दक्षिणी कश्मीर के पुलगाम में आतंकवादयों ने छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोलियां मारकर हत्या कर दी। दोनों मजदूर ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। आतंकवादियों ने इनका नाम और धर्म पूछा और फिर इन पर गोलियां बरसा दीं। इस हमले में दीपक रात्रे और भूपेन्द्र की मौत हो गई। इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर में धर्म पूछकर गोलियां बरसाई जाती रही हैं। घाटी में महज 10 दिनों के भीतर टारगेट किलिंग की यह दूसरी वारदात है। गत 22 जुलाई को ही अनंतनाग के मुख्य बाजार लालचौक पर आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के हैड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी थी। घाटी में आम नागरिकों को चुन-चुन कर निशाना बनाने की आतंकवादियों की नीति पिछले कई वर्षों से सामने आती रही है। शिक्षक, कश्मीरी पंडित, बैंक अधिकारी, पुलिस कर्मी आैर गैर कश्मीर प्रवासी मजदूर आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। टारगेट किलिंग का मकसद दहशत फैलाना है। वास्तव में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद दम तोड़ चुका है। अब केवल बचे-खुचे आतंकी पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर कायराना हरकतों को अंजाम दे रहे हैं, ताकि अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहें।
अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अब कश्मीर में स्थिति शांतिपूर्ण और सामान्य है। घाटी में बाजार गुलजार हैं और देशभर के पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे हैं। विकास की बड़ी परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। कश्मीरी आवाम के बच्चे एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल करते जा रहे हैं। कश्मीरी आवाम की सोच में बहुत परिवर्तन आया है। कश्मीरी युवाओं की आंखों में उम्मीदों की चमक साफ देेखी जा रही है। कश्मीरी युवा अब शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक कार्यों में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार की मिशन यूथ जैसी पहलों के माध्यम से हजारों युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। वहां के युवक-युवतियों ने यूपीएसई और नीट जैसी कठिन परीक्षाओं में उच्च रैंक हासिल किए हैं और खेलों में भी कई पदक जीते हैं। दूसरी ओर अगर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानि पीआेके की बात करें तो वहां की जनता ने पाकिस्तान के हुकमरानों और पाकिस्तान सेना के अध्यक्ष मुनीर के खिलाफ जन विद्रोह किया हुआ है। रावलकोट, मुजफ्फराबाद और मीरपुर में हजारों लोग महंगाई, बिजली कटौती और सैन्यदमन के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए हैं। चारों तरफ आजादी के नारे गूंज रहे हैं और पीआेके की जनता भारत से मदद मांग रही है। अगर ब्लूचिस्तान की बात करें तो ब्लूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 80 प्रतिशत भूभाग पर कब्जा करके खुद को आजाद घोषित कर दिया है आैर अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय से आजाद ब्लूचिस्तान को मान्यता देने का अनुरोध किया है।
खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान ने पाकिस्तान की सेना के छक्के छुड़ाए हुए हैं। मुनीर की फौज पीओके में सस्ता आटा मांग रही जनता का नरसंहार कर रही है और पूरी दुनिया में पाकिस्तान के जुल्मों की कड़ी निंदा कर रही है। पाक सेना के अत्याचार भी जनता की आवाज को दबा सकने में विफल हो चुकी है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगनाओं और खुफिया एजैंसी आईएसआई को भारत के जम्मू-कश्मीर की शांति और विकास बर्दाश्त नहीं हो रहा, इसलिए वह कश्मीर घाटी में हमले करके पीओके में फैले असंतोष से भारत का ध्यान मोड़ना चाहते हैं और घाटी की धरा को लहूलुहान करके भय का माहौल पैदा करना चाहते हैं। 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम नरसंहार के बाद भारत ने 7 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। यह एक क्रॉस बॉर्डर सजा देने वाला सैन्य ऑपरेशन था। इसमें बहावलपुर, मुरीदके, कोटली और मुजफ्फराबाद में 9 बड़े टैरर ट्रेनिंग कैम्प और हथियार डिपो कुछ ही घंटों में तबाह कर दिए थे। यह हमला पाकिस्तान के अन्दर पिछले सभी क्रॉस बॉर्डर ऑपरेशन से कई कदम आगे था, जिसमें वायुसेना और लम्बी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। पाकिस्तान 24 घंटे में ही बिलबिलाने लगा था आैर हमले रोकने की गुहार करने लगा था।
पुलगाम हमले की िजम्मेदारी टीआरएफ ने ली है, जो एक छद्म नाम का संगठन है और पाकिस्तान के इशारे पर वारदातें करता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन महादेव शुरू किया। यह एक टारगेटेड ‘सर्च एंड टर्मिनेशन’ कैंपेन था जो लगभग 70 दिनों तक चला। इसे 22 मई, 2025 को शुरू किया गया था और इसका मकसद तीन पहचाने गए टीआरएफ मिलिटेंट्स को टैक करना और खत्म करना था। यह इंटेलिजेंस पर आधारित ऑपरेशन ह्यूमन इंटेलिजेंस, मोबाइल इंटरसेप्ट्स, ड्रोन सर्विलांस और सैटेलाइट इमेजरी के कॉम्बिनेशन पर निर्भर था। दाचीगाम-हरवान जंगल के इलाके में मिलिटेंट्स की मौजूदगी का पता चलने के बाद ऑपरेशन में दो महीने तक लंबे समय तक सर्विलांस फेज शामिल था। उन्नत सिग्नल-कैप्चरिंग उपकरणों का उपयोग करते हुए सुरक्षा बलों ने 22 जुलाई, 2025 को लश्कर-टीआरएफ से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक फैजल जट्ट, हमजा अफगानी और जिबरान नामक आतंकवादियों की उपस्थिति की पुष्टि की।
54 विशेष बलों, अर्धसैनिक बलों और राज्य पुलिस के एक संयुक्त अभियान दल ने जुलाई 2025 के अंत में पहलगाम हत्याओं के पीछे तीन आतंकवादियों को मार िगराया। ऑपरेशन महादेव के जरिये सुरक्षा बलों ने एक के बाद एक 60 से भी अधिक आतंकी मार गिराए, जिसके चलते आतंकवािदयों के टीआरएफ जैसे छोटे-छोटे गुट पैदा हुए। सुरक्षा बलों के सामने मुश्किल से पता चलने वाले हाइब्रिड ग्रुपों को खत्म करने की चुनौती अभी भी बरकरार है। जम्मू-कश्मीर में अधिकांश मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों से आकर निर्माण, ईंट-भट्ठों और अन्य असंगठित क्षेत्रों में काम करते हैं। यह मजदूर कश्मीर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। अब कश्मीर में बचे-खुचे आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए सेना पूरी तरह से तैयार है और इस बार भी आतंकवादी बच नहीं पाएंगे। पाकिस्तान ने अगर हिमाकत की तो वह स्वयं खंड-खंड हो जाएगा।
कश्मीर में फिर टारगेट किलिंग
Summary :
दक्षिणी कश्मीर के पुलगाम में आतंकवादयों ने छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की गोलियां मारकर हत्या कर दी। दोनों मजदूर ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे थे। आतंकवादियों ने इनका नाम और धर्म पूछा और फिर इन पर गोलियां बरसा दीं। इस हमले में दीपक रात्रे और भूपेन्द्र की मौत हो गई। इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर में धर्म पूछकर गोलियां बरसाई जाती रही हैं। घाटी में महज 10 दिनों के भीतर टारगेट किलिंग की यह दूसरी वारदात है। गत 22 जुलाई को ही अनंतनाग के मुख्य बाजार लालचौक पर आतंकवादियों ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात जम्मू-कश्मीर पुलिस के हैड कांस्टेबल…


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