Palam Fire Case on Saurabh Bhardwaj: आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को पालम में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर भाजपा सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस घटना में सरकारी सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। उनका आरोप है कि अगर समय पर सही कदम उठाए जाते, तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन सरकार ने अपनी छवि खराब होने के डर से जरूरी फैसले नहीं लिए।
Palam Fire Case on Saurabh Bhardwaj: “खराब थी हाइड्रोलिक लिफ्ट, फिर भी नहीं हटाई गई गाड़ी”
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि आग बुझाने के लिए पहुंची फायर ब्रिगेड की हाइड्रोलिक लिफ्ट सही तरीके से काम नहीं कर रही थी। इस वजह से ऊपरी मंजिल पर फंसे लोगों को निकालना मुश्किल हो गया। स्थानीय लोगों ने सुझाव दिया कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी को हटाकर नीचे गद्दे बिछा दिए जाएं, ताकि लोग ऊपर से कूदकर अपनी जान बचा सकें।
लेकिन, उनके अनुसार, यह सुझाव मानने के बजाय गाड़ी वहीं खड़ी रखी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर गद्दे बिछाकर लोगों को बचा लिया जाता, तो यह साफ हो जाता कि फायर ब्रिगेड की मशीनें काम नहीं कर रही थीं, जिससे सरकार की छवि खराब होती।
स्थानीय लोगों ने की मदद की कोशिश

उन्होंने बताया कि घटना स्थल के पास ही गद्दों की एक दुकान थी, जिसमें बड़ी संख्या में गद्दे मौजूद थे। लगभग 500 स्थानीय लोग और दुकानदार लगातार पुलिस और फायर ब्रिगेड से अनुरोध कर रहे थे कि उन्हें गद्दे बिछाने दिए जाएं। सौरभ भारद्वाज के अनुसार, जिस मंजिल पर लोग फंसे थे, उसकी ऊंचाई लगभग 30 से 32 फीट थी। अगर नीचे गद्दे बिछा दिए जाते, तो लोग सुरक्षित नीचे कूद सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया।
“पहली गाड़ी नहीं खुली, दूसरी कैसे खुल गई?”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब पहली फायर ब्रिगेड की गाड़ी तारों की वजह से नहीं खुल पा रही थी, तो दूसरी गाड़ी कैसे काम करने लगी? क्या तार अचानक हट गए थे या फिर पहले से ही कोई और समस्या थी? उन्होंने कहा कि यह पूरी घटना कई सवाल खड़े करती है।
दर्दनाक तस्वीर, 9 लोगों की मौत

इस हादसे में कुल 9 लोगों की मौत हो गई, जिसमें महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। सौरभ भारद्वाज ने एक भावुक पहलू साझा करते हुए बताया कि एक 70 वर्षीय बुजुर्ग मां अपनी बेटी को बचाने के लिए उसे गले लगाकर बैठी रही। दोनों की मौत हो गई और उनके शव इस कदर जल गए कि अलग नहीं हो पाए। इस कारण 9 लोगों के लिए 8 चिताएं ही जलाई गईं।
“वीडियो बनाने वालों को हटाया गया”
उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिस ने वीडियो बनाने वाले लोगों को वहां से हटाया। उनका कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि घटना के सबूत सामने न आ सकें और प्रशासन पर सवाल न उठें।
“सड़क तंग नहीं थी, ट्रैफिक भी नहीं था”
सरकार की तरफ से दिए गए बयानों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि सड़क तंग थी या वहां ट्रैफिक जाम था। उनके मुताबिक, सड़क करीब 30 फीट चौड़ी थी और सुबह का समय होने के कारण दुकानें भी बंद थीं, जिससे ट्रैफिक का सवाल ही नहीं उठता।
मासूम बच्चों की भी गई जान
इस हादसे में कई छोटे बच्चों की भी मौत हुई। उन्होंने बताया कि एक 6 साल की बच्ची का शव कफन में लिपटा हुआ लाया गया, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया। वहीं, एक 3 साल की बच्ची को उसके परिजन गोद में उठाकर लाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी गंभीर घटना पर भी कुछ लोग राजनीति कर रहे हैं और पीड़ितों को ही दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
मृतकों का विवरण
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि इस हादसे में 39 वर्षीय कमल, 33 वर्षीय प्रवेश, 35 वर्षीय आशु, 28 वर्षीय दीपिका और तीन बच्चियां—15 साल की निहारिका, 6 साल की इवानी और 3 साल की जेसिका की जान चली गई। प्रवेश ने अपनी जान बचाने के लिए ऊपर से छलांग लगाई थी, लेकिन नीचे कोई इंतजाम न होने के कारण वह सीधे फायर ब्रिगेड की गाड़ी पर गिरा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
“सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि शुरुआत से ही यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि सभी विभागों ने सही काम किया और कोई गलती नहीं हुई। उन्होंने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी ऐसी घटनाओं में सरकार ने अपनी गलती मानने के बजाय पीड़ितों को ही जिम्मेदार ठहराया था। उनका कहना है कि यह एक पैटर्न बन गया है।
शोकसभा में हंगामे का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि शोकसभा के दौरान कुछ लोगों ने हंगामा किया ताकि इस मुद्दे पर चर्चा न हो सके। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को वहां से हटाने की कोशिश की गई और उनके साथ बदसलूकी भी हुई।
पुलिस पर भी लगाए आरोप
उन्होंने कहा कि पुलिस ने भी इस दौरान ठीक व्यवहार नहीं किया। उनके अनुसार, कुछ पुलिसकर्मियों ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की और मीडिया के लोगों को भी वहां से हटाया गया। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि उनके पास इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो और सबूत मौजूद हैं, जिन्हें धीरे-धीरे सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाई जाएगी।
“डरने वाले नहीं हैं”
उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद उन्होंने और उनकी पार्टी के लोगों ने तय किया है कि वे किसी से डरेंगे नहीं। उन्होंने प्रतीक के तौर पर अपने ऑफिस में एक अर्थी मंगवाई और सिर पर कफन बांधकर विरोध जताया। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। एक तरफ जहां सरकार अपने बचाव में बयान दे रही है, वहीं विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
“यह सिर्फ एक घटना नहीं, सिस्टम की नाकामी है”
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की विफलता को दिखाता है। अगर समय रहते सही कदम उठाए जाते, तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। उन्होंने अंत में कहा कि जनता अब सब समझ चुकी है और सच्चाई को जानती है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस मामले में न्याय जरूर मिलेगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।
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