11 थानों तक फैली थी नॉर्थ-ईस्ट दंगों की आग, दोनों समुदाय के लोगों को हुआ भारी नुकसान

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Delhi Police : वसीम सैफी/ नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई और 580 से अधिक लोग घायल हुए। दंगाइयों का सामना करते हुए डटे 108 पुलिसकर्मी भी हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए थे। दंगों के दौरान हेड कांस्टेबल रतन लाल शहीद हो गए, जबकि तत्कालीन डीसीपी (शाहदरा) अमित शर्मा बेहद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हिंसा की आग किसी एक जगह तक सीमित नहीं थी, बल्कि नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के 11 थानों के क्षेत्रों में कॉलोनियों के अंदर तक फैली हुई थी। शिव विहार, मौजपुर, जाफराबाद, चांदबाग, गोकुलपुरी,…

Delhi Police : वसीम सैफी/ नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई और 580 से अधिक लोग घायल हुए। दंगाइयों का सामना करते हुए डटे 108 पुलिसकर्मी भी हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए थे। दंगों के दौरान हेड कांस्टेबल रतन लाल शहीद हो गए, जबकि तत्कालीन डीसीपी (शाहदरा) अमित शर्मा बेहद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। यह हिंसा की आग किसी एक जगह तक सीमित नहीं थी, बल्कि नॉर्थ-ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के 11 थानों के क्षेत्रों में कॉलोनियों के अंदर तक फैली हुई थी।

शिव विहार, मौजपुर, जाफराबाद, चांदबाग, गोकुलपुरी, भजनपुरा, खजूरी खास, करावल नगर, सोनिया विहार, दयालपुर और न्यू उस्मानपुर हिंसा के सबसे प्रभावित क्षेत्र थे।
दंगों के दौरान कई बस्तियां आग की लपटों में घिर गईं। घर, दुकानें, फैक्ट्रियां और गोदाम जलकर खाक हो गए। धार्मिक स्थलों तक को निशाना बनाया गया। दंगा प्रभावित इलाकों से सैकड़ों परिवारों को रातों-रात अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ी। दंगों के दौरान फ्रंट लाइन पर खड़े पुलिसकर्मियों ने पत्थरबाजी, आगजनी और हिंसक भीड़ के बीच लगातार लोगों की मदद की। भीड़ के बीच फंसे लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया। दंगों में दोनों समुदायों के परिवारों को गहरा नुकसान पहुंचाया।

खजूरी थाने में दर्ज हुईं सबसे अधिक एफआईआर

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 11 थानों में दंगों से जुड़े 758 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़ा 1984 सिख विरोधी दंगों से भी अधिक था। न्यू उस्मानपुर में 24, शास्त्री पार्क में 10, गोकुलपुरी में 118, दयालपुर में 76, ज्योति नगर में 35, खजूरी खास में 153, करावल नगर में 91, सोनिया विहार में 5, भजनपुरा में 137, वेलकम में 26 और जाफराबाद में 79 एफआईआर दर्ज की गई थीं। सबसे अधिक 153 मुकदमे खजूरी खास थाने में दर्ज किए गए, 137 एफआईआर भजनपुरा थाने में और 118 एफआईआर के साथ गोकुलपुरी थाना तीसरे नंबर पर था।

हर एक पीड़ित को न्याय के लिए लगाए कैंप

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि दंगों के बाद लोग पलायन करने लगे थे। इसके कुछ समय बाद ही कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन लग गया। मगर पुलिस हर एक पीड़ित को न्याय दिलाना चाहती थी। इसके लिए दंगा प्रभावित इलाकों में पुलिस कैंप लगाए गए। हर एक पीड़ित व्यक्ति की शिकायत ली गई और पुलिस ने हत्या, हत्या का प्रयास, दंगा, आगजनी, लूटपाट, आपराधिक साजिश, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा आर्म्स एक्ट आदि धाराओं में केस दर्ज किए।

आरोपियों को पकड़ने के लिए तकनीक का इस्तेमाल

पुलिस अधिकारी ने बताया कि केस दर्ज करने के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटनास्थलों से साक्ष्य एकत्र करना था, जोकि आगजनी और समय के साथ नष्ट हो चुके थे। मगर पुलिस ने हार नहीं मानी और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए तकनीक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया। पुलिस ने करीब ढाई सौ लोगों की पहचान सीसीटीवी फुटेज और 137 लोगों की पहचान एफआरएस कैमरों के माध्यम से की। इसके अलावा 94 लोगों को लाइसेंस की फोटो की मदद से पहचान के बाद गिरफ्तार किया गया।

आधिकारिक पुलिस सूत्रों की मानें तो नॉर्थ-ईस्ट दंगों से जुड़े मामलों में पुलिस 2,639 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। अधिकांश मामलों में चार्जशीट अदालतों में दाखिल की जा चुकी हैं। कई मामलों में आरोप तय हो चुके हैं और कुछ चर्चित मामलों में अदालतें दोषसिद्धि का फैसला भी सुना चुकी हैं। आईबी कर्मी अंकित शर्मा मर्डर केस में भी पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है।

 

 

Sumant Chaudhary