राम का नाम बदनाम न करो

Summary :

अयोध्या के नवनिर्मित श्री राम मन्दिर में चढ़ावे की कथित चोरी या घपले की खबर नितान्त पीड़ादायक है क्योंकि भगवान श्री राम से भारत व विश्व के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था व श्रद्धा जुड़ी हुई है। श्री राम का मर्यादित आदर्श मनुष्य चरित्र भारतीयों के लिए अनुकरणीय इस तरह रहा है कि हर घर में रामायण का होना निश्चित होना माना जाता है और किसी भी विवाह में इसकी प्रति भेंट करना सबसे अमूल्य उपहार होती है। इसलिए स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी जनजीवन में व्याप्त राम के प्रति अगाध सम्मान को संज्ञान में लेते हुए…

अयोध्या के नवनिर्मित श्री राम मन्दिर में चढ़ावे की कथित चोरी या घपले की खबर नितान्त पीड़ादायक है क्योंकि भगवान श्री राम से भारत व विश्व के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था व श्रद्धा जुड़ी हुई है। श्री राम का मर्यादित आदर्श मनुष्य चरित्र भारतीयों के लिए अनुकरणीय इस तरह रहा है कि हर घर में रामायण का होना निश्चित होना माना जाता है और किसी भी विवाह में इसकी प्रति भेंट करना सबसे अमूल्य उपहार होती है। इसलिए स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी जनजीवन में व्याप्त राम के प्रति अगाध सम्मान को संज्ञान में लेते हुए रामराज्य की परिकल्पना का चित्रण स्वतन्त्र भारत के लिए किया और
रघुपति राघव राजा राम
पतित पावन सीताराम
को भारतीयों की सहिष्णुता व एकता का परिचायक बना दिया। इसका प्रमुख कारण यह था कि गांधी जानते थे कि स्वतन्त्रता आन्दोलन से आम जनता को जोड़ने के लिए उसके आदर्श प्रतीक ही पूरे समाज में नव ऊर्जा का संवाहन कर सकते हैं। अतः श्री राम भारत की उस आत्मा में समाये हुए हैं जिसे भारतीयता भी कहते हैं। इसलिए उनके मन्दिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ावे में यदि हेर-फेर की सूचना आती है तो इससे समूचे भारत की सांस्कृतिक पहचान पर गहरी चोट पहुंचती है। हालांकि महात्मा गांधी की कुछ क्षेत्रों में इस बात को लेकर आलोचना भी हुई कि उन्होंने हिन्दू प्रतीकों को ही क्यों चुना मगर गांधी ने इसका उत्तर सर्वदा रामराज्य परिकल्पना से ही दिया परन्तु स्वतन्त्र भारत में जिस तरह अयोध्या में 80 व 90 के दशक में राम मन्दिर निर्माण आन्दोलन चला उसने भारतीय राजनीति को ही आमूल-चूल रूप से बदल कर रख दिया और इस आन्दोलन ने राष्ट्रीय आकार ले लिया जिसमें हिन्दू समाज के सभी वर्गों के लोगों ने अपनी आहुती दी और यह नारा बुलन्द किया कि ‘मन्दिर वहीं बनायेंगे, जहां राम का जन्म हुआ था’। तब हमने देखा कि अयोध्या में राम जन्म स्थान पर 16वीं सदी में खड़ी की गई बाबरी मस्जिद किस तरह ढहा दी गई और बाद में इसका मुकदमा स्थानीय न्यायालय से होते हुए सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा और वहां से विवादित स्थान हिन्दू समुदाय को मन्दिर निर्माण के लिए दिया गया।
