भारत-अमीरात के सम्बन्ध

Summary :

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद बिन सुल्तान अल-नाह्यान का भारत यात्रा पर आने पर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार स्वयं हवाई अड्डे पर पहुंच कर उनकी अगवानी की उसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत दोनों देशों के बीच के आपसी सम्बन्धों को कितनी महत्ता और वरीयता देता है। संयुक्त अरब अमीरात वह मुस्लिम राष्ट्र है जिसके साथ भारत के सम्बन्ध इसके अस्तित्व में आने के बाद से ही बहुत मधुर और प्रगाढ़ रहे हैं और यह देश भी भारत की पश्चिम एशिया व क्षेत्रीय मामलों में भूमिका को बहुत महत्व देता…

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद बिन सुल्तान अल-नाह्यान का भारत यात्रा पर आने पर प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार स्वयं हवाई अड्डे पर पहुंच कर उनकी अगवानी की उसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत दोनों देशों के बीच के आपसी सम्बन्धों को कितनी महत्ता और वरीयता देता है। संयुक्त अरब अमीरात वह मुस्लिम राष्ट्र है जिसके साथ भारत के सम्बन्ध इसके अस्तित्व में आने के बाद से ही बहुत मधुर और प्रगाढ़ रहे हैं और यह देश भी भारत की पश्चिम एशिया व क्षेत्रीय मामलों में भूमिका को बहुत महत्व देता है। शेख साहब की हालांकि यह बहुत संक्षिप्त केवल चार घंटे की ही नई दिल्ली यात्रा थी मगर इसका अन्तर्राष्ट्रीय महत्व वैश्विक सन्दर्भों में बहुत महत्वपूर्ण था। खासकर भारतीय उपमहाद्वीप में पिछले दिनों से सऊदी अरब व पाकिस्तान के बीच जिस प्रकार रक्षा के क्षेत्र से लेकर अन्य मामलों में सम्बन्ध गहरे हुए हैं उन्हें देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात के भारत के साथ सम्बन्धों की अलग महत्ता देखी जा रही है। इसके साथ ही पिछले दिनों से सऊदी अरब व अमीरात के सम्बन्धों में एक अन्य अरब राष्ट्र यमन को लेकर तल्खी बनी है लेकिन भारत इनके निरपेक्ष रहकर संयुक्त अरब अमीरात के साथ अपने सम्बन्धों की समीक्षा करता है और आपसी सम्बन्धों में किसी तीसरे देश की भूमिका को नकारता है।
हमें दोनों देशों के सम्बन्धों की समीक्षा बदलते विश्व परिदृश्य के मध्य भी करनी होगी क्योंकि पश्चिम एशिया में गाजा संघर्ष को लेकर जिस प्रकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने क्षेत्रीय शान्ति बोर्ड में भारत को आमन्त्रित किया है उसके काफी गहरे मायने देखे जा रहे हैं। भारत का आधिकारिक रुख फिलिस्तीन की स्वतन्त्रता का रहा है मगर इजराइल के साथ भी उसके अच्छे सम्बन्ध हैं अतः पश्चिम एशिया में शान्ति के लिए आवश्यक है कि गाजा मामले में सन्तुलित व्यवहार किया जाये। इसके साथ ही भारत पश्चिम एशिया में संयुक्त अरब अमीरात के बढ़ते प्रभाव व भूमिका को भी नजरअन्दाज नहीं कर सकता है अतः क्षेत्रीय विकास के लिए अमीरात के साथ सम्बन्धों की प्रगाढ़ता भी आवश्यक है। अमीरात एेसा देश है जो अपने चहुंमुखी विकास के लिए विश्व के विभिन्न स्रोतों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाता है। इस दृष्टि से इस देश में जो भारतीय विकास कार्यों में हाथ बंटाने वहां जाते हैं उनके हितों को भी देखना भारत की सरकार का कर्त्तव्य है। अतः इस मुस्लिम राष्ट्र में हिन्दू मन्दिर का पिछले वर्षों में बनना बताता है कि अमीरात की सरकार अपने यहां बसे भारतीयों की कितनी कद्र
करती है।
