भाजपा में किसको नया रोल मिलेगा?

Summary :

‘बदला जाएगा इस कारवां का अंदाज़ सारा पहले हाथी था आगे अब लाया जाएगा घोड़ा’ नेपथ्य के चुप सियासी सन्नाटों ने अपने-अपने चेहरे पहनने शुरू कर दिए हैं, सूत्र बताते हैं कि बहुत जल्द मोदी मंत्रिमंडल को एक नया चेहरा-मोहरा मिलने जा रहा है और केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव आने वाले 28 अगस्त से पहले देखने को मिल सकता है, क्योंकि 28 तारीख ही सावन महीने का आखिरी दिन है उसके बाद भाद्रपद माह शुरू हो जाता है जिसे कोई नया कार्य आरंभ करने के लिए उतना शुभ नहीं माना जाता है। भादों के बाद 15 दिनों का श्राद्ध पक्ष…

‘बदला जाएगा इस कारवां का अंदाज़ सारा
पहले हाथी था आगे अब लाया जाएगा घोड़ा’
नेपथ्य के चुप सियासी सन्नाटों ने अपने-अपने चेहरे पहनने शुरू कर दिए हैं, सूत्र बताते हैं कि बहुत जल्द मोदी मंत्रिमंडल को एक नया चेहरा-मोहरा मिलने जा रहा है और केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव आने वाले 28 अगस्त से पहले देखने को मिल सकता है, क्योंकि 28 तारीख ही सावन महीने का आखिरी दिन है उसके बाद भाद्रपद माह शुरू हो जाता है जिसे कोई नया कार्य आरंभ करने के लिए उतना शुभ नहीं माना जाता है। भादों के बाद 15 दिनों का श्राद्ध पक्ष शुरू हो जाता है, आमतौर पर इस काल अवधि में भी कोई शुभ कार्य नहीं होता यानी अगर सावन चूके तो फिर नवरात्रि तक का इंतजार करना पड़ सकता है। कहते हैं यह आने वाला फेरबदल मोदी मंत्रिमंडल का एक बड़ा फेरबदल हो सकता है। जिसमें कई दिग्गज मंत्रियों की छुट्टी तय है, 30-35 नए और अपेक्षाकृत युवा नेताओं को मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है। जंतर-मंतर पर हुए उस ऐतिहासिक ‘जेन ज़ी’ आंदोलन ने भाजपा कर्णधारों को भी अपनी दशा-दिशा बदलने पर मजबूर कर दिया है।
कहते हैं बड़े नेताओं की राय है कि ’उनके नए मंत्रिमंडल की औसत आयु 50-52 के बीच रहे।’ यानी इसके लिए थाैक भाव में युवा चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह देनी होगी और जमे जमाए पुराने धुरंधरों को बाहर का रास्ता दिखाना होगा। सूत्र यह भी बताते हैं कि दो बड़े मंत्रियों की छुट्टी करके उन्हें राष्ट्रपति तथा यूपी के राज्यपाल बनाने की तैयारी है। भाजपा वैसे भी यूपी को आनंदी बेन पटेल की जगह एक नया राज्यपाल देना चाहती है, 84 वर्षीया आनंदी बेन पटेल पिछले सात वर्षों से यानी 2019 से ही लखनऊ के लोकभवन में लगातार विराजमान हैं, हालिया दिनों में उनकी मुख्यमंत्री योगी के साथ खींचतान भी देखने को मिली है, इस कथित तकरार के बाद से ही आनंदी बेन पटेल पिछले 10 दिनों से छुट्टी पर हैं, वे अपने गृह राज्य गुजरात और दमन-दीव के दौरे पर हैं। वैसे तो यूपी के नए राज्यपाल के तौर पर बिहार के दिग्गज भाजपा नेता अश्विनी चौबे और राजस्थान के खांटी भगवा नेता घनश्याम तिवाड़ी के भी नाम चल रहे हैं, तिवाड़ी फिलवक्त राजस्थान से ही राज्यसभा सांसद भी हैं।
