चीन ने फिर बढ़ाई चिंता

Summary :

स्कूल में पढ़ते वक्त एक शिक्षक के कहने पर LEO-T.L ST.Y की लिखी एक कहानी पढ़ी थी, जिसका वास्तविक नाम तो मुझे याद नहीं रहा परन्तु उसकी कथा यह थी कि एक लालची व्यक्ति को किसी देश का राजा यह हुक्म देता है

स्कूल में पढ़ते वक्त एक शिक्षक के कहने पर LEO-T.L ST.Y की लिखी एक कहानी पढ़ी थी, जिसका वास्तविक नाम तो मुझे याद नहीं रहा परन्तु उसकी कथा यह थी कि एक लालची व्यक्ति को किसी देश का राजा यह हुक्म देता है कि ‘‘मैं देख रहा हूं तुम्हारी हवस दूसरों की जमीन हथियाने की बढ़ती ही चली जा रही है, मुझे तुम पर तरस आता है। मैं तुम्हें एक अवसर देता हूं। तुम यहां से दौड़ लगाओ और सूर्य अस्त होने तक जितनी जमीन को अपने पांवों तले रौंद कर तुम वापिस आ जाओगे, वह जमीन तुम्हारी हो जाएगी।’’
लालची व्यक्ति दौड़ता रहा। बेतहाशा दौड़ता रहा, सुबह से दोपहर हो जाती, वह दौड़ता ही चला जाता है। सूर्य ढलने को हो जाता है, अस्त होते समय सूर्य अपनी लालिमा बिखरेता है परन्तु वह आदमी यह नहीं सोचता कि उसे वापिस भी जाना है। अंततः दौड़ता-दौड़ता व्यक्ति कालकवलित हो जाता है और उसे मिलती है साढ़े तीन हाथ जमीन। यह एक ऐसा सच है कि जिसे आप शाश्वत कह सकते हैं और सनातन सच भी कह सकते हैं। बहादुर शाह जफर भी हिन्दुस्तान का बादशाह था परन्तु उसे तो अपने मुल्क में साढ़े तीन हाथ की जमीन भी नसीब नहीं हुई। उन्हें रंगून में कैद कर दिया गया जहां से अपने मुल्क के प्रति उनका दर्द इन शब्दों में ​प्रकट हुआ।
‘‘उम्रे दराज मांग के लाए थे चार दिन
दो आरजू में कट गए, दो इंतजार में
कितना बदनसीब जफर, दफन के लिए
दो गज जमीं भी नहीं मिली, कुए-यार में।’’
काश उपरोक्त रूसी कथा और जफर के उद्गार हम चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य चीन नेताओं को भेज कर यह पूछ पाते-कितनी जमीन तुम्हें चाहिए? तुम्हें तो साढ़े तीन हाथ भी ज्यादा ही होंगे। फिर यह बदहवासी क्यों? क्या तुम स्वर्णिम अतीत भूल गए?
जब मैं रोज-रोज चीन के नापाक इरादों से संबंधित मीडिया रिपोर्ट देखता हूं तो लगता है कि भारत द्वारा चीन से मधुर संबंधों के लिए ​​किए गए सभी हमारे प्रयास विफल हो चुके हैं। अगर नहीं तो फिर चीन का ऐसा नजरिया क्यों है?
1959 में दलाई लामा को तो भारत ने करुणावश शरण दी थी। उसी वर्ष सबसे पहले चीन ने बड़ी बेशर्मी और हठधर्मिता का सबूत देते हुए लद्दाख की 38 हजार किलोमीटर और अरुणाचल की 90 हजार किलोमीटर जमीन पर अपना दावा ठोक दिया। सीमा विवाद पर बातचीत होती रही। लद्दाख के मौजूदा तनाव पर दोनों देशों में आज भी बातचीत हुई। चीन का घुसपैठ करना उसकी विस्तारवादी नीति का हिस्सा है। हाल ही में उसके सै​निक उत्तराखंड में ​घुस आए थे और फिर कुछ समय बाद लौट गए थे। अरुणाचल में भी उसके सौ सैनिक भारतीय सीमा के भीतर घुस आए थे जिसे भारतीय सैनिकों ने खदेड़ दिया था। भारतीय सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा है कि चीन जिस तरह से पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में सेना की तैनाती कर रहा है, वह चिंता का विषय है। उसने सर्दियों के दौरान भी अपनी तैनाती बनाए रखने के लिए ढांचा तैयार कर लिया है। इसका अर्थ यही है कि वह एलएसी पर स्थाई रूप से बैठे रहकर भारत पर दबाव बनाए रखना चाहता है। सेना प्रमुख ने साफ कर दिया है कि अगर चीन ऐसा करता है तो भारतीय सेना भी अपनी मौजूदगी बनाए रखेगी। अगर चीन की सेनाएं बार्डर वाले इलाकों में लम्बे समय तक ठहरने वाली हैं तो भारत को भी अपनी निगाह बनाए रखनी होगी। पूर्वी लद्दाख में चीन देपसांग इलाके में अपनी पकड़ मजबूत बना रहा है। न केवल सड़कें चौड़ी कर रहा है बल्कि पुरानी सड़कों की मुरम्मत भी कर रहा है। दरअसल तियानवेंडियन राजमार्ग अक्साई चिन में पीएलए के तियानवेंडियन आल सीजन पोस्ट को देपसांग से जाेड़ता है, यह सामरिक रूप से चीन का बड़ा कदम है। यह पोस्ट डीबीओ से मुश्किल से 24 किलोमीटर स्थित है। चीन-भारत की सीमा से लगे शिनजियांग और तिब्बत के सुदूर क्षेत्रों में चीन सैनिकों की आवाजाही को अासान बनाने के लिए 30 हवाई अड्डे बना रहा है। अगर यह सोचा जाए यह सब सीमा विवाद के कारण हो रहा है तो यह एक जबरदस्त भूल होगी। चीन अब साम्यवादी देश नहीं बल्कि वह असल में पूंजीवादी देश हो चुका है। वह लाभदायक निवेश, दुनिया के बाजारों को कब्जाने और सस्ते माल की प्राप्ति चाहता है। वह अपना माल बेचना चाहता है। चीन आज हिटलर की तरह व्यवहार कर रहा है। 
जिस तरह हिटलर का साम्राज्यवाद विस्तार और आक्रामक साम्राज्यवाद था, चीन का व्यवहार भी उसी तरह का है। जबकि ब्रिटेन और फ्रांस का साम्राज्यवाद रक्षात्मक था। यह भी सर्वविदित है की चीनियों में कोई व्यावहारिक नैतिकता नहीं। यह सोचते रहना कि भारत और चीन के संबंधों में कोई सुधार होगा यह एक मृगतृष्णा ही है। चीन दुष्ट भेड़िये के समान है और सभी देशों को एकजुट होकर इसका सामना करना होगा। मैं नहीं जानता की आने वाले कल का स्वरूप क्या होगा लेकिन चीन की चुनौती से निपटने के लिए हमें हर पल तैयार रहना होगा। 
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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