Liquor Policy Case in HC: कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरिवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय करते हुए इसे 6 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश के संचालन को फिलहाल जारी रखने की अनुमति दी है। यह सुनवाई CBI की उस याचिका पर हुई जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले को चुनौती दी गई है।
Liquor Policy Hearing Case in HC: कोर्ट में क्या हुआ सुनवाई के दौरान

जस्टिस स्वर्ण कान्त शर्मा की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों से पूछा कि क्या वे जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय चाहते हैं। केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) के माध्यम से चुनौती दी है। यह आदेश ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई अधिकारी पर की गई टिप्पणियों पर रोक से जुड़ा था।
CBI Statement on Liquor Policy Case: सीबीआई की तरफ से क्या दलील दी गई
सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करना आरोपियों का अधिकार है, लेकिन इसे सुनवाई टालने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में गंभीर मुद्दे जुड़े हैं, इसलिए SLP को जल्द सूचीबद्ध किया जाना चाहिए ताकि विवादित आदेश लंबे समय तक रिकॉर्ड में न बना रहे।
Liquor Policy Case in HC: कोर्ट ने क्या फैसला दिया
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को अपना जवाब दाखिल करने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल 2026 को तय करते हुए अपना अंतरिम आदेश बरकरार रखा।
बता दें, कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार केस में कुल 23 आरोपियों को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पहले बरी कर दिया था। इन आरोपियों में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और के. कविता समेत कई अन्य लोगों के नाम शामिल थे।
ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में सीबीआई की जांच पर भी कड़ी टिप्पणी की थी। इसके बाद सीबीआई ने उसी आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दाखिल की है। 9 मार्च को हाई कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी करते हुए ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को पहली नजर में त्रुटिपूर्ण बताया था।
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