और किन दिग्गजों पर गिर सकती है गाज? : केंद्रीय मंत्रिमंडल को एक नया व युवा चेहरा मोहरा देने की कवायद में मोदी मंत्रिमंडल से कई और दिग्गज मंत्रियों की भी छुट्टी हो सकती है। इन नामों में 74 वर्षीय हरदीप पुरी, 73 वर्षीय गिरिराज सिंह, 71 वर्षीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर जैसों के नाम हो सकते हैं। मोदी सरकार के उद्योग व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को नितिन नबीन की नई टीम में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई है, पर वे अभी मात्र 62 साल के ही हैं, सो यह माना जा रहा है कि वे पार्टी कोषाध्यक्ष रहते हुए भी सरकार में मंत्रिपद का दायित्व निभाते रहेंगे। वहीं हर्ष मल्होत्रा जिन्हें पार्टी ने दिल्ली भाजपा का नया अध्यक्ष तथा पंकज चौधरी जिन्हें यूपी भाजपा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, इन दोनों मंत्रियों को मंत्रिपद छोड़ना पड़ सकता है। जॉर्ज कूरियन व रवनीत बिट्टू जैसे मंत्रियों की जगह पहले से खाली है। इस बार के मोदी मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दलों को भी अच्छा प्रतिनिधित्व मिल सकता है। सूत्र बताते हैं कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के सांसद पुत्र श्रीकांत शिंदे को कोई अहम मंत्रालय मिल सकता है, जदयू कोटे से एक और मंत्री बनाए जाने की बारी है, इस पर संजय झा का दावा सबसे मजबूत है। तृणमूल कोटे से अलग हुए 20 सांसदों के ग्रुप में किसी दो को मंत्री बनाया जा सकता है, इस लिस्ट में काकोली घाेष दस्तीदार का नाम आगे चल रहा है, वहीं तृणमूल की तेजतर्रार सांसद सायोनी घोष को भाजपा अपना राष्ट्रीय प्रवक्ता बना सकती है।
कहते हैं पिछले दिनों जब अपने पिता शरद पवार के साथ सुप्रिया सूले से एक बड़े नेता ने सुप्रिया से कह दिया कि ‘क्या आजीवन तुम्हारा सांसद बने रहने का ही इरादा है या कभी मंत्री भी बनोगी।’ इस पर सुप्रिया से कोई जवाब देते नहीं बना, चतुर सुजान शरद पवार सियासी हवा का रुख देखकर ही अपनी बेटी को कैबिनेट में मंत्री बनवाने का जोखिम उठाएंगे।
क्या स्मृति को मिलेगी राज्यसभा? : ब्रांड न्यू ‘टीम नबीन‘ बन कर तैयार है, सबसे खास बात तो यह कि इस नई टीम में वैसे 51 चेहरे शामिल हैं जो पुरानी टीम का हिस्सा ही नहीं थे। सूत्र बताते हैं कि कुछ नेता-नेत्रीगण उनकी नई टीम का हिस्सा बनकर भी खुश नहीं है। मिसाल के तौर पर राजस्थान की दिग्गज भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे सिंधिया जिन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर राजस्थान की गुटबाजी राजनीति से निकाल कर दिल्ली लाने की कवायद हुई है, पर वसुंधरा का दिल अभी भी जयपुर में ही रमता है, दूसरा वह संगठन में खुद शामिल होने के बजाए अपने पुत्र दुष्यंत सिंह को मोदी कैबिनेट में मंत्री बनवाने की ज्यादा इच्छुक थीं पर लगता है भाजपा के एक बड़े नेता ने उनके मनोभावों पर पानी फेर दिया है।