भारत की केवल चार घंटे की यात्रा पर आये शेख साहब के साथ भारत ने रक्षा क्षेत्र से लेकर व्यापार तक के क्षेत्र में 12 समझौते किये जिससे पता चलता है कि दोनों देशों के सम्बन्ध किस प्रकार विविध क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहे हैं। अमीरात का दुबई महानगर व्यापारिक गतिविधियों का बहुत बड़ा वैश्विक केन्द्र बनता जा रहा है जिसमें भारत की सहभागिता भी रहती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच 100 अरब डाॅलर वार्षिक का कारोबार होता है जिसे 2032 तक बढ़ाकर 200 अरब डाॅलर करने का लक्ष्य दोनों नेताओं के बीच तय किया गया। इसके साथ ही भारत अमीरात से प्राकृतिक ईंधन गैस का भारी मात्रा में आयात करता है जिसे और बढ़ाने की दिशा में कारगर कदम उठाया गया है। भारत संयुक्त अरब अमीरात को परमाणु ऊर्जा के जरिये बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी व्यापक सहयोग करेगा और वहां छोटे न्यूक्लियर रियेक्टर लगायेगा साथ ही अन्तरिक्ष के क्षेत्र में संयुक्त उपक्रम चालू करेगा। यह सहयोग आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस के क्षेत्र से लेकर रक्षा के क्षेत्र तक में होगा। भारत व अमीरात की तीनों फौजें संयुक्त अभ्यास भी करती रही हैं जिसे एक सुरक्षात्मक ढांचे में विस्तारित किया जायेगा। अमीरात की सरकार लगातार आगे दस वर्षों तक भारत को प्राकृतिक गैस ईंधन की सप्लाई करती रहेगी। इस संक्षिप्त यात्रा के बाद दोनों देशों की ओर से एक संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया गया जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़ाने का अहद किया गया है। इस वक्तव्य में कहा गया है कि दोनों देशों के नेता एक-दूसरे की सार्वभौमिकता व भौगोलिक अखंडता का सम्मान करते हैं और स्वायत्ता को प्रश्रय देते हैं। दोनों देश बढ़ते रणनीतिक व रक्षा सहयोग को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं तथा इसे आपसी सम्बन्धों के बीच एक मजबूत स्तम्भ समझते हैं। वक्तव्य में दोनों देशों के थल, जल व वायु सेना प्रमुखों की एक-दूसरे के देश में की गई हाल की यात्राओं को भी बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है और विकसित होते रणनीतिक सम्बन्धों की प्रशंसा की गई है। इस सन्दर्भ में हमें सऊदी अरब व पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष हुए रक्षा समझौते का भी ध्यान रखना होगा, जिसमें कहा गया था कि किसी एक देश पर हुआ बाहरी आक्रमण दूसरे देश पर भी आक्रमण के समान समझा जायेगा। इस यात्रा में दोनों नेताओं के बीच आपसी सम्बन्धों के साथ ही ईरान व यमन की स्थिति पर भी चर्चा हुई तथा गाजा शान्ति प्रयास के बारे में भी विचार-विमर्श हुआ। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शान्ति व सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली कोशिशों का समर्थन किया। जहां तक आर्थिक व वाणिज्यिक मामलों का सम्बन्ध है तो परमाणु टैक्नोलॉजी के क्षेत्र में आधुनिक विकास को दोनों ही देश अपना समर्थन देते हैं तथा इस क्षेत्र में सहयोग करना चाहते हैं। दोनों देश एक-दूसरे के साथ डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहते हैं। इस सिलसिले में एक साझा ‘डाटा अम्बेसी’ स्थापित करने पर भी सहमति बनी है और अबू धाबी में एक ‘हाऊस आॅफ इंडिया’ के निर्माण पर भी दोनों देश सहमत हुए हैं।

Aditya Chopra

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