धर्मशाला नहीं है भारत

Summary :

राजनीति राष्ट्र के लिए होती है न कि राष्ट्र राजनीति के लिए। राजनीति जब परमार्थ के लिए हो तो राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाती है। जब राजनीति स्वार्थों के लिए होने लगती है तो वह राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने लगती है। यह भारत की विडम्बना ही रही कि सत्ता लोभी राजनीतिज्ञों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते इस राष्ट्र को धर्मशाला बना दिया। कौन नहीं जानता कि बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ के कारण पूर्वोत्तर के सभी राज्यों, पश्चिम बंगाल और ​​बिहार में जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा हुआ। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाजपुर आदि कुछ…

राजनीति राष्ट्र के लिए होती है न कि राष्ट्र राजनीति के लिए। राजनीति जब परमार्थ के लिए हो तो राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाती है। जब राजनीति स्वार्थों के लिए होने लगती है तो वह राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए खतरा पैदा करने लगती है। यह भारत की विडम्बना ही रही कि सत्ता लोभी राजनीतिज्ञों ने वोट बैंक की राजनीति के चलते इस राष्ट्र को धर्मशाला बना दिया। कौन नहीं जानता कि बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ के कारण पूर्वोत्तर के सभी राज्यों, पश्चिम बंगाल और ​​बिहार में जनसांख्यिकीय असंतुलन पैदा हुआ। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, उत्तरी दिनाजपुर आदि कुछ जिले मुस्लिम बहुल हो गए। असम की स्थिति अत्यंत विस्फोटक बनी। अवैध घुसपैठ के कारण ही पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, सहरसा में भी यही स्थिति है। घुसपैठिये जनप्रतिनिधियों के भाग्य विधाता कैैसे बने यह बात अब कोई रहस्य नहीं रही।
भारत में एनएच-44 की लम्बाई श्रीनगर से कन्याकुमारी तक 4110 किलोमीटर है। करीब इतना लम्बा भारत-बांग्लादेश का 4096 किलोमीटर लम्बा बॉर्डर है। यह सीमा जंगल, पहाड़ और नदियों के बीच से गुजरती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2003 तक लगभग 4 करोड़ अवैध बंगलादेशी घुसपैठिये भारत में रह रहे हैं, जिन्होंने राशनकार्ड और अन्य भारतीय पहचान पत्र हासिल किए हुए हैं। देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुम्बई में इनकी संख्या लाखों में है, जो आए दिन न केवल राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के लिए अपितु राष्ट्र के सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बन चुके हैं। अवैध बांग्लादेशियों के अलावा म्यांमार से रोहिंग्या शरणार्थी भी भारत के कई शहरों में अपना डेरा जमाए हुए हैं। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में अवैध घुसपैठियों का मुद्दा मुख्य चुनावी मुद्दा बना था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेन्दु अधिकारी और अन्य भाजपा नेताओं ने चुनावी रैलियों में ऐलान किया था कि पश्चिम बंगाल में एक-एक घुसपैठिये की पहचान कर उन्हें वापिस भेजा जाएगा।
पिछले वर्ष 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए चेतावनी दी थी कि अवैध घुसपैठिये हमारे युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं। आदिवासियों की जमीन कब्जा रहे हैं और हमारी बेटियों को ​निशाना बना रहे हैं। प्रधानमंत्री का यह बयान भावनात्मक नहीं बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए गम्भीर संकेत था। जनसांख्यिकीय संरचना बदल जाने से स्थानीय समुदायों में यह भावना बढ़ रही है कि घुसपैठिये सरकारी योजनाओं और राजनीतिक संरक्षण का लाभ उठा रहे हैं। इससे जातीय, अस्मिता, भाषा और भूमि को लेकर तनाव बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने अवैध घुसपैठियों को बाहर का रास्ता दिखाने के अपने एजैंडे पर अमल करना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार ने ​निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे अवैध बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य प्रवासियों के लिए सभी 23 जिलों में हिरासत केन्द्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। पहला हिरासत केन्द्र मालदा में स्थापित कर दिया गया है। मुर्शिदाबाद और बीरभूम में भी हिरासत केन्द्र स्थापित करने की तैयारी हो चुकी है। गृहमंत्रालय के दिशा-निर्देशों की अवहेलना करते हुए पूर्ववर्ती ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पीएमसी सरकार ने यह प्रक्रिया एक साल से रोक रखी थी।
सरकार के आधिकारिक निर्देश के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 के बाद भारत में घुसे अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या अप्रवासियों की पहचान होने पर उन्हें निर्वासन तक होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा। जिलाधिकारियों को तत्काल ऐसे केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु ने ‘बंग भवन’ में मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के विपरीत, वर्तमान भाजपा सरकार घुसपैठियों को कोई शरण, आर्थिक मदद, आवास, स्वास्थ्य सुविधा या कानूनी सहायता नहीं देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में अवैध अप्रवासन पर केंद्रीय कानूनों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय की 2 मई 2025 की अधिसूचना के आधार पर जारी किया गया है। सुधार गृहों से रिहा विदेशी नागरिकों को भी आगे की कार्रवाई तक होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा। दोषी पाए गए घुसपैठियों को सीधे बीएसएफ के हवाले कर दिया जाएगा। बीएसएफ बाद में इनकी निर्वासन प्रक्रिया पूरी करेगा।
कई घुसपैठिये राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में​ लिप्त पाए गए हैं। कट्टरपंथी आतंकी संगठनों से भी इनके तार जुड़े हुए हैं। देश में कई हिंसक वारदातों में इनकी संलिप्तता पाई गई है। दिल्ली, गोरखपुर और कई अन्य जगह हुए बम धमाकों में बंगलादेशी घुसपैठियों का सीधा हाथ होने के सबूत मिल चुके हैं। अब जबकि शुभेन्दु अधिकारी सरकार ने एक्शन शुरू कर दिया है तो राज्य में आवर्जन नागरिकता और मानवाधिकारों को लेकर तीखी राजनीतिक बहस शुरू होने की आशंका है। विपक्षी दलों ने पहले ही इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। शुभेन्दु सरकार को अवैध घुसपैठियों के निर्वासन के मामलों को बहुत ही सतर्कता से निपटना होगा, ताकि कोई निर्दोष इसका शिकार न बन जाए। एक मामले में दिल्ली से पकड़े गए एक मजूर को अवैध बांग्लादेशी बताकर उसके परिवार को बांग्लादेश भेज दिया गया था। बाद में यह मामला पूरी तरह से उलट गया और अब उस परिवार को वापिस बुलाया जा रहा है। राज्य सरकार को हिरासत केन्द्रों में सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा, ताकि लोग अवैध रूप से प्रवेश करने या संदेह में गिरफ्तार किए गए हैं उनके मानवाधिकारों पर कोई चोट न पहुंचे। अगर वे अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं तो उन्हें वापिस भेजा जाना ही उचित कदम है।

Aditya Chopra

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