महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय नगर पालिका व नगर पंचायत चुनावों में राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा नीत महायुति गठबन्धन को जिस प्रकार की अपार सफलता मिली है उससे यह सिद्ध हो गया है कि विपक्षी गठबन्धन महाविकास अघाड़ी की पैठ अब राज्य के शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक में खत्म होती जा रही है। इसमें भी सबसे खास बात यह है कि राज्य के लोगों ने इस प्रदेश की दो क्षेत्रीय पार्टियों शिवसेना व राष्ट्रवादी कांग्रेस के मूल पार्टी से अलग हुए धड़ों को ही अपना समर्थन देने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई है परन्तु सबसे ऊपर जो तथ्य उभर कर आया है वह यह है कि केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के लिए अब महाराष्ट्र उत्तर भारत के बिहार व उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों जैसा होता जा रहा है और यह पार्टी शहरों से निकल कर गांवों तक में अपना मजबूत जनाधार बनाती जा रही है।
विगत 2 व 20 दिसम्बर को राज्य की कुल 288 पालिकाओं में दो चरणों में चुनाव हुए थे जिनके परिणाम 21 दिसम्बर को आये। इन पालिकाओं में 246 नगर परिषदें थीं व 42 नगर पंचायतें थीं। इन 288 पालिकाओं में से 207 पर महायुति गठबन्धन की विजय हुई जबकि विपक्षी महाविकास अघाड़ी के हिस्से में केवल 44 पालिकाएं ही आईं। इनमें भी भाजपा को सर्वाधिक 117 पालिकाओं में विजय मिली। ये चुनाव राज्य के अर्धशहरी इलाकों में ही थे अतः इनमें ग्रामीण मतदाताओं की भी खासी हिस्सेदारी थी। महाराष्ट्र में भाजपा को इस प्रकार की विजय पिछले एक दशक से ही मिलनी शुरू हुई है और यह राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनी है।
महत्वपूर्ण यह है कि राज्य में भाजपा ने अपनी घुसपैठ क्षेत्रीय पार्टी शिवसेना के साथ गठबन्धन करके ही प्रारम्भिक तौर पर बनाई और इसने इस पार्टी के कन्धों पर बैठकर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश करना शुरू किया परन्तु जब से केन्द्र में मोदी सरकार गठित हुई है और इसने राष्ट्रीय स्तर पर गरीबों के जनकल्याण की योजनाएं चलाई हैं तब से पार्टी को गांवों के इलाकों में भी लोकप्रियता मिलनी शुरू हुई और इसने पारंपरिक रूप से कांग्रेस के मजबूत ग्रामीण जनाधार को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। 2014 से पहले तक कांग्रेस पार्टी प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बहुत मजबूत मानी जाती थी और यह अपने से ही अलग हुई पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में आने पर कामयाब हो जाया करती थी जबकि इसके विरुद्ध भाजपा शिवसेना के साथ गठबन्धन करके कांग्रेस को मजबूत जवाब दिया करती थी परन्तु अब यह स्थिति बदल चुकी है और भाजपा संयुक्त कांग्रेस का स्थान लेती जा रही है। एक तरफ जहां भाजपा को 117 स्थानों पर सफलता मिली है वहीं दूसरी तरफ इन चुनावों में कांग्रेस को केवल 28 स्थानों पर ही विजय मिल पाई है।
इससे यही सिद्ध होता है कि राज्य में कांग्रेस अब अपने अस्ताचल की तरफ अग्रसित हो रही है। यह तथ्य वास्तव में कांग्रेस के लिए गंभीर चिन्ता का विषय हो सकता है क्योंकि महाराष्ट्र राज्य 90 के दशक तक इस पार्टी के लिए सुरक्षित किला समझा जाता था जबकि इससे पहले तक यह राज्य कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग कहा जाता था लेकिन श्री मोदी के सत्ता में आने के बाद राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में गुणात्मक परिवर्तन आना शुरू हुआ जिसका नतीजा यह हुआ कि यह पार्टी अब शहरों से निकलकर गांवों की ओर बढ़ चली है और राज्य के विदर्भ इलाके तक में इसने कांग्रेस के दुर्ग को ढहा दिया है। इस क्षेत्र में 100 पालिकाएं हैं जिनमें से 51 पर भाजपा को विजय मिली और कांग्रेस 21 पर ही सफल हो पाई। कांग्रेस की कुल 28 में से 21 सीटें इसी इलाके से आई हैं अतः स्पष्ट है कि राज्य के मराठवाड़ा व अन्य इलाकों में इस पार्टी का ग्राफ बहुत तेजी के साथ नीचे जा रहा है।
राज्य में पिछले वर्ष नवम्बर महीने में विधानसभा चुनाव हुए थे जिनमें सत्तारूढ़ महायुति को प्रचंड जीत हासिल हुई थी। मगर इससे पहले मार्च महीने में हुए लोकसभा चुनावों में विपक्षी महाअघाड़ी को अच्छी सफलता मिली थी। जिसे देखते हुए विपक्षी गठबन्धन ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग की मदद से वोटों में हेराफेरी की गई है परन्तु वर्तमान पालिका चुनावों में इस प्रकार के आरोप नहीं लगाये गये और ये चुनाव सर्वत्र शान्तिपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुए जिससे यह साफ हो गया कि लोगों में वोटों की हेराफेरी करने के आरोप का कोई असर नहीं है और उन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग अपनी इच्छानुसार ही किया है। इसके साथ ही जब 2017 में पिछले स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे तो उनमें भाजपा को 96 स्थानों पर सफलता मिली थी जबकि इस बार उसे 117 स्थान मिले हैं और राज्य के अपेक्षाकृत पिछड़े समझे जाने वाले इलाके विदर्भ में भी अच्छी जीत मिली है। राज्य के मुख्यमन्त्री फडणवीज भी इसी इलाके से आते हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि विपक्षी गठबन्धन महाविकास अघाड़ी में शामिल शिवसेना (उद्धव ठाकरे) व राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार) को इन चुनावों में क्रमशः नौ व सात सीटें ही मिली हैं। जो कि इसकी कुल 44 सीटों का हिस्सा है जबकि 37 स्थान ऐसे हैं जिन पर अन्य दलों व निर्दलीयों को सफलता मिली है। इस प्रकार महाविकास अघाड़ी अन्य के समकक्ष आकर खड़ी हो गई है। महाविकास अघाड़ी में शामिल ये दोनों क्षेत्रीय पार्टियां मूल पार्टी समझी जाती हैं अतः राज्य की जनता ने इनके विपरीत भाजपा नीत महायुति में शामिल शिव सेना (एकनाथ शिन्दे) व राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार) को तरजीह दी है जिन्हें भाजपा के बाद क्रमशः 53 व 37 सीटें मिली हैं। इससे साफ है कि महाराष्ट्र का राजनीतिक पटल अब पूरी तरह बदलने की तरफ है जिसमें भाजपा की अग्रणी भूमिका है।


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