छात्र आंदोलन….अ​धिकार, मर्यादा और जिम्मेवारी

Summary :

लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का मौलिक अधिकार है। हर किसी काे अपनी बात उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे आंदोलनों से सरकार और व्यवस्था को भी अपनी कमियों पर विचार करने का अवसर मिलता है लेकिन हर आंदोलन की सफलता केवल उसकी नहीं बल्कि उसके तरीके से तय होती है। किसी भी लोकतंत्र में छात्रों, युवाओं को जो देश का भविष्य हैं, अपनी बात रखने का अधिकार है। यदि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी, पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं की शिकायत हो तो उन…

लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करने और अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का मौलिक अधिकार है। हर किसी काे अपनी बात उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे आंदोलनों से सरकार और व्यवस्था को भी अपनी कमियों पर विचार करने का अवसर मिलता है लेकिन हर आंदोलन की सफलता केवल उसकी नहीं बल्कि उसके तरीके से तय होती है।
किसी भी लोकतंत्र में छात्रों, युवाओं को जो देश का भविष्य हैं, अपनी बात रखने का अधिकार है। यदि परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी, पेपर लीक या अन्य अनियमितताओं की शिकायत हो तो उन पर निष्पक्ष जांच और सुधार होना आवश्यक है। छात्रों की यह अपेक्षा कि उन्हें पारदर्शी आैर न्यायपूर्ण व्यवस्था मिले, स्वाभाविक और उचित है। हाल के आंदोलन के बाद सरकार ने परीक्षा सुधारों की दिशा में कदम उठाए आैर शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा भी दिया। लेकिन जो वास्तविक छात्र अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर ​चिंतित थे, उनमें से अधिकांश ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी, परन्तु यदि किसी आंदोलन में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो जाएं जिनका उद्देश्य केवल माहौल ​बिगाड़ना, गाली-गलौच करना, हिंसा करना या पुलिस पर हमला करना हो तो वह किसी भी अच्छे आंदोलन की गरिमा को नुक्सान पहुंचाता है। हिंसा और अभद्रता का समर्थन किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जा सकता। हमें यह भी समझना चाहिए कि पुलिस भी अपना वैधानिक कर्त्तव्य ​निभाती है। यदि कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो तो उसकी व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है। अगर पुलिस अनुचित व्यवहार करे तो उसकी भी ​निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हिंसा, गाली-गलौच और सार्वजनिक सम्पत्ति को नुक्सान पहुंचाने वालों के ​िवरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद है टकराव नहीं, अनुशासन है अराजकता नहीं। हमारी भारतीय संस्कृति, संस्कार, मर्यादा देश-विदेशों में मशहूर है। किसी भी व्यक्ति के लिए या किसी भी व्यक्ति द्वारा चाहे युवा हो या बुजुर्ग अपशब्द, गाली-गलौच या अभद्र भाषा का प्रयोग करना बहुत ही बुरा और हमारी भारतीय संस्कृति और हमारे संस्कारों के विरुद्ध है।
गुस्सा और निराशा ​किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन हमारे संस्कार हमें सिखाते हैं अपनी बात दृढ़ता से कहें परन्तु मर्यादा के साथ, हमें असहमति हो सकती है लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए। भारत की परम्परा संवाद, संयम और शिष्टाचार की रही है। लोकतंत्र में विचारों का विरोध किया जा सकता है, व्यक्ति का अपमान नहीं। समस्याओं का समाधान आंदोलन से हो सकता है लेकिन ​हिंसा, गाली-गलौच और अभद्रता से नहीं।
मुझे उन सभी विद्यार्थियों के प्रति दुख है और मेरी संवेदना हैै जिनको इस आंदोलन से शारीरिक या मानसिक कष्ट सहना पड़ा, क्योंकि किसी भी छात्र का भविष्य अनिश्चितता में नहीं होना चाहिए। उनकी समस्याओं को गम्भीरता से सुनना और न्यायपूर्ण समाधान देना सरकार और समाज की जिम्मेदारी है। साथ में मुझे उन पुलिसकर्मियों के प्रति भी सम्मान और दुख है, जिन्होंने दिन-रात ड्यूटी करते हुए चोट लगी। उनके परिवारों और उनके बच्चों का दुख भी देखा, यह सब देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में आंदोलन होना कोई बड़ी बात नहीं लेकिन सफल आंदोलन वही होता है जो समाज को जोड़ता है, समाधान ढूंढता है या करवाता है और मर्यादा बनाए रखता है, न कि वह जो समाज को बांट दे या हिंसा को बढ़ावा दे।
पिछले दिनों एक किताब के विषय में संगीता जेतली जी के घर देश की कुछ प्रमुख महिलाओं की गोष्टी थी, उसमें सबसे बड़ा यही ​िवषय रहा कि आज स्कूल, काॅलेज, विद्यालयों में नैतिक कर्त्तव्य और नैतिक ​िशक्षा की जरूरत है। मेरा मानना है कि इसकी शुरूआत घर से ही होनी चाहिए। हर मां अपने बच्चे की प्रथम गुरु है तो घर से ही ​िशक्षा होनी चाहिए कि बच्चों में संस्कार, भारतीय संस्कृति, मर्यादा को समझना होगा। बड़े-छोटे की तमीज और भाषा पर ​िनयंत्रण जरूरी है। यह माता-पिता ही शिक्षा दे सकते हैं या फिर विद्यालय, शिक्षक। जिस-जिस बच्चे ने, युवा ने अभद्र भाषा का उपयोग किया है उसके मां-बाप को और स्वयं उन्हें चिंतन करना चाहिए। क्योंकि ऐसी भाषा किसी को भी शोभा नहीं देती। खासकर लड़कियों के मुख से, हर देखने, सुनने वाले को शर्म आ रही है। पीएम पर यह कमेंट करने वाली इस 15 वर्षीय बच्ची ने भी माफी मांग ली और कहा कि मैं बहकावे में आ गई थी।
प्रधानमंत्री मोदी जी ने रात इंस्ट्राग्राम पर अपना वीडियो संदेश डालकर उनके बारे में अपशब्द कहने वालों को माफी दे दी और कहा कि ये बच्चे भटक गए हैं और इन्हें सजा की नहीं माफी की जरूरत है। पीएम का यह बयान व्यापक उदारता से भरा पड़ा है। आंदोलन अगर ऐसा रूप लेता है तो मरीज, बुजुर्गों, बच्चों आैर काम पर जाने वाले लोगों को कठिनाई होती है। व्यापार और रोजगार पर असर पड़ता है। समाज में तनाव आैर असुरक्षा का वातावरण हाेता है। छात्रों की पढ़ाई और भविष्य भी प्रभावित होता है। रोजमर्रा की आवाजाही आैर यातायात सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। अंत में विद्यार्थियों को यही कहूंगी कि आप देश का भविष्य हो। आपकी ऊर्जा, आपकी प्रतिभा आैर आपकी आवाज भारत के कल का निर्माण करेगी। इसलिए आपकी बात का महत्व है लेकिन उतना ही महत्व आपकी भाषा आैर व्यवहार का भी है। इसके साथ मैं संसद के सदस्यों को भी यही कहूंगी कि आपको सारा देश देख और सुन रहा है। आपको अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन मर्यादा और शालीनता से। हमारी भारतीय संस्कृति हमें ​िसखाती है कि मतभेद हो सकते हैं लेकिन मनभेद नहीं। विरोध हो सकता है ल​े​िकन अपमान नहीं। यही हमारे संस्कार हैं, यही लोकतंत्र की गरिमा है।

Kiran Chopra