मनोरंजन मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल समय बिताने का साधन नहीं है बल्कि मन को हल्का करने, तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा देने का माध्यम भी है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मनोरंजन का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। आज के समय में फिल्मों, गीतों, सोशल मीडिया, कॉमेडी कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर ऐसी सामग्री बढ़ती जा रही है जिसे कई लोग मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता के रूप में देखते हैं। यह केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के संस्कारों से जुड़ा एक गंभीर प्रश्न भी है। कुछ क्रिएटर यह सोचते हों कि हमें तो केवल लोकप्रियता और पैसा मिल रहा है, लेकिन उन्हें यह भी समझना चाहिए कि वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं और उसके प्रभाव से पूरी तरह अलग नहीं रह सकते। जब मनोरंजन अपनी मर्यादा खोने लगे और उसमें अशोभनीय भाषा, द्विअर्थी संवाद या अनुचित दृश्य शामिल होने लगें, तब यह केवल मनोरंजन नहीं रह जाता बल्कि समाज के सामने एक सांस्कृतिक चुनौती बन जाता है।
इस विषय पर गंभीरता से विचार करना इसलिए भी आवश्यक है क्योंकि मनोरंजन का प्रभाव समाज के हर वर्ग पर पड़ता है, विशेष रूप से बच्चों और युवाओं पर। सोशल मीडिया ने सिर्फ समाज और भाषा की मर्यादा को ही तार-तार नहीं किया है, बल्कि इसने समाज के नैतिक मूल्यों को भी चोट पहुंचाई है। ये अनियंत्रित सोशल मीडिया मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता को बढ़ावा दे रहा है। इसमें सिर्फ ट्रोल्स ही शामिल नहीं हैं, इसमें वो स्टैंड-अप कॉमेडियन भी शामिल हैं जो अश्लीलता को कॉमेडी का रूप देकर प्रजेंट कर रहे हैं। गुरुग्राम में हुए स्टैंड-अप कॉमेडी शो में ‘370 की बिरयानी’ वाले विवाद पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर होस्ट प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा पर कानूनी डंडा चलाया है। बता दें कि प्रणीत मोरे का शो तो कॉमेडी और ‘एंटरटेनमेंट’ का था लेकिन अफसोस आजकल के कॉमेडियन कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता परोसते नजर आते हैं। एंटरटेनमेंट के नाम पर औरतों के सम्मान को सरेआम नीलाम करते हैं। हिमांशु जांगड़ा ने ‘370 की बिरयानी’ के बदले शारीरिक संबंध की मांग जैसी बेहद आपत्तिजनक बात कही। पर उससे भी ज्यादा शर्मनाक था होस्ट प्रणीत मोरे का रिएक्शन रोकने की बजाय शाबाशी दी, और ऊपर से 5000 रुपये का इनाम भी थमा दिया। नये विवाद के केंद्र में एक मेडिकल छात्रा सेजल पवार हैं। वह मुंबई में एमबीबीएस थर्ड ईयर की छात्रा हैं। लगभग तीन महीने पुराने शो में होस्ट प्रणीत मोरे क्राउड वर्क के दौरान सेजल से बात करते हैं। वह उनसे एनाटॉमी और पोस्टमार्टम पर सवाल कर रहे थे।
सेजल बता रही हैं कि शवों की मेडिकल जांच कैसे होती है। इस बीच वह कहती हैं कि डॉक्टर कई बार मृत पुरुषों के जननांगों को लेकर मज़ाक करते हैं। जब वह यह बात कर रही थीं तब भी प्रणीत ने उन्हें रोका नहीं, बल्कि हंसते हुए उकसाते रहे। यह वीडियो क्लिप तब वारयल नहीं हुई, बल्कि हिमांशु प्रकरण के बाद तेज़ी से फैली।
