भी जारी रही। ज्ञात हो कि सोमवार से जेएनयू के 11 छात्र भूख पर हैं। इस दौरान छात्रों के समर्थन में शिक्षक संघ के साथ-साथ कैंपस के विद्यार्थियों का भी समर्थन मिल रहा है। शनिवार को भी छात्रों के समर्थन में जेएनयू के कई विभागों में पढ़ाई कर रहे छात्र शामिल हुए और जेएनयू परिसर में उनके समर्थन में पैदल मार्च किया।
इस दौरान भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से कुछ की तबीयत भी बिगड़ने की खबर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इनका शुगर स्तर और ब्लड प्रेशर भी गिर चुका है। बावजूद इन्होंने जेएनयू प्रशासन के खिलाफ ये अपनी भूख हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। छात्र संघ ने आरोप लगाते हुए कहा कि जेएनयू प्रशासन की ओर से जो कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है, उसमें कई खामिया हैं। हम इसमें पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
इनका आरोप है कि प्रशासन ने जो पहले बीए दूसरे वर्ष में लेटरल एंट्री छात्रों की हुआ करती थी। उसे भी समाप्त कर दिया है। इंजीनियरिंग कोर्स के छात्रों के लिए अब तक विभाग का निर्माण नहीं किया गया है। लेकिन उनसे 70 हजार रुपये तक फीस वसूल ली गई है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने कहा कि हमारी मांग है कि जेएनयू के छात्रों के समर्थन में पूरे देश के छात्र साथ आए।
साथ ही हमारी मांगों के मद्देनजर सोमवार को एक दिन की क्रमिक भूख हड़ताल करके विरोध जताए। छात्रों ने कहा कि हमारी मांगों को लेकर कुलपति हमें समय दे और बातचीत करें। उनका आरोप है कि कुलपति का छात्रों के प्रति रवैया ठीक नहीं है। हम कुलपति से इस बारे में बात करने की कोशिश कर चुके हैं पर वह हमसे नहीं मिलना चाहते हैं।


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