Delhi Building Collapse: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास संकरी गली में लड़कों के पेइंग गेस्ट (पीजी) के रूप में इस्तेमाल की जा रही करीब 30 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि मलबे में फंसे करीब 15 से 20 लोगों को बाहर निकालने के लिए देर रात तक कई एजेंसियों का बचाव अभियान जारी रहा।
इमारत के भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था। पुलिस ने मामले में भवन मालिक हरिराम समेत अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या, भवन के रखरखाव में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा खतरे में डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने जताया गहरा दुख
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर हिंदी में संदेश जारी किया। उन्होंने दुर्घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली में इमारत गिरने की दुर्घटना से उन्हें बहुत दुख पहुंचा है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना की।
एम्स में 10 घायलों को लाया गया
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से जारी बयान के अनुसार, ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 घायल लोगों को लाया गया। इनमें चार लोगों को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया, जबकि गंभीर हालत में लाए गए एक अन्य व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
एम्स ने बताया कि तीन मरीज अभी भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। एक मरीज की सर्जरी की गई है, जबकि एक अन्य को मामूली चोटें आई थीं और निगरानी के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
भूतल पर मरम्मत के दौरान ढही इमारत
पुलिस के मुताबिक हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। जिस समय इमारत गिरी, उस वक्त उसके भूतल पर मरम्मत का काम चल रहा था। पुलिस ने आशंका जताई है कि निर्माण या मरम्मत संबंधी गतिविधियों की वजह से इमारत की संरचना प्रभावित हुई हो सकती है। मामले की जांच जारी है।
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण इमारत के बेसमेंट में पानी जमा हो गया था। उनका कहना है कि पानी के कारण नींव कमजोर हुई और संभवत: इसी वजह से इमारत ढह गई। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सिर्फ जी+1 की थी अनुमति, बनी थी जी+4 इमारत
एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, लड़कों के छात्रावास के रूप में इस्तेमाल हो रही यह इमारत करीब 30 साल पुरानी थी। यह पुनर्वास कॉलोनी में करीब 55 वर्ग गज के क्षेत्र में बनी थी।
अधिकारी के मुताबिक इमारत का निर्माण भूतल और चार मंजिल यानी जी+4 के रूप में किया गया था, जबकि इसके लिए पहले केवल भूतल और एक मंजिल यानी जी+1 की अनुमति दी गई थी। इस तथ्य ने भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों ने पीजी व्यवस्था पर उठाए सवाल
सत्य निकेतन का इलाका संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं और कई छात्रावास, पीजी तथा भोजनालय संचालित होते हैं। स्थानीय निवासियों ने इलाके में पुराने मकानों की स्थिति और उनके रखरखाव को लेकर चिंता जताई है।
लोगों का कहना है कि कई मकानों को पीजी में बदल दिया गया है और उनमें क्षमता से अधिक लोगों के रहने की स्थिति भी सामने आती रही है। उनका आरोप है कि कुछ मकान मालिक संपत्ति को पीजी के रूप में किराये पर देकर खुद इलाके से बाहर चले गए हैं और भवन की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते।
स्थानीय निवासी ने कहा कि इलाके में कई इमारतें पांच से छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं और बड़ी संख्या में मकानों को लड़कों के पीजी में बदल दिया गया है। उन्होंने भवनों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों के पालन की मांग की।
मलबे में फंसे लोगों को बचाने में जुटीं कई एजेंसियां
हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य के लिए दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, दिल्ली नगर निगम, नागरिक सुरक्षा और कैट की टीमें मौके पर पहुंचीं।
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दो टीमें भी बचाव अभियान में शामिल रहीं। इन टीमों में करीब 70 कर्मी और एक श्वान दस्ता शामिल था। एनडीआरएफ के अधिकारियों ने बताया कि मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर नीचे भेजे गए।
बचाव दल ने मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर उसमें फंसे लोगों की तलाश की। स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने भी राहतकर्मियों की मदद की। कई लोगों ने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों से मलबा हटाने में सहयोग किया।
हादसे से इलाके में मचा हड़कंप
सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में छात्र पीजी और छात्रावासों में रहते हैं। संकरी गलियों और घनी आबादी वाले इस इलाके में इमारत गिरने की घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई।
घटना के बाद राहत एवं बचाव एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबा हटाने का काम शुरू किया। हादसे ने दिल्ली में पुराने और बहुमंजिला भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
मोबाइल से मदद मांगते दिखे छात्र
हादसे के बाद मलबे में फंसे कुछ छात्रों की तस्वीरें भी सामने आईं। बताया गया कि कुछ छात्र अपने मोबाइल फोन के जरिए बाहर मौजूद लोगों से संपर्क कर मदद मांग रहे थे। इन दृश्यों ने हादसे की भयावहता को सामने ला दिया।
इलाके की संकरी गलियों के कारण बचाव अभियान में भी चुनौतियां आईं। एंबुलेंस और राहत वाहनों की आवाजाही सुचारू रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया।
अमित शाह ने ली स्थिति की जानकारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली पुलिस आयुक्त और एनडीआरएफ के महानिदेशक से हादसे के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें तेजी से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।
अमित शाह ने घायलों को हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की बात कही और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
मुख्यमंत्री ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा किया और बाद में एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर घायलों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया कि घटनास्थल के निरीक्षण और प्रारंभिक आकलन के बाद मुख्यमंत्री ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच और भवन मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि घायल छात्रों के परिवारों से संपर्क किया जा रहा है और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
पास की महिला पीजी इमारत सील
हादसे के बाद एमसीडी ने पास में स्थित एक अन्य इमारत की भी जांच की, जिसका इस्तेमाल महिला पीजी के तौर पर किया जा रहा था। अधिकारियों ने वहां रहने वाले किरायेदारों को बाहर निकालकर इमारत को सील कर दिया।
इस कार्रवाई के बाद इलाके में अन्य इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने घनी आबादी वाले क्षेत्र में पुराने और बहुमंजिला भवनों की व्यापक जांच कराने की मांग की है।
सिविक सेंटर के बाहर एबीवीपी का प्रदर्शन
हादसे के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े करीब 150 से 200 छात्र दिल्ली नगर निगम मुख्यालय सिविक सेंटर पहुंचे। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारी गेट नंबर पांच से परिसर में दाखिल हुए और मुख्य इमारत के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और भवन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही की मांग की।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों ने जबरन सिविक सेंटर की मुख्य इमारत में प्रवेश करने की कोशिश की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। पुलिस ने करीब 15 छात्रों को हिरासत में लिया और उन्हें कमला मार्केट थाने ले जाया गया, जहां दिल्ली पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई।
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण, पुराने भवनों की सुरक्षा, पीजी संचालन और भवनों के रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आखिर पांच मंजिला इमारत किन परिस्थितियों में गिरी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।


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