स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करने का गौरव हासिल करेंगी। वैसे तो महिलाओं, हर गृहिणी को घर का वित्तमंत्री कहा जाता है, क्योंकि वे घर का बजट अच्छी तरह बनाती हैं, रसोई से लेकर पारिवारिक समारोहों, शादी-विवाह के मौकों पर वे वित्त प्रबंधन बेहतरीन ढंग से कर लेती हैं और अपने लिए कुछ बचा भी लेती हैं। इस प्रबंधकीय कौशल को देखते हुए ही उन्हें ‘वित्तमंत्री’ की पदवी दी जाती है। निर्मला सीतारमण का वित्तमंत्री होना न केवल महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है, बल्कि यह भी प्रदर्शित होता है कि वर्तमान में महिलाएं पुरुष वर्चस्व वाले क्षेत्रों में भी निपुण हो चुकी हैं। आज महिलाएं नए-नए स्टार्टअप शुरू कर रही हैं। शेयर मार्किट में डील करती हैं। महिलाएं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से लेकर निजी कम्पनियों तक की सीईओ हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्ण कालिक महिला वित्तमंत्री हैं। उन्होंने 2019 में पीएम मोदी के नेतृत्व में वित्तमंत्री का कार्यभार संभाला था और इसके बाद जब मोदी सरकार 3-0 में भी उन्हें वित्तमंत्री ही चुना गया तो यह उनकी बड़ी उपलब्धि है कि वे लगातार हर साल बजट पेश करती हैं। उनकी इसी निरंतरता के चलते उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाया है, वरना इससे पहले किसी भी वित्तमंत्री ने लगातार 9 बार बजट पेश नहीं किया। हालांकि मोरारजी देशाई 1959 और 1969 के बीच 10 बार बजट पेश कर चुके हैं लेकिन वे लगातर नहीं थे। इसी कड़ी में चिदंबरम भी हैं जो 9 बजट पेश कर चुके हैं परंतु वो भी अलग-अलग समय में थे और लगातार नहीं थे। लिहाजा मैडम सीतारमण बधाई की पात्र हैं। वह एक सादगी लेकिन आकर्षक व्यक्तित्व वाली महिला हैं जो भारतीय आदर्श स्थापित करती हैं। वह चुनौतियों का सामना करना जानती हैं इसीलिए पीएम मोदी ने उन पर भरोसा जताया है। यह बात अलग है कि वह देश की रक्षामंत्री भी रह चुकी हैं और इस दौरान उन्होंने सेना के आधुनिकीकरण और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ सीमावर्ती सुरक्षा को हमेशा मजबूती प्रदान करने पर खुद को फोकस रखा। उनके विचार सादे होते हुए भी उच्च हैं। सामाजिक कल्याण योजनाओं को वह राजनीति में अहम स्थान देती हैं। इसके साथ-साथ कर सुधार और डिजिटल भुगतान एवं बुनियादी ढांचे का उन्हें अच्छा ज्ञान है। मुझे याद है जब 2019 में कोविड का दौर चल रहा था तो इस कठिन समय में उन्होंने न केवल अर्थव्यवस्था को संभाला, बल्कि मेडिकल क्षेत्र में जो राहत पैकेज प्रदान किए थे वह भारत को अलग पहचान दिलाने में सफल रहे। महिला वर्ग इसीलिए उनका सम्मान करता है। उन्होंने जो जिम्मेवारी और प्रयोग कोविड के दौरान किए वह सचमुच देश के लिए एक गौरव का पल था।
आमतौर पर मेरी तरह करोड़ों बहनें होंगी जिन्होंने घर में ‘‘वित्तमंत्री’’ की भूमिका निभाई है। घर के खर्चे और हिसाब किताब को ऐसे तरीके से सैट रखना कि कोई खर्च फालतू न हो और सब कुछ सुनियोजित भी रहे, यही वित्त प्रबंधन का काम है। देश की इस जानी-मानी महिला राजनेता अर्थशास्त्री जिन्होंने अपनी पढ़ाई अलग-अलग शहरों में की लेकिन जो किया वह सब कुछ टॉप लेवल पर ही किया। वह तमिल ब्राह्मण परिवार से आती हैं। उनके पिता रेलवे में थे लेकिन अनुशासन उन्हें बचपन से ही मिल गया था। बाद में उन्होंने इक्नोमिक्स, अर्थशास्त्र में एमए किया और इतना ही नहीं दिल्ली के जेएनयू में अर्थशास्त्र से खुद को जोड़े रखा। आर्थिक मामलों की संपूर्ण समझ उनमें थी इसीलिए वह किसी भी पंक्ति में आगे रहने की बजाए पीछे रहकर एक विशलेषक के रूप में शोध करती रहीं और अपना काम करती रहीं। उन्होंने कभी किसी से अपनी तुलना नहीं की, बस अपने काम के दम पर, अपनी ईमानदारी के दम पर अपनी लाइन बड़ी करने की कोशिश की।
उम्मीद की जानी चाहिए कि वह आज जो ऐतिहासिक बजट पेश करने जा रही हैं वह आत्मनिर्भर भारत और 2047 के विकसित भारत का एक मजबूत संकल्प होगा। एक महिला होने के नाते और अर्थशास्त्री होने के साथ-साथ उन्होंने महिला प्रमोशन की कई स्कीमें देश को दी हैं, तो इसलिए हमारी उम्मीदें मैडम निर्मला जी से थोड़ी ज्यादा ही हैं। आपको इस नई उपलब्धि के लिए बहुत-बहुत बधाई हो मैडम जी और भारतीय अंकगणित की अगर बात की जाए तो यह 9 नंबर ही है जो सबसे बड़ा रहता है और आप 9वीं बार देश के लिए इतिहास रच रही हैं। आपको बहुत-बहुत बधाई।