वैसे ही स्मृति ईरानी व सतीश पूनिया ये दोनों नेता केंद्र में मंत्रिपद के लिए ज्यादा लालायित थे, अब स्मृति को पार्टी महासचिव बनाकर इन्हें यूपी में सक्रिय रहने को कहा गया है, साथ ही उनसे यह भी कहा गया है कि ‘2029 का चुनाव उन्हें फिर से अमेठी से लड़ना है। पर स्मृति की दिक्कत है कि योगी को कभी उनकी उपस्थिति रास नहीं आती, सो यूपी में इस नेत्री के लिए काम करना किंचित इतना आसान नहीं होगा। कहते हैं भाजपा नेता ने स्मृति को विश्वास दिलाया है कि ‘नवंबर में यूपी से राज्यसभा की 10 सीटें खाली होने वाली हैं, जिनमें से 9 सीटें भाजपा के पास आएंगी तो इनमें से दो सीटें स्मृति व नवनियुक्त एक और महासचिव हरीश द्विवेदी के लिए सुरक्षित रख दी जाएंगी।’ यूं भी द्विवेदी यूपी के बस्ती के रहने वाले हैं। वैसे तो नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को भी अपने लिए एक अदद राज्यसभा सीट की दरकार है, पर भगवा हाईकमान की ओर से उन्हें कोई ठोस आश्वासन प्राप्त नहीं हुआ है। टीम नबीन के एक और महासचिव संजय भाटिया को मनोहर लाल खट्टर लेकर आए हैं, कहते हैं इनको हरियाणा से राज्यसभा दिलवाने में खट्टर की ही एक अहम भूमिका थी, भाटिया हरियाणा भाजपा के महासचिव रह चुके हैं, इस नाते भी उनकी पदोन्नति बहुत खास है, क्योंकि इन्होंने अपनी करनाल संसदीय सीट 2024 में मनोहर लाल खट्टर के लिए खाली कर दी थी। बहुत चर्चा थी कि धर्मेंद्र प्रधान को भी टीम नबीन में कोई महती भूमिका मिलेगी, उन्हें राष्ट्रीय महासचिव बनाकर यूपी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, पर यहां विनोद तावड़े बाजी मार गए।
कहते हैं अब प्रधान इस बात के लिए प्रयासरत हैं कि उन्हें मांझी की जगह ओडिशा का मुख्यमंत्री बना दिया जाए, पर फिलवक्त भाजपा नेता इस बात के लिए तैयार नहीं दिखता।
अब भाजपा संसदीय बोर्ड में होगा बदलाव : भाजपा की सर्वोच्च निर्णायक इकाई संसदीय बोर्ड को नया चेहरा मोहरा देने की कवायद जारी है। वैसे तो भाजपा संविधान के मुताबिक संसदीय बोर्ड में अध्यक्ष को मिलाकर इसके अधिकतम 11 सदस्य ही हो सकते हैं, पर विडंबना देखिए कि मौजूदा बोर्ड में अभी 12 सदस्य हैं। पीएम इसके पदेन सदस्य होते हैं।
वर्तमान में इसके सदस्यों पर नज़र दौड़ाई जाए तो मौजूदा बोर्ड के सदस्य हैं पीएम मोदी, नितिन नबीन, अमित शाह, राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा, बीएस येदुरप्पा, सर्वानंद सोनोवाल, डॉ. के. लक्ष्मण, डॉ. इकबाल सिंह लालपुर, सत्यनारायण जटिया और सुधा यादव। बीएल संतोष इस बोर्ड के सचिव हैं। बोर्ड को नया चेहरा मोहरा देने के मकसद से येदुरप्पा, सोनोवाल, लक्ष्मण, लालपुर, जटिया, सुधा यादव समेत कई सदस्यों की छुट्टी मुमकिन है। पार्टी की मान्य परंपराओं के मुताबिक भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्षों को भी इसमें जगह मिलती है, पर नितिन गडकरी इसके अपवाद रहे हैं। भाजपा के एक सफल अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें यह सौभाग्य हासिल नहीं है। पहले इसमें कुछ मुख्यमंत्रियों को भी जगह मिलती रही है जैसे शिवराज सिंह चौहान, फड़णवीस आदि।
इस दफे भी बोर्ड में शामिल होने के लिए कम से कम तीन भगवा मुख्यमंत्रियों के दावे सबसे ज्यादा मजबूत है मसलन योगी आदित्यनाथ, देवेंद्र फड़णवीस और हिमंता बिस्वा सरमा, अगर बोर्ड से सोनोवाल की रुखसती होती है तो नार्थ ईस्ट कोटे से सरमा का दावा मजबूत है।

त्रिदीब रमण