दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को अनधिकृत निर्माणों की सीलिंग के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) को नोटिस जारी किया। याचिका के अनुसार, सीलिंग आदेश की तामील किए बिना परिसरों को सील करने और प्रभावित व्यक्तियों को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित करने की प्रथा शक्ति का मनमाना प्रयोग है और यह गैरकानूनी और असंवैधानिक दोनों है। न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने दलीलें सुनने के बाद केंद्र, एमसीडी और एनडीएमसी से जवाब मांगा और मामले को 2 अप्रैल, 2025 के लिए सूचीबद्ध किया।
इस बीच याचिकाकर्ता अमित साहनी ने मामले में प्रतिवादी के रूप में दिल्ली सरकार को हटाने का अनुरोध किया है। यह अनुरोध पीठ द्वारा यह टिप्पणी किए जाने के बाद आया है कि मामले में दिल्ली सरकार को पक्षकार के रूप में शामिल करना अनावश्यक है। याचिका में कहा गया है कि सुनवाई समाप्त होने के बाद और परिसर को सील किए जाने से पहले सीलिंग आदेश की एक प्रति प्रभावित व्यक्ति को दी जानी चाहिए।
इसके अतिरिक्त इसमें अपीलीय प्राधिकारी का विवरण और अपील दायर करने के लिए 30 दिनों की अवधि शामिल करने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता अमित साहनी, जो एक कार्यकर्ता और अधिवक्ता हैं, उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि नियमों में विसंगति के कारण, संबंधित अधिनियम के तहत पारित अंतिम सीलिंग आदेश की प्रति परिसर को सील किए जाने से पहले प्रभावित व्यक्ति को प्रदान नहीं की जाती है। यह प्रक्रिया प्रभावित व्यक्ति को वैधानिक उपाय का लाभ उठाने के अवसर से वंचित करती है।
परिणामस्वरूप, मालिक/कब्जाधारक अक्सर आश्चर्यचकित हो जाता है, क्योंकि परिसर को सील कर दिया जाता है और सीलिंग होने के बाद ही आदेशों की सूचना दी जाती है। सीलिंग आदेश की तामील किए बिना परिसरों को सील करने और प्रभावित व्यक्ति को उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित करने की प्रथा शक्ति का मनमाना प्रयोग है और यह गैरकानूनी और असंवैधानिक दोनों है।
याचिकाकर्ता अमित साहनी ने इस मुद्दे को संबोधित करने के लिए 7 जनवरी, 2025 को प्रतिवादी को एक अभ्यावेदन दिया था, लेकिन उनके सर्वोत्तम ज्ञान के अनुसार, अभ्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। याचिका में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वर्तमान याचिका के लंबित रहने के दौरान अंतरिम उपाय के रूप में, सीलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले संबंधित अधिनियम के तहत सीलिंग आदेश की एक प्रति प्रभावित व्यक्तियों को प्रदान की जाए।


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