Kejriwal Rajghat Protest: आबकारी नीति मामले में आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, अरविन्द केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने न्यायपालिका के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। केजरीवाल ने कल और मनीष सिसोदिया ने आज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए सत्याग्रह का ऐलान किया। इस सिलसिले में दोनों दोपहर 12 बजे राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को नमन किया।
Kejriwal Rajghat Protest: “न्याय की उम्मीद टूटी”

अरविन्द केरजीवाल और मनीष सिसोदिया ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को अलग-अलग चिट्ठी लिखकर स्पष्ट किया कि वह अब इस मामले न खुद पेश होंगे और न उनकी तरफ से कोई वकील पेश होगा। केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता को लिखी चिट्ठी में कहा कि ‘उनकी अब न्याय मिलने उम्मीद पूरी तरह टूट चुकी है।’ इसलिए वह अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर महात्मा गांधी के दिखाए सत्याग्रह के रास्ते पर चल रहे हैं। मंगलवार को सिसोदिया ने भी लिखे पात्र में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके पास सत्याग्रह के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने केजरीवाल और सिसोदिया की याचिका खारिज कर दी। याचिका में उन्होंने मांग की थी कि जज खुद को केस से अलग कर लें क्योंकि हितों के टकराव का आरोप था। AAP नेताओं का कहना है कि जज के बच्चे केंद्र सरकार के पैनल में वकील हैं, इसलिए निष्पक्ष सुनवाई पर सवाल उठता है। केजरीवाल ने यह भी कहा कि जज कुछ खास विचारधारा वाले संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल रही हैं।
Arvind Kejriwal News: राजघाट पर AAP का सत्याग्रह

ऐसे में ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह कदम आम आदमी पार्टी के शुरुआती दिनों की याद दिलाता है, जब पार्टी भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करती थी। पार्टी अब अपनी कानूनी लड़ाई को “सत्याग्रह” नाम देकर सीधे जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रही है।


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