भारतीय सेना विश्व के सभी देशों में आज चौथे नम्बर की शक्तिशाली फौज है जिसके तीनों जल, थल और नभ संभागों में 10 लाख से अधिक सैनिक सेवारत हैं। परन्तु इस सेना को सदैव चुस्त और युवा बनाये रखने की गरज से चार वर्ष पहले एेसी अग्निवीर योजना शुरू की गई थी जिसमें केवल चार वर्ष के लिए ही सैनिकों की भर्ती की जाती थी। इसमें 25 प्रतिशत सैनिकों को स्थायी सेवा में रख लिया जाता था और शेष 75 प्रतिशत को रिटायर कर दिया जाता था। इस स्कीम की तब राजनैतिक व सामाजिक स्तर पर भी भारी आलोचना हुई थी और कहा गया था कि केवल चार वर्ष तक सेना में रख कर सरकार इन युवकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और सेना के शक्ति–सामर्थ्य के साथ भी समझौता कर रही है और सैनिकों को भी ठेके पर रख रही है। कहीं दबे स्तर पर सेना के भीतर भी इस स्कीम को फौज की बेहतरी के रूप में नहीं लिया गया था। देश के विपक्षी दलों ने तो 2024 के लोकसभा चुनावों में जनता से वादा किया था कि अगर वे सत्तारूढ़ हुए तो अग्निवीर योजना को रद्द कर दिया जायेगा और सेना में पूर्व की भांति स्थायी भर्ती शुरू होगी जिससे रिटायर होने वाले फौजियों को पेंशन आदि की सभी पूर्व सैनिक सुविधाओं से लैस किया जा सके। मगर अग्निवीरों की प्रथम चार वर्षीय खेप पूरी होने से कुछ पहले ही केन्द्र की मोदी सरकार ने फैसला किया है कि अब चार वर्ष की प्रशिक्षण अवधि को बढ़ाकर छह वर्ष कर दिया जायेगा और इसके बाद सभी प्रशिक्षुओं के लिए यह विकल्प खुला होगा कि वे सेना में स्थायी सेवा करने का सपना पूरा कर सकें बशर्ते वे उसकी निर्धारित शर्तों पर पूरा उतरते हों।
भारत में सेना की योग्यता तय करने में सरकार का कोई हाथ नहीं होता है और यह कार्य फौज के अधिकारी ही उच्च स्तर पर तय करते हैं। अग्निवीर स्कीम के बारे में बीच-बीच में इस तरह की खबरें भी आयी थीं कि भारतीय नौसेना 25 प्रतिशत प्रशिक्षुओं के स्थान पर 75 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को अपनी जरूरतों को देखते हुए खपाना चाहती है और वायुसेना 50 प्रतिशत प्रशिक्षुओं को। जबकि सेना में कुल एक लाख 80 हजार सैनिकों की कमी आंकी गई थी। इसकी वजह यह रही कि कोरोना के दो वर्ष के दौरान फौज में भर्ती बन्द रही और जब 2022 में यह खुली तो अग्निवीर स्कीम चालू हो गई। सरकार के ताजा फैसले से अब सभी प्रकार की आशंकाओं पर पानी फिर गया है जिसका सबसे बड़ा लाभ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के युवकों को होगा। क्योंकि देश में बेरोजगारी के आलम को देखते हुए कस्बों और गांवों के शिक्षित युवकों में सेना में भर्ती होने का विकल्प खुला रहता था बशर्ते उनकी शारीरिक क्षमता सेना के मानकों के अनुरूप हो। इसके लिए ये युवक अथक प्रयास भी करते थे। इसके साथ ही भारत में सेना की नौकरी करने की पारिवारिक परंपरा भी रही है और समाज में कुछ जातियों के युवा सेना की नौकरी करने में गौरव का अनुभव करते हैं। इन सभी में राष्ट्र प्रेम की भावना भी कूट–कूट कर भरी होती है। अग्निवीर स्कीम से ये सभी भावनाएं कहीं न कहीं आहत हो रही थीं। अतः सरकार ने चार साल पूरा करके 75 प्रतिशत बचे प्रशिक्षुओं के लिए दो साल की अवधि बढ़ा दी है और उनके लिए इसके बाद सेना में स्थायी सेवा का विकल्प खुला रखा है।
फिलहाल सेना के तीनों अंगों में तीन लाख के लगभग अग्निवीर प्रशिक्षण युक्त हैं। इनमें से 19 हजार अग्निवीर थल सेना में अपना चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करके स्थायी सेवा में चले जायेंगे जबकि जल सेना में 2500 सैनिक स्थायी रूप से भर्ती हो जायेंगे और वायुसेना में 2900 प्रशिक्षु। इस प्रकार देखा जाये तो तीन लाख में से शेष 75 प्रतिशत का प्रशिक्षण दो वर्ष और आगे बढ़ जायेगा जिसके बाद उनके पास स्थायी सेवा में जाने का विकल्प खुला रहेगा। मगर वर्तमान सन्दर्भों में यह भी देखने की जरूरत है कि सेना में टैक्नोलोजी का प्रयोग निरन्तर बढ़ रहा है और यह लगातार अद्यतन होती जा रही है जिसे देखते हुए चार वर्ष के अल्प कार्यकाल को सैनिकों की क्षमता से नहीं पाटा जा सकता था। इसके लिए सैनिकों को सतत प्रशिक्षण की जरूरत रहती है। लेकिन दूसरी तरफ पहले 75 प्रतिशत रिटायर होने वाले अग्निवीरों के लिए विभिन्न अर्ध सैनिक बलों व पुलिस बलों में आरक्षण की बात की जा रही थी। नई संरचित स्कीम में अब इसकी कोई आवश्यकता नहीं रहेगी। इस बारे में रक्षामन्त्री राजनाथ सिंह ने जो विचार व्यक्त किये हैं वे भी गौर करने लायक हैं। उन्होंने कहा है कि संशोधित अग्निवीर स्कीम से सेना में संरचनात्मक सुधारों को बल मिलेगा और हमारी सेना अधिकाधिक युवा रह कर टैक्नोलोजी के क्षेत्र में आधुनिकीकृत होती जायेगी जिससे भारत भविष्य की चुनौतियों का वीरता के साथ सामना करने में सक्षम होगा। इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत ने अग्निवीर योजना को संशोधित करके एक तरफ देश की युवा शक्ति का मनोबल बढ़ाया है तो वहीं दूसरी ओर सेनाओं की जरूरतों को भी पूरा करने का प्रयास किया है।
अग्निवीर स्कीम में संशोधन
Summary :
भारतीय सेना विश्व के सभी देशों में आज चौथे नम्बर की शक्तिशाली फौज है जिसके तीनों जल, थल और नभ संभागों में 10 लाख से अधिक सैनिक सेवारत हैं। परन्तु इस सेना को सदैव चुस्त और युवा बनाये रखने की गरज से चार वर्ष पहले एेसी अग्निवीर योजना शुरू की गई थी जिसमें केवल चार वर्ष के लिए ही सैनिकों की भर्ती की जाती थी। इसमें 25 प्रतिशत सैनिकों को स्थायी सेवा में रख लिया जाता था और शेष 75 प्रतिशत को रिटायर कर दिया जाता था। इस स्कीम की तब राजनैतिक व सामाजिक स्तर पर भी भारी आलोचना हुई…


Download Android App
Download iOS App



