आज पूरा देश ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिलाओं को मिलने वाला ऐतिहासिक 33% आरक्षण की चर्चा हो रही है तो इसके बीच आज समाज के सामने एक चुभता हुआ सवाल है: उन लोगों का क्या, जो हर दिन खुलेआम ‘नारी’ की गरिमा की हत्या कर रहे हैं और समाज में अश्लीलता का ज़हर घोल रहे हैं? बहन-बेटियों की सुरक्षा के लिए अब समाज को जागृत होना ही होगा।’अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ (Freedom of Expression) की पूर्ण ढाल के पीछे छिपकर हमारे घरों में एक भयानक सांस्कृतिक आक्रमण हो चुका है। बादशाह से लेकर नोरा फतेही तक, ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और म्यूजिक वीडियो हमारे युवाओं को अश्लीलता, नग्नता और गंदगी ‘न्यू नॉर्मल’ (नई सामान्य बात) के रूप में परोस रहे हैं। भोग-विलास का यह जहर हमारे समाज को पूरी तरह तबाह कर देगा। बेहद शर्म की बात है कि चंद ‘चीप व्यूज’ (सस्ते दृश्यों) और लाइक्स के लिए नारी की गरिमा का सरेआम सौदा किया जा रहा है। आइए, अब यह दिखावा करना बंद करें कि इंटरनेट पर ‘बैन’ (प्रतिबंध) काम करते हैं। जब तक सरकार किसी आपत्तिजनक वीडियो को ब्लॉक करती है, तब तक वह जंगल की आग की तरह फैल चुका होता है जिससे लाखों युवाओं के दिमाग को अपूरणीय क्षति हो चुकी होती है। सरकार ‘उल्लू’ (Ullu) जैसे ऐप पर प्रतिबंध लगाती है और बदले में वे क्या करते हैं? वे खुलेआम हमारे सिस्टम का मजाक उड़ाते हुए ‘अतरंगी’ (Atrangi) जैसे मिरर ऐप्स को प्रमोट करने के लिए Ullu का इंस्टाग्राम पेज का इस्तेमाल करते हैं! हवस की आग फैलाकर अपनी जेबें भरने वाले इन राक्षसों का अब सर्वनाश करना ही होगा। यह महज ‘कंटेंट क्रिएशन’ नहीं है। यह हमारे पवित्र पारिवारिक मूल्यों को नष्ट करने की एक सुनियोजित साजिश है।
हमें यह स्वीकार करना होगा कि यह डिजिटल कचरा समाज में एक ‘बलात्कारी मानसिकता’ (rapist mentality) को बढ़ावा दे रहा है। अश्लीलता का यह प्रहार इतना घातक है कि इसके प्रभाव में संत जैसे लोग भी शैतान बन जाते हैं। युवाओं का मन, शरीर और आत्मा (mind, body, soul) सब कुछ तबाह हो जाता है। ये डिजिटल अपराधी इतने निडर क्यों हैं? क्योंकि हमारी वर्तमान कानूनी व्यवस्था उन्हें एक अघोषित गारंटी देती है: “नो जेल, सिक्योर्ड बेल” (जेल नहीं, सुरक्षित जमानत)! भारत को अब नारी की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ अत्यंत सख्त कानून चाहिए। इन अपराधियों के दिलों में कानून का खौफ पैदा करने का समय आ गया है। आज पूरे देश की यह पुरजोर मांग है कि वे शून्य काल (Zero Hour) के दौरान नारी सुरक्षा के इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे को उठाएं और संसद भवन में इन तीन गैर-समझौतावादी (non-negotiable) मांगों के लिए हुंकार भरें:
1. कानून का दायरा और सख्ती बढ़ाएं : ‘स्त्री अशिष्ट रूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986’ (Indecent Representation of Women Act) का तत्काल विस्तार किया जाए। इसमें ओटीटी, सोशल मीडिया और डीपफेक (Deepfakes) को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए। डिजिटल माध्यमों पर नारी के अश्लील चित्रण को 10 साल की सजा के साथ एक सख्त और गैर-जमानती अपराध बनाया जाए।
2. जीरो मोनेटाइजेशन (Zero Monetization) लागू करें: अश्लीलता परोसने वालों पर सबसे बड़ा आर्थिक प्रहार होना चाहिए। अश्लीलता और नग्नता से कमाए गए एक-एक रुपये को ‘अपराध की आय’ (Proceeds of Crime) मानकर तुरंत जब्त किया जाए। जब कमाई शून्य होगी तो गंदगी अपने आप बंद हो जाएगी।
3. ‘भारत डिजिटल परिषद’ (Digital Council of Bharat) का गठन: एक शक्तिशाली राष्ट्रीय डिजिटल परिषद का गठन हो, जिसके पास किसी भी आपत्तिजनक सामग्री को मात्र 3 घंटे के भीतर हटाने (3-hour takedown) का अधिकार हो और आदेश की अवहेलना पर प्लेटफॉर्म्स पर कमरतोड़ जुर्माना लगाया जाए।
मान-मर्यादा और सुशीलता की प्रतिष्ठा केवल शील, संस्कृति और सदाचार के मूल्यों के पालन से ही होगी। हम उस महान सभ्यता के वंशज हैं, जिसने एक नारी की गरिमा की रक्षा के लिए पूरी की पूरी लंका जलाकर राख कर दी थी। आज फिर उसी शौर्य और संकल्प की आवश्यकता है। यह ‘मिशन स्वच्छ साइबर भारत’ का एक नया शंखनाद है।
– एडवोकेट अभय शाह


Download Android App
Download iOS App



