राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने बुधवार को कहा कि दक्षिणी रिज इलाके में अतिक्रमण के बारे में पूरी सूचना उपलब्ध नहीं है। साथ ही, अधिकारियों को पूरे इलाके के सीमांकन तथा अवैध निर्माण की पहचान के बारे में जानकारी देने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति रघुवंश आर राठौर की अध्यक्षता वाली एनजीटी की अवकाश पीठ ने दक्षिण, दक्षिण पूर्व और नयी दिल्ली के जिलाधिकारियों को इस सिलसिले में एक निजी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
हरित अधिकरण ने इस बात पर गंभीर संज्ञान लिया कि उत्तरी दिल्ली के जिलाधिकारी और नयी दिल्ली के वन विभाग के संबद्ध अधिकारी को आदेश जारी किए जाने के बावजूद वे उपस्थित नहीं हुए और उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जाता है।
अधिकरण ने कहा, ‘‘हम दक्षिण,दक्षिण पूर्व और नयी दिल्ली जिला के जिलाधिकारी को एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर इस बात का जिक्र करने का निर्देश देते हैं कि कितने क्षेत्र का सीमांकन हुआ है और कितना बाकी है। साथ ही, अब तक सीमांकित नहीं किए गए, पहचान किए गए अतिक्रमण, हटाये गए या हटाये जाने वाले अतिक्रमण के क्षेत्रों के बारे में भी जानकारी दी जाए।
एनजीटी ने वन, दक्षिणी संभाग, के उप संरक्षक को भी इस बारे में एक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
अधिकरण दक्षिण दिल्ली निवासी सोनिया घोष और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने दक्षिणी रिज क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ इसे दायर किया है। उन्होंने अतिक्रमण हटाए जाने का अनुरोध किया है।
बहरहाल, अधिकरण ने इस विषय की अगली सुनवाई 17 जुलाई के लिए तय की है।


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