लगभग पांच सौ साल के लम्बे संघर्ष के बाद भारत के हिन्दुओं को अयोध्या का वह स्थल मिला जिसे वे मानते थे कि वहीं पर भगवान श्री राम का जन्म हुआ था। इस संघर्ष में सैकड़ों लोग शहीद भी हुए मगर उनकी आस्था नहीं डिगी और वे मानते रहे कि भारत में मुस्लिम आक्रान्ताओं ने उस दौर में भारत पर अपना दबदबा कायम करने के लिए हिन्दू धर्म के आस्था केन्द्रों की पहचान बदली और उनका इस्लामीकरण किया। बाबरी मस्जिद को तब आन्दोलनकारी नेताओं ने गुलामी का प्रतीक बताया और उससे आजादी पाने का अभियान शुरू किया, तब जाकर अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण एक ट्रस्ट गठित करके किया गया। मन्दिर निर्माण के बाद ट्रस्ट का पुनर्गठन हुआ और इसकी देखरेख का जिम्मा इसे सौंप दिया गया, जिसमें श्री राम पर चढ़ने वाले चढ़ावे का हिसाब-किताब रखने के लिए अलग से प्रभाग था। मगर मन्दिर प्रबन्धन की तरफ से इसमें ढीलढाल बरती गई जिसकी वजह से चढ़ावे की धनराशि व कीमती वस्तुओं की चोरी किये जाने का कथित मामला प्रकाश में आया है।
वास्तव में यदि एेसा हुआ है तो यह एेसा कुकृत्य है जिसे किसी भी स्तर पर क्षमा नहीं किया जा सकता क्योंकि मन्दिर में एक गरीब मजदूर भी अपने खून-पसीने की कमाई में से ही कुछ अंश का दान करता है। इसलिए चढ़ावे में चोरी होने की घटना पूरे भारत और इसकी संस्कृति का घोर निरादर है जिसके लिए दोषी किसी भी रूप में बख्शे नहीं जाने चाहिए परन्तु प्रसन्नता की बात यह है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने इस खबर के बाहर आते ही तुरत-फुरत विशेष जांच दल का गठन कर दिया और उसे अपनी अन्तिम रिपोर्ट देने के लिए केवल 15 दिन का समय दिया। योगी आदित्यनाथ स्वयं गोरखपुर के गोरख मठ के पीठाधीश्वर हैं और जानते हैं कि हिन्दुओं में अपने आराध्य देवों व इष्ट देवों के प्रति श्रद्धा व सम्मान का कितना उच्च स्तर होता है। अतः यह तीन सदस्यीय जांच दल युद्ध स्तर पर अपना काम कर रहा है। इसने शुरू के पांच दिनों में जांच करके एक प्रारम्भिक अन्तरिम रिपोर्ट भी तैयार कर ली है जिसे वह आज सोमवार को राज्य सरकार को सौंप देगा। इसके साथ ही योगी आदित्यनाथ ने इस जांच दल का दायरा भी बढ़ा दिया है और ट्रस्ट द्वारा किये गये भूमि खरीद सौदों को भी इसकी परिधि में ला दिया है जिससे आरोपों की हर कोण से जांच हो सके। इसके साथ ही उन्होंने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास चढ़ावा चोरी किये जाने के मुतल्लिक किसी प्रकार के सबूत हैं तो वह उसे जांच दल को सौंप सकता है। चढ़ावा चढ़ाने वालों से भी ब्यौरा देने का आग्रह किया गया है।
मन्दिर के लिए जिन ठेकेदारों ने समय-समय पर विभिन्न माल उपलब्ध कराया है उनसे भी जांच दल पूछताछ कर रहा है। अतः शक के हर दायरे की गहन जांच-पड़ताल का काम चल रहा है। जांच दल मन्दिर प्रबन्धन व ट्रस्ट के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को आमने-सामने बैठा कर उनसे तीखे सवाल-जवाब कर रहा है। मगर दूसरा पहलू यह भी है कि इस मुद्दे पर राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है क्योंकि पूरा मामला श्रीराम के प्रति आस्था से जुड़ा हुआ है अतः जांच का स्तर भी इतना ऊंचा होना चाहिए कि किसी भी राजनीतिक दल का कोई भी नेता उस पर सन्देह न कर सके। बेशक चढ़ावा चोरी करने वालों ने राम का नाम बदनाम किया है और भारतीय संस्कृति को कलंकित करने का कृत्य किया है। अतः इसकी सजा भी अनुकरणीय होनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी व्यक्ति एेसा कार्य करने की हिम्मत न कर सके।

Aditya Chopra

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