सोशल मीडिया पर सेजल पवार की इस टिप्पणी को लेते हुए यूज़र सवाल करने लगे कि वह तो मेडिकल प्रोफ़ेशन से हैं। जब वह शवों तक का सम्मान नहीं करेंगी तो मरीज़ों के साथ कैसा व्यवहार करती होंगी। यहां तक कि कई यूज़र उन्हें मेडिकल कॉलेज से निकालने तक की मांग तक कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर बात हो रही है कि मेडिकल छात्रों के अध्य्यन के लिए शरीर दान करने वाले मृतकों तक की गरिमा का ध्यान नहीं रखा जा रहा। इस बीच, मुंबई के केईएम अस्पताल, जहां सेजल पढ़ रही हैं, उसका प्रशासन भी हरकत में आ गया। अस्पताल की ही दो सदस्यीय कमेटी वीडियो क्लिप की समीक्षा कर रही है और सेजल को छुट्टी पर भेज दिया गया है। स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणीत मोरे, उनके शो में शामिल हिमांशु जांगड़ा, डॉ. सेजल पवार और अन्य के खिलाफ महाराष्ट्र की साइबर पुलिस ने केस दर्ज किया है। इन सभी पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए अश्लील, आपत्तिजनक कंटेंट पब्लिश और शेयर करने का आरोप है। वहीं इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(1), 75(3), 294, 353(2) लगाई गई है। साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 67 भी लगाई गई है। चीन के फेमस फिलोसफर कन्फ्यूशियस ने कहा है कि जिस समाज में मनोरंजन का लेवल गिर जाता है वहां कला बेकार हो जाती है और लोग अपनी मर्यादा खो देते हैं। प्रणीत मोरे जैसे लोग अपने अपराध को स्टैंड-अप कॉमेडी और मनोरंजन का नाम देते हैं। इसे कला बताते हैं लेकिन ये कला नहीं है, ये फूहड़ता है। ये उनकी सोच, समझ और गलत विचार का प्रमाण है।
दोषी सिर्फ ये नहीं हैं..दोषी इन्हें सुनने वाले भी हैं। फरवरी 2025 में समय रैना के शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ में रणवीर अल्लाहबादिया ने एक कंटेस्टेंट से माता-पिता और उनके निजी जीवन को लेकर बेहद आपत्तिजनक और अश्लील सवाल पूछ लिया था। शो में अपूर्वा मखीजा भी थीं। इस भद्दे मज़ाक को बढ़ावा देने के कारण लोग भड़क गए थे। अश्लीलता फैलाने के आरोप में असम (गुवाहाटी) और दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई थी और शो के उस एपिसोड को यूट्यूब से हटाना पड़ा था। सिर्फ यही नहीं, इन इंफ्लुएंसर्स के हाथ से कई ब्रैंड डील्स भी छिन गई थीं। बदलते समय के साथ समाज को कुछ विषयों पर खुलकर और जिम्मेदारी के साथ चर्चा करनी होगी। विशेष रूप से युवाओं को सही दिशा देने के लिए जीवन मूल्यों, रिश्तों, जिम्मेदारियों और यौन शिक्षा जैसे विषयों पर संतुलित और वैज्ञानिक संवाद आवश्यक है। यदि समाज इन विषयों पर मौन रहेगा तो युवा जानकारी के लिए ऐसे स्रोतों की ओर जाएंगे जो हमेशा सही दिशा नहीं देते। यदि हम उन्हें संवेदनशीलता, सम्मान, संस्कार और मानवीय मूल्यों का महत्व सिखाएंगे तो समाज भी उसी दिशा में आगे बढ़ेगा। आज आवश्यकता किसी एक व्यक्ति, कलाकार या युवा को दोष देने की नहीं है। आवश्यकता है आत्ममंथन की। हमें यह विचार करना होगा कि हम अपने परिवारों, समाज और आने वाली पीढ़ियों को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। हास्य होना चाहिए, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी होनी चाहिए, लेकिन साथ ही मानवीय गरिमा, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी भी बनी रहनी चाहिए। यही संतुलन किसी भी सभ्य समाज की पहचान है।
‘370 की बिरयानी’..हास्य है या ‘मानसिक गंदगी’
Summary :
मनोरंजन मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल समय बिताने का साधन नहीं है बल्कि मन को हल्का करने, तनाव कम करने और सकारात्मक ऊर्जा देने का माध्यम भी है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मनोरंजन का स्वरूप तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। आज के समय में फिल्मों, गीतों, सोशल मीडिया, कॉमेडी कार्यक्रमों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर ऐसी सामग्री बढ़ती जा रही है जिसे कई लोग मनोरंजन के नाम पर अश्लीलता के रूप में देखते हैं। यह केवल व्यक्तिगत पसंद का विषय नहीं है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी के संस्कारों से जुड़ा एक…


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