दिल्ली परिवहन निगम और शहीद भगत सिंह सेवा समिति ने शहीद दिवस पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर हनुमान जी की ज्योति प्रज्ज्वलित कर हवन किया गया। किरण चोपड़ा ने डीटीसी कर्मियों के योगदान की सराहना की और उनके बहादुरी के किस्सों को अखबार में छापने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में देशभक्ति की कविताओं और रागनी का आयोजन हुआ।
दिल्ली परिवहन निगम वजीरपुर डिपो व शहीद भगत सिंह सेवा समिति द्वारा शहीद दिवस पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर हनुमान जी की ज्योति प्रज्ज्वलित कर हवन किया गया। इस दौरान पंजाब केसरी की निदेशक व वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा ने कहा कि आज हमारे लिए गर्व की बात है कि डीटीसी के सभी ड्राइवर, कंडक्टर और भगत सिंह सेवा समिति के लोग मिलकर हमारे उन शहीदों को याद कर रहे हैं जिनका आज बलिदान दिवस है। मैं भी शहीदों के परिवार से हूं, मेरे दादा ससुर और ससुर जी वे देश की आजादी के लिए लड़े और 16 साल जेल में रहे। वह देश की एकता के लिए शहीद हो गए। वही मेरा मायका भी शहीदों के परिवार से ही है। स्वतंत्रता की लड़ाई में भारत के तीन सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हंसकर फांसी के फंदे को गले लगाया था।
यह वही दिन था जब भगत सिंह के साथ सुखदेव और राजगुरु ने भी भारत की आजादी के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया था। महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानियों में से एक भगत सिंह 23 साल की उम्र में शहीद हो गए, उनके इस जज्बे को देखते हुए कई लोगों ने क्रांतिकारी मार्ग को अपनाया। भगत सिंह ने मां भारती की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऐसे महान परिवार को हम हमेशा याद करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि डीटीसी के ड्राइवर और कंडक्टर हैं उनका हमारे जीवन में बहुत बड़ा रोल है, क्योंकि वह लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं, किरण चोपड़ा ने डीटीसी कर्मियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ड्राइवर और कंडक्टरों जो भी बहादुरी का अच्छा काम करें वह हमें बताएं हम उनके बहादुरी के किस्से को अखबार में फोटो के साथ छापेंगे।
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता भी जमीन से जुड़ी हुई हैं, अगर आपको कोई समस्या आएगी तो वह भी आपकी सुनेंगी। वही देशभक्ति की कविताओं के लिए प्रसिद्ध रोनी रमन ने भावुक लहजे में देशभक्ति पर कविता सुनाई तो उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गई।
वही कवयित्री सुरेखा अग्रवाल व जसवंत द्वारा रागनी के द्वारा शहीदों की गाथा गाई गई व साथ ही विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में सुमित शौकीन, सतीश कादयान,सुमित दहिया, भारत दहिया, विरेन्द्र दहिया, यशवीर मलिक, अनिल दहिया, रविन्द्र डबास, बीवीजी आरएम अमित कौशिक व परमजीत लाकड़ा व अन्य सम्मानित लोग कार्यक्रम में उपस्थित थे।


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